VKI की 63 फैक्ट्रियों को बचाने की जंग, रीको की अर्जी पर NGT में 4 नवंबर को सुनवाई
राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल डवलपमेंट व इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन (RIICO) ने बीड़ पापड़ की वन भूमि पर बसी विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र (VKI) की औद्योगिक इकाईयों को बचाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल सेंट्रल जोन भोपाल में अर्जी दायर की है। ट्रिब्यूनल इस पर 4 नवंबर को सुनवाई करेगा।
रीको ने एनजीटी भोपाल में पेश अर्जी में कहा है कि वह बीड पापड़ की वन भूमि और सुरक्षा उपायों के एवज में 2.9087 हेक्टेयर वैकल्पिक भूमि और वन की लागत (afforestation costs) देने को तैयार है। रीको प्रयास इस वन-भूमि पर स्थापित औद्योगिक इकाइयों को बचाने के लिए है। मामले में एनजीटी 4 नवंबर को सुनवाई करेगी।
औद्योगिक इकाईयों को हटाने के दिए थे आदेश
16 सितंबर, 2026 को एनजीटी ने बीड पापड़ के खसरा नंबर 7/2 की 2.9087 हेक्टेयर वन भूमि पर चल रही औद्योगिक इकाईयों को हटाकर इस पर कब्जा लेने के आदेश दिए थे। यह वन-भूमि विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र (VKI) का हिस्सा है।
वन-भूमि पर अवैध कब्जा
इस संबंध में जयपुर निवासी कमल कांत तिवारी ने अर्जी दायर की थी। उनका कहना था कि रीको और विभिन्न वाणिज्यिक इकाइयों ने जयपुर तहसील के ग्राम बीड़ पापड के खसरा नंबर 7/2 की 2.9087 हेक्टेयर वन-भूमि पर अवैध रूप से एक घने कारखाने और औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर लिया है।
राजस्व रिकॉर्ड और जमाबंदी स्पष्ट रूप से खसरा नंबर 7/2 को वन विभाग की स्वामित्व की वन-भूमि है। यह आरक्षित वन और नाहरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के पर्यावरण-संवेदनशील जोन का अभिन्न अंग है।
केंद्र सरकार से पूर्व अनुमोदन (prior approval) प्राप्त किए बिना इस भूमि को गैर-वन उद्देश्यों के लिए काम में लिया जा रहा है। यह वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 की धारा—2 का उल्लंघन है।
एनजीटी ने माना वन-भूमि
एनजीटी ने रीको की भूमि के कुछ हिस्से को औद्योगिक उपयोग के लिए जारी करने की दलील को खारिज कर दिया था। ट्रिब्यूनल ने कहा कि रिकॉर्ड से यह साबित है कि खसरा नंबर 7/2 कभी भी रीको को कानूनी रूप से हस्तांतरित नहीं किया गया और रीको ने बिना उचित अनुमति के वन भूमि पर कब्जा कर लिया है।
मिलीभगत और प्रशासनिक लापरवाही
ट्रिब्यूनल ने वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को अवैध निर्माणों पर आंखें मूंदने के लिए फटकार लगाई थी। ट्रिब्यूनल ने कहा था कि सरकारी खजाने से वेतन पाने वाले संरक्षकों की मिलीभगत या घोर लापरवाही के बिना इस किस्म के भारी अतिक्रमण असंभव हैं।
यह था एनजीटी का आदेश
एनजीटी ने मामले में 16 सितंबर,2026 को आदेश दिया था। इसमें राजस्थान के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) और प्रमुख सचिव,वन एवं पर्यावरण विभाग को वन विभाग के नाम दर्ज, बीड़ पापड गांव के खसरा नंबर 7/2 क्षेत्रफल 2.9087 हेक्टेयर वन-भूमि पर 30 दिन में कब्जा लेने के आदेश दिए थे। एनजीटी ने इस काम में राज्य के गृह सचिव को प्रशासनिक और पुलिस की मदद देने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच करने के आदेश भी दिए थे।
63 फैक्ट्रियों पर मंडरया खतरा
एनजीटी के आदेश से विश्वकर्मा इंडस्ट्रियल एरिया में न केवल 63 फैक्ट्रियों पर बंद होने के आदेश से हजारों कर्मचारियों को बेरोजगारी का खतरा बढ़ गया है।
कर्मचारियों और मजदूरों की बढ़ी चिंता
वन भूमि पर चल रही फैक्ट्रियों में करोड़ों रुपए का निवेश है। अधिकांश ने बैंक से कर्ज लेकर कारोबार खड़ा किया है। चिंता सिर्फ फैक्ट्री मालिकों की नहीं है, बल्कि उन हजारों कर्मचारियों और मजदूरों की है जिनकी रोजी-रोटी इन्हीं फैक्ट्रियों से चलती है। यदि फैक्ट्रियां बंद होती हैं तो इन लोगों के सामने सीधे रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा।