आरसीडीएफ में कार्मिक एवं प्रशासन शाखा का प्रभार क्यों वापस लिया गया 8 दिन के बाद?
राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन यानी आरसीडीएफ में कार्मिक एवं प्रशासन शाखा के प्रभार को लेकर हुआ विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। 16 सितंबर को केसी मीणा से यह जिम्मेदारी हटाकर वित्तीय सलाहकार शिल्पी कौशिक को अतिरिक्त प्रभार देने का आदेश जारी हुआ था। 22 सितंबर को शिल्पी कौशिक ने इसका कार्यभार भी संभाल लिया। लेकिन इसके कुछ ही दिन बाद *वही आदेश वापस ले लिया गया।*
यानी आरसीडीएफ में एक ऐसा प्रशासनिक फेरबदल हुआ, जो पहले आदेश तक पहुंचा, फिर उसकी पालना भी हुई और करीब आठ दिन के भीतर उसे ही पलट दिया गया।
पहले चार्ज बदला, फिर आदेश ही वापस
16 सितंबर को महाप्रबंधक (मार्केटिंग) संतोष शर्मा के स्तर से कार्मिक एवं प्रशासन शाखा के प्रभार में बदलाव किया गया था। केसी मीणा के पास मौजूद जिम्मेदारी हटाकर वित्तीय सलाहकार शिल्पी कौशिक को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।
इसके बाद 22 सितंबर को शिल्पी कौशिक ने महाप्रबंधक (कार्मिक एवं प्रशासन) का अतिरिक्त कार्यभार ग्रहण कर लिया। इससे साफ था कि शुरुआती आदेश सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसकी पालना भी हुई।
लेकिन अब 25 सितंबर को जारी नए कार्यालय आदेश के जरिए 16 सितंबर के आदेश को प्रत्याहारित कर दिया गया।
जिस आदेश पर सवाल उठे, उसी पर लगा ब्रेक
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम सवाल यही है कि आखिर जिस प्रशासनिक व्यवस्था को कुछ दिन पहले बदला गया था, उसे इतनी जल्दी वापस क्यों करना पड़ा?
कार्मिक एवं प्रशासन शाखा फेडरेशन की महत्वपूर्ण शाखाओं में शामिल है। कर्मचारियों से जुड़े प्रशासनिक काम, सेवा संबंधी मामले और आंतरिक प्रबंधन से जुड़े कई काम इसी शाखा से जुड़े रहते हैं। ऐसे में प्रभार बदलने के अधिकार और उसके पीछे की मंजूरी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक था।
अब आदेश वापस होने के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है कि 16 सितंबर को चार्ज बदलने का फैसला किस प्रशासनिक व्यवस्था के तहत लिया गया था और बाद में उसे वापस लेने की जरूरत क्यों पड़ी।
एमडी की कुर्सी पहले से खाली
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में आरसीडीएफ में एमडी का पद खाली होना भी अहम है। तत्कालीन एमडी श्रुति भारद्वाज 31 अगस्त 2026 को सेवानिवृत्त हुई थीं। इसके बाद से फेडरेशन में पूर्णकालिक एमडी की नियुक्ति नहीं हुई।
इसी दौरान कार्मिक एवं प्रशासन जैसी अहम शाखा का प्रभार बदला गया। अब उस आदेश के प्रत्याहार ने आरसीडीएफ की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब पुराना प्रभार रहेगा या नया आदेश आएगा?
16 सितंबर के आदेश के वापस होने के बाद अगला सवाल यह है कि कार्मिक एवं प्रशासन शाखा की जिम्मेदारी अब किस अधिकारी के पास रहेगी और क्या सरकार या आरसीडीएफ की ओर से इस संबंध में नया स्पष्ट आदेश जारी किया जाएगा।
क्योंकि मामला सिर्फ एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी को चार्ज देने का नहीं है। मामला उस पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया का है, जिसमें पहले जिम्मेदारी बदली गई, नए अधिकारी ने कार्यभार संभाला और फिर कुछ ही दिनों में आदेश वापस लेना पड़ा।
आठ दिन का पूरा घटनाक्रम
16 सितंबर: कार्मिक एवं प्रशासन शाखा के प्रभार में बदलाव का आदेश।
22 सितंबर: शिल्पी कौशिक ने अतिरिक्त कार्यभार संभाला।
25 सितंबर: 16 सितंबर का आदेश प्रत्याहारित कर दिया गया।
अब: कार्मिक शाखा के प्रभार को लेकर अगला आदेश अहम होगा।
आरसीडीएफ में अब निगाहें इस बात पर हैं कि आठ दिन में बदली प्रशासनिक व्यवस्था को पलटने के बाद आगे की व्यवस्था क्या रहती है।