राजस्थान में MBBS की 61% सीटें खाली, NEET UG काउंसलिंग के राउंड-3 में निजी कॉलेजों की स्थिति ने चौंकाया
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में NEET UG 2026 काउंसलिंग का तीसरा राउंड पूरा हुआ।
- निजी मेडिकल कॉलेजों में बड़ी संख्या में MBBS सीटें खाली बताई जा रही हैं।
- निजी कॉलेजों की फीस सरकारी कॉलेजों की तुलना में ज्यादा है।
- राजस्थान की काउंसलिंग में 3,866 MBBS सीटें शामिल थीं।
- आगे की काउंसलिंग में खाली सीटों की स्थिति बदल सकती है।
राजस्थान में NEET UG 2026 काउंसलिंग के तीसरे राउंड के बाद मेडिकल एडमिशन को लेकर बड़ी तस्वीर सामने आई है। प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की बड़ी संख्या में सीटें अब भी खाली बताई जा रही हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, निजी मेडिकल कॉलेजों की करीब 61 फीसदी MBBS सीटों पर राउंड-3 तक एडमिशन नहीं हो पाया है।
यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हर साल हजारों विद्यार्थी NEET UG के जरिए MBBS में दाखिले के लिए काउंसलिंग में शामिल होते हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीमित सीटों के कारण निजी कॉलेजों की सीटें भी विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा विकल्प रहती हैं। इसके बावजूद निजी कॉलेजों में बड़ी संख्या में सीटें खाली रहना मेडिकल एडमिशन की मौजूदा स्थिति पर सवाल खड़े करता है।
राउंड-3 तक भी नहीं भर पाईं बड़ी संख्या में सीटें
राजस्थान में NEET UG काउंसलिंग के तहत सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों की अलग-अलग कैटेगरी में सीटें उपलब्ध कराई गई हैं। सितंबर में जारी संशोधित सीट मैट्रिक्स के मुताबिक राजस्थान में कुल 3,866 MBBS सीटें काउंसलिंग में शामिल थीं। इनमें 696 सरकारी सीटें, 142 सरकारी/RUHS CMS एवं RAJMES मैनेजमेंट सीटें और 352 NRI सीटें थीं। वहीं निजी कॉलेजों में 2,239 सामान्य और 437 मैनेजमेंट सीटें शामिल थीं।
यानी राज्य की MBBS सीटों में निजी मेडिकल कॉलेजों की हिस्सेदारी काफी बड़ी है। ऐसे में इन सीटों का बड़ी संख्या में खाली रहना मेडिकल एडमिशन के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
आखिर निजी कॉलेजों की सीटें क्यों रह गईं खाली?
निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस सरकारी कॉलेजों की तुलना में काफी अधिक होती है। ऐसे में NEET में अच्छी रैंक हासिल करने वाले कई विद्यार्थी पहले सरकारी मेडिकल कॉलेजों को प्राथमिकता देते हैं। वहीं निजी कॉलेजों की फीस और अन्य खर्च कई विद्यार्थियों और परिवारों के लिए बड़ा फैसला बन जाते हैं।
काउंसलिंग के अलग-अलग राउंड में विद्यार्थियों को कॉलेज और कोर्स चुनने का मौका मिलता है। ऐसे में कई उम्मीदवार पहले राउंड में मिली सीट को अपग्रेड करने की कोशिश करते हैं और अगले राउंड में बेहतर विकल्प का इंतजार करते हैं।
यही वजह है कि तीसरे राउंड तक सीटों की स्थिति अंतिम तस्वीर नहीं मानी जाती। आगे की काउंसलिंग और बची हुई सीटों के लिए होने वाली प्रक्रिया से स्थिति में बदलाव हो सकता है।
निजी कॉलेजों में MBBS की सीटें काफी ज्यादा
राजस्थान में कई निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की सीटें उपलब्ध हैं। उपलब्ध सीट डेटा के अनुसार प्रदेश के निजी संस्थानों में कई कॉलेजों में 100 से 250 तक MBBS सीटें हैं। इनमें जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, राजसमंद, कोटा और श्रीगंगानगर समेत कई शहरों के मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।
ऐसे में अगर इन कॉलेजों में सीटें खाली रह जाती हैं तो इसका असर केवल विद्यार्थियों की काउंसलिंग पर ही नहीं, बल्कि निजी मेडिकल कॉलेजों की एडमिशन प्रक्रिया पर भी पड़ता है।
सरकारी कॉलेजों की सीटों के लिए ज्यादा प्रतिस्पर्धा
NEET UG में विद्यार्थियों की सबसे ज्यादा प्राथमिकता सरकारी मेडिकल कॉलेजों को मिलती है। इसकी बड़ी वजह कम फीस और बेहतर आर्थिक विकल्प माना जाता है। दूसरी ओर निजी कॉलेजों में फीस का बोझ काफी अधिक हो सकता है।
राजस्थान में भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटों की संख्या निजी संस्थानों की तुलना में सीमित है। इसलिए अच्छी रैंक वाले उम्मीदवार सरकारी कॉलेजों को प्राथमिकता देते हैं, जबकि बाद की रैंक वाले उम्मीदवारों के सामने निजी कॉलेजों के विकल्प रहते हैं।
आगे क्या होगा?
राउंड-3 के बाद खाली बची सीटों को लेकर आगे की काउंसलिंग प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। जिन विद्यार्थियों को अभी तक MBBS सीट नहीं मिली है, उन्हें आगे जारी होने वाली सीट मैट्रिक्स और काउंसलिंग शेड्यूल पर नजर रखनी होगी।
हालांकि, किसी भी सीट को लेकर अंतिम निर्णय लेने से पहले उम्मीदवारों को संबंधित काउंसलिंग बोर्ड की आधिकारिक सीट मैट्रिक्स, फीस, पात्रता और रिपोर्टिंग नियम जरूर जांचने चाहिए। सीटों की संख्या और उपलब्धता काउंसलिंग के दौरान बदल सकती है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी NEET UG 2026 काउंसलिंग के तीसरे राउंड की प्रक्रिया सितंबर में आगे बढ़ी थी और राजस्थान के लिए अलग से राज्य स्तरीय सीट मैट्रिक्स जारी की गई थी।