मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर रिटायर्ड टीचर से 80 लाख की ठगी, दो साल बाद आरोपी फलोदी से गिरफ्तार
अजमेर निवासी रिटायर्ड महिला टीचर को डिजिटल अरेस्ट कर 80 लाख रुपए की साइबर ठगी के मामले में सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की टीम ने दो साल बाद एक आरोपी को फलोदी से गिरफ्तार किया है।
मामले की जांच के दौरान कॉल डिटेल्स, वाट्सएप चैट, बैंक खातों के स्टेटमेंट, केवाईसी दस्तावेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। इससे आरोपी की भूमिका सामने आई।
साइबर ठगी आरोपी की क्या थी भूमिका?
जांच में सामने आया कि आरोपी ने ठगी की रकम ट्रांसफर करवाने के लिए अपना बैंक खाता मुहैया करवाया था। उसके खाते में करीब 2.10 लाख रुपए की रकम ट्रांसफर हुई। इस मामले में पुलिस ने उसे फलोदी से गिरफ्तार किया है।
एडीजी (साइबर क्राइम) वीके सिंह (VK Singh) ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अजमेर की रिटायर्ड महिला टीचर को डिजिटल अरेस्ट कर 80 लाख रुपए की साइबर ठगी करने के मामले में फलोदी निवासी बजरंग को गिरफ्तार किया है।
साइबर ठगी आरोपी ने खाता दिया, कमीशन लिया
आरोपी बजरंग ने अपने परिचित संदीप को अपना बैंक का खाता, एटीएम कार्ड और मोबाइल सिम मुहैया करवाया। बदले में उसने कमीशन के तौर पर पांच हजार रुपए लिए।
महिला टीचर से हुई 80 लाख रुपए की ठगी की रकम में से 2,10,474 रुपए 26 नवंबर 2024 को उसके अकाउंट में जमा करवाई गई। इस रकम को उसने उसी दिन एटीएम और यूपीआई के जरिए निकाल लिया। पुलिस की जांच में साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने में आरोपी की भूमिका सामने आने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।
कैसे हुई ठगी?
अजमेर निवासी रिटायर्ड महिला टीचर ने 14 नवंबर 2024 को एक मुकदमा दर्ज करवाया था। इसमें उन्होंने बताया कि उनके पास एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने अपने आप को पुलिस की साइबर विंग का अधिकारी बताया।
उसने कहा कि परिवादी के आधार कार्ड से 25 खातों में रुपए जमा करवाए गए हैं। इनका संबंध मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। कॉल करने वाले ने डराकर उनसे बैंक खातों और उनमें जमा रकम की जानकारी ली। लगातार वीडियो कॉल के जरिए निगरानी रखी गई। इसके बाद क्राइम ब्रांच में गिरफ्तारी का डर दिखाया गया।
म्यूल खातों का इस्तेमाल
सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के एसएचओ आरपीएस गजेंद्र शर्मा ने जानकारी दी। उनके मुताबिक आरोपियों के कहने पर पीड़िता ने 80 लाख रुपए की रकम उनके बताए बैंक खातों में जमा करवाई। इसके बाद उनसे और रकम की डिमांड की गई।
आरोपियों ने 80 लाख रुपए आरटीजीएस (RTGS – Real Time Gross Settlement) के जरिए म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर करवाए। इसके बाद ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों और हवाला चैनल के जरिए आगे ट्रांसफर कर गिरोह के लोगों तक पहुंचाया गया।
आगे की जांच जारी
अब पुलिस इस मामले में सीडीआर (CDR – Call Detail Record) और बैंक ट्रांजेक्शन के मनी ट्रेल की जांच में जुटी है। ठगी की रकम किन बैंक खातों में ट्रांसफर हुई और इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं, इसे लेकर तहकीकात जारी है।
पुलिस का मानना है कि यह एक बड़े गिरोह का मामला है। इसमें और भी लोग शामिल हो सकते हैं। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
लगातार बढ़ रहे हैं डिजिटल अरेस्ट के मामले
डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) के नाम पर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। आम लोग इन ठगों के जाल में फंस जाते हैं। इस मामले में रिटायर्ड टीचर को डराया-धमकाया गया और 80 लाख रुपए ठग लिए गए।
इससे साफ है कि लोगों को साइबर ठगी के प्रति सतर्क रहना चाहिए। किसी भी अनजान कॉल पर अपनी बैंक जानकारी नहीं देनी चाहिए। पुलिस या किसी भी एजेंसी के नाम पर डराने वाले कॉल से बचना चाहिए। ऐसे मामलों में तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करनी चाहिए।