41 किमी के 120 रुपए: बयाना टोल प्लाजा से रोज 3.41 लाख की वसूली, नियम पर उठे सवाल
राजस्थान में टोल वसूली का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें नियमों पर सवाल खड़े कर दिए है। भरतपुर जिले के बयाना इलाके में करीब 41 किलोमीटर का स्टेट हाईवे है। इतने छोटे हिस्से में तीन टोल प्लाजा चल रहे हैं। वहीं सिकंदरा से जयपुर के लंबे नेशनल हाईवे पर सिर्फ दो टोल हैं।
41 किमी में तीन टोल
बयाना क्षेत्र में ब्रह्मबाद, अतरामपुर और भौंडा टोल प्लाजा हैं। इन तीनों से गुजरने पर कार चालक को एक तरफ करीब 120 रुपए चुकाने पड़ते हैं। आने-जाने का हिसाब जोड़ें, तो यह खर्च करीब 240 रुपए तक पहुंच जाता है।
2014 से चल रहे तीनों टोल
ये तीनों बयाना टोल प्लाजा 2014 से चल रहे बताए जा रहे हैं। यानी पिछले करीब 12 साल से लोग इस हिस्से पर तीन बार टोल दे रहे हैं। अगर आप इस रास्ते से रोज गुजरते हैं, तो यह बोझ आप बखूबी समझते होंगे।
प्रति किलोमीटर कितना पड़ता है टोल
41 किमी के लिए 120 रुपए का मतलब है करीब 2.9 रुपए प्रति किलोमीटर। यह आंकड़ा तब और अहम हो जाता है, जब इसकी तुलना नेशनल हाईवे से करें।
नेशनल हाईवे से तुलना
सिकंदरा से जयपुर के रास्ते पर सिकंदरा और राजाधोक टोल प्लाजा हैं। कार के लिए दोनों टोल पर कुल करीब 160 रुपए लगते हैं। इन दोनों टोल की दरें उपलब्ध टोल रिकॉर्ड में भी दर्ज हैं। यानी कहीं ज्यादा लंबी दूरी के लिए टोल में फर्क सिर्फ 40 रुपए का है। छोटे से हिस्से पर 120 रुपए और लंबे रूट पर 160 रुपए। सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह आम आदमी के साथ न्याय है?
टोल प्लाजा 40 किमी नियम क्या कहता है
राजस्थान स्टेट हाईवे फीस नियम, 2015 में दूरी का साफ प्रावधान है। एक ही स्टेट हाईवे और एक ही दिशा में दो टोल के बीच सामान्य तौर पर 40 किमी दूरी होनी चाहिए। यही टोल प्लाजा 40 किमी नियम कहलाता है।
नियम में अपवाद भी
हालांकि स्टेट हाईवे टोल नियम में कुछ अपवाद भी दिए गए हैं। विशेष परिस्थितियों में 40 किमी से कम दूरी पर भी टोल लगाने की अनुमति है। यही अपवाद अब बहस के केंद्र में है।
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि तीनों टोल 2014 से चल रहे बताए गए हैं। जबकि यह नियम 2015 का है। इसी वजह से बयाना की तीन टोल वाली व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
41 किमी, तीन टोल और एक ही सवाल
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक तीनों स्टेट हाईवे टोल से रोज औसतन 2,804 वाहन गुजरते हैं। इनसे रोज करीब 3.41 लाख रुपए का टोल वसूला जाता है। 30 दिन के औसत से यह भरतपुर टोल वसूली करीब 1.02 करोड़ रुपए महीना बैठती है।
दूसरी ओर सिकंदरा और राजाधोक टोल से रोज औसतन 38,941 वाहन गुजरते हैं। इन दोनों टोल से रोज करीब 60.83 लाख रुपए का संग्रह होता है। यानी नेशनल हाईवे पर वाहन करीब 14 गुना ज्यादा हैं।
आरोप है कि बयाना की व्यवस्था का सीधा असर वाहन चालकों की जेब पर पड़ रहा है। ट्रांसपोर्टरों पर भी इसका बोझ बढ़ रहा है। toll tax Rajasthan यानी राजस्थान में टोल टैक्स का यह मामला अब चर्चा में है।
आरएसआरडीसी का दावा, सब नियम से
आरएसआरडीसी (RSRDC – Rajasthan State Road Development and Construction Corporation) इन आरोपों से सहमत नहीं है। आरएसआरडीसी का कहना है कि सभी टोल नियमों के अनुसार चल रहे हैं। यानी आरएसआरडीसी टोल को पूरी तरह नियमानुसार बता रहा है। लेकिन किस अपवाद के तहत 41 किमी में तीन टोल लगे, यह अभी साफ नहीं है।
इसी सवाल ने राजस्थान टोल प्लाजा विवाद को जन्म दिया है। Rajasthan toll plaza व्यवस्था की पारदर्शिता पर यह मामला अहम सवाल खड़ा करता है।
स्थानीय लोगों को टोल में राहत
टोल प्लाजा के 20 किमी दायरे में रहने वालों के लिए पास की सुविधा है। इसके लिए स्थानीय निवास का प्रमाण देना होता है। आधार कार्ड, वोटर आईडी या बिजली का बिल इसके लिए मान्य है।
मासिक पास किसे मिलता है
नॉन-कमर्शियल निजी वाहनों के लिए मासिक पास की सुविधा है। इसकी दर समय-समय पर बदलती रहती है। पास आम तौर पर उसी टोल प्लाजा पर लागू होता है। कमर्शियल वाहनों को यह सुविधा सामान्यतः नहीं मिलती। राजस्थान के नियमों में 20 किमी सीमा वाली मासिक पास व्यवस्था का प्रावधान है।
FAQs
- राजस्थान के बयाना इलाके में तीन टोल प्लाजा क्यों हैं?
राजस्थान के बयाना इलाके में 41 किमी के स्टेट हाईवे पर तीन टोल प्लाजा हैं, जो 2014 से चल रहे हैं। यह व्यवस्था नियम के तहत आई है, लेकिन इसके पीछे का कारण और यह नियम कितने मान्य हैं, इस पर सवाल उठ रहे हैं। - क्या 41 किमी में तीन टोल प्लाजा लगाने के लिए कोई नियम है?
हाँ, राजस्थान स्टेट हाईवे फीस नियम, 2015 के तहत एक ही दिशा में दो टोल के बीच सामान्यतः 40 किमी की दूरी होनी चाहिए। लेकिन विशेष परिस्थितियों में 40 किमी से कम दूरी पर भी टोल लगाने की अनुमति है। - स्थानीय निवासियों के लिए टोल प्लाजा पर राहत कैसे मिलती है?
टोल प्लाजा के 20 किमी दायरे में रहने वालों के लिए मासिक पास की सुविधा है, जिसके लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी या बिजली के बिल के रूप में स्थानीय निवास का प्रमाण देना होता है।