दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर फिर 8 मौतें, डेढ़ साल में 100 से ज्यादा जानें गईं; अकेले दौसा में 57 सड़क हादसे

Saurabh Mishra | Oct 17, 2026, 13:22 IST
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे
राजस्थान के कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर ट्रैवलर पुलिया से नीचे गिर गई। हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई। बीते डेढ़ साल में राजस्थान के सात जिलों से गुजरने वाले इस एक्सप्रेसवे पर कई बड़े हादसे हुए हैं। इनमें 100 से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। सबसे ज्यादा हादसे कोटा और दौसा में बताए जा रहे हैं।

राजस्थान के कोटा में शनिवार सुबह दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बड़ा हादसा हो गया। यात्रियों से भरी एक ट्रैवलर पुलिया से करीब 15 फीट नीचे गिर गई। इसमें 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 17 लोग घायल हो गए। सभी मृतक मध्य प्रदेश के रहने वाले थे। इस हादसे ने एक बार फिर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर सफर करने वालों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए।



बीते 18 महीने में राजस्थान से गुजरने वाले इस एक्सप्रेसवे पर कई बड़े हादसे हो चुके। इनमें 100 से अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का जो हिस्सा राजस्थान से गुजरता है, उसमें सबसे ज्यादा हादसे कोटा और दौसा जिले में हुए हैं।



भोपाल से खाटूश्यामजी जा रहे थे यात्री

शनिवार को जो सड़क हादसा हुआ है, वो कोटा के सिमलिया थाना इलाके में हुआ है। एसएचओ नंद सिंह के मुताबिक, ट्रैवलर भोपाल से खाटूश्यामजी जा रही थी। कोटा शहर से करीब 35 किलोमीटर दूर कराड़िया टोल के पास अचानक ट्रैवलर पुलिया से नीचे गिर गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। आसपास के ग्रामीण मदद के लिए पहुंचे। कई यात्रियों के शव सीटों के बीच फंसे हुए थे। उन्हें बड़ी मुश्किल से बाहर निकाला गया। घायलों को निकालने के लिए गाड़ी की खिड़कियां तक तोड़नी पड़ीं।



पुलिस को शक है कि ड्राइवर को नींद की झपकी आने से ट्रैवलर बेकाबू होकर हादसे का शिकार हो गई। इस हादसे में गाड़ी का आगे का हिस्सा पूरी तरह टूट गया। वहीं, एक्सप्रेसवे पर सड़क का सही लेवल नहीं होने और कई जगह झटके लगने को भी हादसे की संभावित वजह माना जा रहा। हालांकि, असली कारण जांच के बाद ही साफ होगा।



कोटा में हुए हादसे में जान गंवाने वाले सभी 8 लोगों की पहचान कर ली गई है। इनमें अरुणा, वैष्णवी, त्रिशा, कृष्णा, अनिता, ओम सूर्यवंशी और राजू शामिल हैं। ट्रैवलर के ड्राइवर की भी मौत हो गई है।



कोटा ग्रामीण एसपी सुजीत शंकर ने बताया कि ट्रैवलर में सवार ज्यादातर लोग मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के रहने वाले थे। इनमें कई लोग एक ही परिवार या आपस में रिश्तेदार थे। सभी राजस्थान में चार से पांच दिन की धार्मिक यात्रा पर निकले थे। उन्होंने शुक्रवार शाम को भोपाल से सफर शुरू किया था।



जुलाई में दौसा में बस और ट्रेलर की टक्कर, 8 की मौत

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर यह पहला बड़ा हादसा नहीं है। इस साल ही कई ऐसे हादसे हो चुके हैं। जुलाई 2026 में ही दौसा जिले के कोलवा इलाके में बस और ट्रेलर की टक्कर हो गई थी। टक्कर के बाद आग लग गई थी। इस हादसे में 8 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। कई लोग घायल हुए थे। इस हादसे के बाद एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठे थे। खासकर तेज रफ्तार वाहनों, रास्ता बताने वाले साइन बोर्ड और सड़क पर खड़े वाहनों से होने वाले खतरे की बात उठी थी।



अलवर में भाई-बहन समेत तीन की जान गई

जुलाई 2026 में ही अलवर जिले में भी दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बड़ा हादसा हुआ था। इसमें भाई-बहन समेत तीन लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद भी एक्सप्रेसवे पर लगातार हो रहे हादसों को लेकर चिंता जताई गई थी। इससे पहले मार्च 2026 में अलवर के रैणी इलाके में शकुन ग्रुप के एमडी की कार पलट गई थी। हादसे में उनकी मौत हो गई थी। कुछ ही महीनों में अलवर में हुए इन हादसों ने एक्सप्रेसवे पर सुरक्षित सफर को लेकर सवाल बढ़ा दिए थे।



कोटा में पुलिया से 30 फीट नीचे गिरी थी कार

मार्च 2026 में कोटा के कैथून इलाके में भी बड़ा हादसा हुआ था। यहां एक कार पुलिया से करीब 30 फीट नीचे गिर गई थी। कार में सवार तीन दोस्तों की मौत हो गई थी। अब अक्टूबर में कोटा में फिर ऐसा ही हादसा हुआ है। इस बार ट्रैवलर पुलिया से 15 फीट नीचे गिरी और 8 लोगों की जान चली गई। ऐसे में सवाल है कि पुलिया के आसपास वाहनों को नीचे गिरने से रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम हैं या नहीं।



राजस्थान के 7 जिलों से गुजरता है एक्सप्रेसवे

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (delhi mumbai expressway) राजस्थान के मोटे तौर पर सात जिलों से होकर गुजरता है। इनमें अलवर, भरतपुर, दौसा, सवाई माधोपुर, टोंक, बूंदी और कोटा शामिल हैं। बीते 18 महीने में इन सात जिलों में एक्सप्रेसवे पर हुए अलग-अलग हादसों में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। इनमें सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं दौसा और कोटा जिले में हुईं हैं।



कोटा-दौसा में कहां-कहां हुए बड़े हादसे?

पिछले कुछ महीनों में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर दौसा के कोलवा, अलवर के रैणी और कोटा के कैथून व कराड़िया टोल के पास कई बड़े हादसे हुए हैं। ऐसे में सवाल है कि इन जगहों पर बार-बार हादसे क्यों हो रहे हैं और इन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। हालांकि, पुलिस और NHAI के रिकॉर्ड से अभी यह साफ नहीं है कि इन जगहों को हादसों के लिहाज से खतरनाक माना गया है या नहीं।



दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर दौसा जिले में ही अकेले 18 महीनों के दौरान 57 सड़क हादसे हुए हैं, जिनमें 60 से अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच 33 हादसों में 35 लोगों की मौत हुई थी। वहीं, जनवरी से जून 2026 तक अलग-अलग 24 हादसों में 26 लोगों की मौत हुई।



यानी दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर दौसा जिले में हर महीने औसतन तीन से ज्यादा लोगों की जान गई। लगातार हो रहे हादसों पर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भी इसी साल जुलाई में चिंता जताई थी। वे खुद एक्सप्रेसवे पर पहुंचे थे और यह जानने की कोशिश की थी कि आखिर यहां इतने हादसे क्यों हो रहे हैं।



आखिर एक्सप्रेसवे पर बार-बार हादसे क्यों हो रहे हैं?

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर गाड़ियां काफी तेज रफ्तार से चलती हैं। ऐसे में चालक की छोटी सी गलती भी बड़े हादसे की वजह बन सकती। अचानक लेन बदलना, नींद की झपकी आना, आगे चल रहे वाहन से सही दूरी नहीं रखना और गलत जगह गाड़ी खड़ी करना हादसे का खतरा बढ़ाते हैं।



इसके अलावा सड़क पर लगे दिशा बताने वाले बोर्ड, मोड़ और पुलिया के आसपास सुरक्षा इंतजाम भी जरूरी हैं। खासकर रात के समय चालक को रास्ता साफ दिखाई देना चाहिए। हालांकि, हर हादसे की असली वजह पुलिस और तकनीकी जांच के बाद ही पता चल सकती।



1386 किलोमीटर लंबा है दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की कुल प्रस्तावित लंबाई करीब 1386 किलोमीटर है। यह आठ लेन का एक्सप्रेसवे है। इसे भविष्य में 12 लेन तक बढ़ाया जा सकता। इस पर तय नियमों के तहत गाड़ियां अधिकतम 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती। इसका पहला 246 किलोमीटर लंबा दिल्ली-दौसा-लालसोट हिस्सा 12 फरवरी 2023 को शुरू हुआ था। एक्सप्रेसवे दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र को जोड़ता है। इसके अलग-अलग हिस्सों को चरणों में शुरू किया गया है।



हादसों के बाद सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए?

अब सवाल यह है कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर इतने हादसे होने के बाद सुरक्षा के लिए क्या किया गया? जिन जगहों पर पहले बड़े हादसे हुए, वहां क्या बदलाव किए गए? पुलिया के आसपास लगे बैरियर कितने मजबूत हैं? रात में रास्ता बताने वाले बोर्ड साफ दिखाई देते हैं या नहीं?



सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि लगातार हो रहे हादसों की वजह पता लगाने के लिए क्या कोई जांच हुई है? अगर जांच हुई तो उसमें क्या कमियां मिलीं और उन्हें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए? कोटा में 8 लोगों की मौत के बाद इन सवालों के जवाब मिलना जरूरी है।

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