40 विला-कॉटेज मामले में IAS शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर को नोटिस, सरकार ने 7 दिन में मांगा जवाब
यह मामला 27 अक्टूबर को सामने आया था। शिखर अग्रवाल, उनकी IPS पत्नी, दोनों बेटों और सास-ससुर ने गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से 40 विला-कॉटेज खरीदे थे। खरीद के बाद इन संपत्तियों को उसी कंपनी को लीज पर दे दिया गया। मामला सामने आने के बाद सरकार ने दोनों अधिकारियों को उनके पदों से हटाकर APO कर दिया। इसके बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने भी मामले में प्रारंभिक जांच शुरू की।
6.16 करोड़ में खरीदे 40 विला-कॉटेज
परिवार ने अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित रिसॉर्ट में 20 विला और उदयपुर के बुझड़ा स्थित रिसॉर्ट में 20 कॉटेज खरीदे। इन संपत्तियों की कुल खरीद कीमत करीब 6 करोड़ 16.5 लाख रुपए बताई गई है। दोनों जगह संपत्तियों का पंजीकरण अलग-अलग समय पर हुआ। उदयपुर के बुझड़ा में 20 कॉटेज की खरीद सितंबर 2023 में हुई, जबकि अलवर के अजबगढ़ में 20 विला मार्च 2026 में खरीदे गए।
खरीद के बाद इन संपत्तियों को गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को ही लीज पर दे दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, उदयपुर के प्रत्येक कॉटेज के लिए सालाना 4 लाख रुपए और अलवर के प्रत्येक विला के लिए 5 लाख रुपए किराया तय किया गया। इस हिसाब से 40 संपत्तियों से सालाना करीब 1.80 करोड़ रुपए की लीज आय बनती है। इसमें उदयपुर से 80 लाख और अलवर से एक करोड़ रुपए की सालाना आय शामिल है।
प्रॉपर्टी रिटर्न में जानकारी पर सवाल
इस पूरे मामले में अधिकारियों की ओर से दाखिल इमूवेबल प्रॉपर्टी रिटर्न यानी IPR भी जांच के दायरे में है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शिखर अग्रवाल ने 7 जनवरी 2026 को दाखिल रिटर्न में 14 संपत्तियों का ब्योरा दिया था। वहीं प्रशाखा माथुर ने 8 जनवरी 2026 को दाखिल IPR में संपत्ति का ब्योरा शून्य बताया था। अब विभाग यह देख रहा है कि संपत्तियों के लेन-देन की जानकारी नियमानुसार दी गई थी या नहीं।
हालांकि, यहां तारीखों का अंतर समझना जरूरी है। अलवर के अजबगढ़ में 20 विला की खरीद मार्च 2026 में हुई थी, जबकि दोनों अधिकारियों ने अपना संबंधित IPR जनवरी 2026 में दाखिल किया था। इसलिए जनवरी के रिटर्न में मार्च में खरीदी गई संपत्तियों का ब्योरा नहीं होने को अपने आप में जानकारी छिपाना नहीं कहा जा सकता। विभाग को हर संपत्ति की खरीद की तारीख, मालिकाना हक और उस पर लागू रिपोर्टिंग नियमों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
ACB भी कर रही है जांच
ACB ने शिखर अग्रवाल के खिलाफ प्रारंभिक जांच दर्ज की है। ब्यूरो की जांच में आरोप है कि अधिकारी ने अपने पद का इस्तेमाल कर गोयल फैशंस को अनुचित लाभ पहुंचाया। एजेंसी कंपनी को कथित रियायतों, निर्माण संबंधी मंजूरियों और विशेष आर्थिक पैकेज की भी पड़ताल कर रही है। साथ ही संपत्तियों की खरीद कीमत, लीज समझौतों और धन के स्रोत की जांच की जा रही है।
जवाब के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
कार्मिक विभाग के नोटिस का जवाब मिलने के बाद दोनों अधिकारियों के स्पष्टीकरण और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। इसके आधार पर सेवा नियमों के तहत आगे की कार्रवाई पर फैसला हो सकता है। फिलहाल नोटिस जारी होना या ACB की प्रारंभिक जांच शुरू होना दोष साबित होना नहीं है। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि संपत्तियों का पूरा ब्योरा कब और किस रूप में देना जरूरी था और क्या किसी अधिकारी ने नियमों का उल्लंघन किया है।