दिल्ली के बीकानेर हाउस से रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी से 74 तस्वीरें हटाईं, प्रियंका-गहलोत ने उठाए सवाल
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) के बेटे रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी से 70 से ज्यादा तस्वीरें हटाए जाने के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। दिल्ली के बीकानेर हाउस में आयोजित होने वाली प्रदर्शनी से दिल्ली के युवा आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरें हटाने का आरोप लगा है। रेहान ने दावा किया कि प्रदर्शनी शुरू होने से कुछ घंटे पहले उन्हें तस्वीरें हटाने को कहा गया। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर अभिव्यक्ति की आजादी दबाने का आरोप लगाया।
गहलोत ने बताया लोकतंत्र पर हमला
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तस्वीरें हटाने की कार्रवाई को सेंसरशिप बताते हुए इसे लोकतंत्र पर हमला कहा। वहीं, प्रियंका गांधी ने भी बेटे का समर्थन किया। बीकानेर हाउस प्रशासन की ओर से इस मामले पर तत्काल कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया।
105 में से 74 तस्वीरें हटाने को कहा
रेहान वाड्रा (Raihan Vadra) की फोटो प्रदर्शनी का नाम ‘नो आइडिया इज फाइनल’ है। इसकी झलक बुधवार, 21 अक्टूबर को दिखाई गई थी। प्रदर्शनी आम लोगों के लिए गुरुवार, 22 अक्टूबर से खुलनी थी। रेहान के मुताबिक, कुल 105 तस्वीरें प्रदर्शित की जानी थीं, लेकिन इनमें से 74 तस्वीरों को हटाने या बदलने के लिए कहा गया।
रेहान ने बताया कि बीकानेर हाउस प्रबंधन ने तस्वीरों की राजनीतिक प्रकृति और उन्हें दिखाने के समय पर आपत्ति जताई। उनके मुताबिक, बुधवार दोपहर करीब 3:30 बजे लिखित निर्देश मिला कि शाम 5 बजे तक तस्वीरें हटा दी जाएं, अन्यथा प्रदर्शनी रद्द की जा सकती है। प्रदर्शनी शाम 7 बजे शुरू होनी थी।
उनका कहना है कि तस्वीरों में पिछले छह महीने के दौरान दिल्ली में हुए छात्र और युवा आंदोलनों को कैमरे में कैद किया गया था। प्रदर्शनी में वन्यजीवों की तस्वीरें और अमूर्त कला से जुड़ी कृतियां भी शामिल थीं।
तिरंगे वाली तस्वीरों पर भी विवाद
रेहान ने आरोप लगाया कि आपत्ति केवल विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरों तक सीमित नहीं थी। उनसे राष्ट्रीय ध्वज यानी तिरंगे की दो तस्वीरें हटाने के लिए भी कहा गया। रेहान ने शुरुआत में इन्हें हटाने से इनकार कर दिया। बाद में उनके मुताबिक, प्रदर्शनी जारी रखने के लिए उन्हें तस्वीरें हटानी पड़ीं।
रेहान का कहना है कि उनका उद्देश्य आंदोलनों का दस्तावेजीकरण करना था, न कि किसी राजनीतिक दल का प्रचार करना। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनी की रूपरेखा पहले ही प्रबंधन के साथ साझा की गई थी। इसके बावजूद आखिरी समय पर तस्वीरें हटाने का निर्देश दिया गया।
तस्वीरें हटाने के बाद खाली फ्रेम लगाने की कोशिश भी की गई, लेकिन रेहान के मुताबिक, प्रबंधन ने खाली फ्रेमों पर भी आपत्ति जताई। अंत में प्रदर्शनी में करीब 35 तस्वीरें ही बचीं।
प्रियंका गांधी बोलीं- बेटे पर गर्व है
प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बेटे का समर्थन करते हुए लिखा कि जब सत्ता में बैठा व्यक्ति किसी दूसरे की अभिव्यक्ति से डरने लगता है, तो वह अपनी ताकत पहले ही खो चुका होता है। उन्होंने कहा कि रेहान सच के साथ खड़े हैं और उन्हें अपने बेटे पर हमेशा गर्व रहेगा।
प्रियंका ने तस्वीरें हटाए जाने को युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि आज उनके बेटे के साथ ऐसा हुआ है, तो कल किसी दूसरे कलाकार के साथ भी ऐसा हो सकता है।
गहलोत ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस मामले पर भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि बीकानेर हाउस राजस्थान सरकार की संपत्ति है और वहां एक युवा कलाकार की अभिव्यक्ति को दबाने की कोशिश की गई।
गहलोत ने कहा कि प्रदर्शनी में दिल्ली के युवा आंदोलनों से जुड़ी तस्वीरें थीं। उन्होंने सवाल किया कि यदि तस्वीरों में दिखाई गई घटनाएं गलत नहीं थीं, तो उन्हें हटाने की जरूरत क्यों पड़ी। गहलोत ने इस कार्रवाई को सेंसरशिप का उदाहरण बताते हुए सरकार से जवाब मांगा। ये आरोप कांग्रेस नेताओं की ओर से लगाए गए हैं।
बीकानेर हाउस की भूमिका पर सवाल
बीकानेर हाउस दिल्ली में राजस्थान सरकार के अधीन संचालित सांस्कृतिक स्थल है। रेहान के मुताबिक, प्रदर्शनी का प्रस्ताव जून 2025 में मंजूर हुआ था और तस्वीरों की रूपरेखा भी पहले साझा की गई थी। उनका कहना है कि यदि तस्वीरों की विषयवस्तु पर आपत्ति थी, तो इसकी जानकारी पहले दी जा सकती थी।
प्रदर्शनी 25 अक्टूबर तक जारी रहने वाली है। रेहान ने कहा है कि वह हटाई गई तस्वीरों को किसी दूसरे स्थान पर प्रदर्शित करने की कोशिश करेंगे। फिलहाल बीकानेर हाउस प्रशासन का पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में तस्वीरें हटाने के कारणों और नियमों को लेकर उठे सवालों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।