ड्यूटी से नदारद 600 डॉक्टरों पर गिर सकती है गाज, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी बेअसर

Ashish Bhardwaj | Oct 06, 2026, 12:13 IST
ड्यूटी से नदारत डॉक्टरों पर कानूनी कार्रवाही की तैयारी
राजस्थान में 678 सरकारी डॉक्टरों की ड्यूटी में अनियमितता को लेकर कार्रवाई की प्रक्रिया आरंभ होने जा रही है। इन डॉक्टरों ने नए स्थान पर ड्यूटी जॉइन नहीं की, भले ही कई आधिकारिक नोटिस उन्हें दिए गए रहे। स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें अंतिम बार सेवा समाप्ति की चेतावनी दी है।

राजस्थान में ड्यूटी से दूर 678 सरकारी डॉक्टरों की नौकरी अब खतरे में है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय ने इनकी सूची जारी कर दी है। इन्हें अपना पक्ष रखने का आखिरी मौका दिया गया है। तय समय में जवाब नहीं आया, तो सेवा समाप्ति की कार्रवाई होगी। विभाग अप्रैल से अब तक तीन बार चेतावनी दे चुका है।



कौन हैं ये राजस्थान गायब डॉक्टर?

ये वे डॉक्टर हैं, जिनका तबादला या नई पोस्टिंग हुई थी। आदेश के बाद भी इन्होंने नई जगह कार्यग्रहण नहीं किया। कार्यग्रहण यानी नई जगह जाकर ड्यूटी जॉइन करना। सूची में वे डॉक्टर भी शामिल हैं, जो लंबे समय से अनुपस्थित हैं। आम बोलचाल में इन्हें गायब डॉक्टर कहा जा रहा है। Rajasthan absent doctors की यह संख्या करीब 678 है।



अप्रैल से तीन बार चेतावनी

चिकित्सा विभाग के अनुसार अप्रैल से अब तक तीन बार चेतावनी जारी की जा चुकी है। इसके बाद भी करीब 678 डॉक्टरों ने ड्यूटी जॉइन नहीं की। अब विभाग ने इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।



चिकित्सा विभाग राजस्थान नोटिस में क्या है?

निदेशालय ने सभी डॉक्टरों को नोटिस जारी किया है। नोटिस के साथ 678 डॉक्टरों की पूरी सूची भी लगाई गई है। Rajasthan health department notice में हर डॉक्टर का ब्योरा दर्ज है। सूची में डॉक्टरों के नाम, पद और योग्यता लिखी गई है। जन्मतिथि और आरपीएससी (RPSC – Rajasthan Public Service Commission) से जुड़ा विवरण भी दर्ज है।



राजस्थान सेवा नियमों के तहत होगी कार्रवाई

विभाग ने साफ किया है कि तय समय में अभ्यावेदन देना जरूरी है। अभ्यावेदन यानी लिखित में अपना पक्ष रखना। ऐसा नहीं करने वाले डॉक्टरों पर राजस्थान सेवा नियमों के तहत कार्रवाई होगी। यानी चिकित्सा विभाग राजस्थान नोटिस अब आखिरी चेतावनी जैसा है।



678 डॉक्टरों की सेवा समाप्ति की तैयारी

विभाग ने साफ संकेत दिया है कि जवाब नहीं आया तो नौकरी जाएगी। 678 डॉक्टरों की सेवा समाप्ति की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अंतिम फैसला डॉक्टरों के जवाब के बाद होगा।



पीजी करने वालों से होगी बांड राशि की वसूली

विभाग ने कुछ डॉक्टरों पर और ज्यादा सख्ती के संकेत दिए हैं। ये वे डॉक्टर हैं, जिन्होंने सेवारत कोटे से पीजी (PG – Post Graduation) की पढ़ाई पूरी की है। सेवारत कोटा यानी नौकरी में रहते हुए आगे की पढ़ाई के लिए तय सीटें। ऐसे डॉक्टरों से बांड की शर्तों के मुताबिक राशि वसूली जाएगी।



राजस्थान मेडिकल काउंसिल पंजीयन निरस्त हो सकता है

इतना ही नहीं, ऐसे डॉक्टरों का पंजीयन भी खतरे में है। राजस्थान मेडिकल काउंसिल पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई भी हो सकती है। पंजीयन रद्द होने पर डॉक्टरों की प्रैक्टिस पर सीधा असर पड़ेगा। यह कार्रवाई डॉक्टरों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है।



मरीज किसके भरोसे?

डॉक्टरों के लंबे समय तक ड्यूटी से बाहर रहने पर सवाल उठ रहे हैं। इन डॉक्टरों की गैरमौजूदगी में मरीजों का इलाज कैसे होता रहा? उनकी जगह अस्पतालों में चिकित्सा सेवा किसके भरोसे चली? 678 डॉक्टरों का ड्यूटी पर न होना छोटी बात नहीं है। सरकारी अस्पतालों पर आम मरीज सबसे ज्यादा निर्भर रहते हैं। सोचिए, गांव के अस्पताल में डॉक्टर कागज पर तैनात हो, पर मौजूद न हो।



डॉ. रविप्रकाश शर्मा ने क्या कहा?

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रविप्रकाश शर्मा ने स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि कई नोटिस के बाद भी करीब 678 डॉक्टर नहीं लौटे। ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।



अब आगे क्या?

अब गेंद डॉक्टरों के पाले में है। उन्हें तय समय में अपना पक्ष रखना होगा। जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर विभाग सेवा समाप्ति की ओर बढ़ेगा। राजस्थान स्वास्थ्य विभाग न्यूज में यह एक बड़ी कार्रवाई है। अब नजर इस पर है कि कितने डॉक्टर लौटते हैं।



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