90-ए को लेकर नगरीय विकास विभाग का महा-स्पष्टीकरण, JDA और नगर निगम के अधिकार क्षेत्र का विवाद खत्म
शासन उप सचिव-प्रथम रवि विजय और स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक घनश्याम पारीक द्वारा जारी इस स्पष्टीकरण के अनुसार, विकास प्राधिकरण/न्यास से नगर निगम/परिषद/पालिका को हस्तांतरित कॉलोनियों एवं निगम/परिषद/पालिका सीमा में स्थित आबादी भूमि को छोड़कर शेष भूमियों पर धारा 90-ए के तहत कृषि से गैर कृषि प्रयोजनार्थ भूमि रूपांतरण और ले-आउट प्लान अनुमोदन का कार्य प्राधिकरण/न्यास द्वारा ही किया जाएगा।
आदेश में विशेष रूप से स्पष्ट किया गया है कि जयपुर विकास प्राधिकरण (Jaipur Development Authority) के क्षेत्राधिकार में स्थित जयपुर नगर निगम साउथ तथा नगर परिषद सीकर की सीमा तक यही व्यवस्था लागू रहेगी।
UDH ने मास्टर प्लान को लेकर स्थितियां स्पष्ट कीं
यदि नगरीय क्षेत्र का मास्टर प्लान (Master Plan) अधिसूचित है, तो ऐसी स्थिति में प्राधिकरण/न्यास के क्षेत्राधिकार के विस्तार के बाद उसमें शामिल अन्य नगर परिषद/पालिका क्षेत्र में भी नगरीयकरण योग्य क्षेत्र में प्राप्त धारा 90-ए और ले-आउट के प्रकरणों का निस्तारण नगर परिषद/पालिका के सक्षम अधिकारी द्वारा किया जाएगा, जबकि नगरीयकरण योग्य क्षेत्र से बाहर स्थित शेष नगरीय क्षेत्र की कार्रवाई प्राधिकरण/न्यास करेगा।
यदि मास्टर प्लान अधिसूचित नहीं है, तो नगर परिषद/पालिका सीमा तक धारा 90-ए के प्रकरणों का निस्तारण परिषद/पालिका के सक्षम अधिकारी द्वारा किया जाएगा।
इसके अलावा प्राधिकरण/न्यास के क्षेत्राधिकार में शामिल किए गए शेष नवीन राजस्व ग्रामों में धारा 90-ए और ले-आउट प्लान अनुमोदन की कार्रवाई विकास प्राधिकरण/नगर विकास न्यास द्वारा ही की जाएगी।
आदेश में यह भी कहा गया है कि जिन शहरों में केवल नगर परिषद/पालिका कार्यरत है और मास्टर प्लान अधिसूचित है, वहां अधिसूचित नगरीय सीमा तक 90-ए का निस्तारण परिषद/पालिका ही करेगी। जहां मास्टर प्लान अधिसूचित नहीं है, वहां फिलहाल परिषद/पालिका सीमा तक वही निस्तारण करेगी, लेकिन भविष्य में नगरीय क्षेत्र अधिसूचित होने पर उपरोक्त व्यवस्था लागू हो जाएगी।
इस आदेश के बाद 18.08.2022 और 12.06.2025 के आदेशों में व्याप्त भ्रम खत्म हो गया है और प्रदेशभर में हजारों लंबित 90-ए प्रकरणों के निस्तारण का रास्ता साफ हो गया है।
तालिका से समझें मास्टर प्लान अधिसूचित होने और न होने की स्थितियां
UDH ने मास्टर प्लान के आधार पर दो अलग-अलग व्यवस्थाएं लागू की हैं:
| परिस्थिति | नगर निगम / परिषद / पालिका का अधिकार | विकास प्राधिकरण / न्यास का अधिकार |
| मास्टर प्लान अधिसूचित है | नए शामिल क्षेत्रों में 'नगरीयकरण योग्य क्षेत्र' (Urbanisable Area) के भीतर आने वाले 90-ए और ले-आउट प्रकरणों का निस्तारण। | नगरीयकरण योग्य क्षेत्र से बाहर स्थित शेष नगरीय क्षेत्र के सभी 90-ए प्रकरणों का निस्तारण। |
| मास्टर प्लान अधिसूचित नहीं है | अपनी निकाय सीमा (Municipal Limits) तक 90-ए और ले-आउट प्लान के प्रकरणों का निस्तारण सक्षम अधिकारी द्वारा। | निकाय सीमा से बाहर आने वाले सभी नवीन राजस्व ग्रामों व क्षेत्रों के प्रकरणों का निस्तारण। |
| केवल नगर निकाय कार्यरत हैं | जिन शहरों में केवल नगर परिषद/पालिका है और मास्टर प्लान अधिसूचित है, वहां अधिसूचित नगरीय सीमा तक निकाय ही निस्तारण करेगा। | — |
FAQs
- क्या नगरीय विकास विभाग (UDH) ने 90-ए के विवाद को सुलझाने के लिए कोई आदेश जारी किया है?
हां, UDH ने एक आदेश जारी किया है जिसमें 90-ए और ले-आउट प्लान के प्रकरणों के निस्तारण की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है। - नगरीय क्षेत्रों के मास्टर प्लान के अधिसूचित होने पर 90-ए के प्रकरणों का निस्तारण कौन करेगा?
यदि नगरीय क्षेत्र का मास्टर प्लान अधिसूचित है, तो प्राधिकरण/न्यास से शामिल अन्य नगर परिषद/पालिका के सक्षम अधिकारी 90-ए के प्रकरणों का निस्तारण करेंगे। - यदि मास्टर प्लान अधिसूचित नहीं है, तो 90-ए के मामलों का निस्तारण कौन करेगा?
यदि मास्टर प्लान अधिसूचित नहीं है, तो नगर परिषद/पालिका के सक्षम अधिकारी परिषद/पालिका सीमा तक 90-ए के प्रकरणों का निस्तारण करेंगे।