अजमेर ब्लैकमेल कांड, 14 पीडिताएं मुआवजा लेने की इच्छुक नहीं

Mukesh Sharma | Feb 12, 2026, 21:23 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के चर्चित अजमेर ब्लैकमेलिंग कांड में अब तक दो पीड़िताओं को मुआवजा दिया जा सका है। अजमेर की कोर्ट ने 17 पीड़िताओं को 7—7 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया था।

News in Short

  • 17 पीडिताओं को 7-7 लाख रुपए मुआवजा देने के हैं आदेश
  • 17 में से एक पीड़िता की हो चुकी है मृत्यु
  • अगस्त-2024 में पॉक्सो कोर्ट अजमेर ने दिए थे मुआवजा के आदेश
  • अब तक सिर्फ दो पीड़िताओं ने लिया है 14 लाख रुपए मुआवजा
  • सरकार ने विधानसभा में दिए जवाब में दी है जानकारी

News in Detail

राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को पूछ गए एक सवाल ने 34 साल पुराने चर्चित अजमेर अश्लील ब्लैकमेल कांड की याद दिला दी। कोटा दक्षिण से भाजपा विधायक संदीप शर्मा ने सवाल पूछा था कि क्या ब्लैकमेल कांड की पीड़िताओं को मुआवजा देने के आदेश हुए थे या नहीं। यदि हां तो अब तक कितनी पीड़िताओं को यह मुआवजा दिया है।



कोर्ट ने दिए थे आदेश

जवाब में बताया गा है कि अजमेर की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने 20 अगस्त, 2024 को फैसले में 17 पीड़िताओं को 7-7 लाख रुपए मुआवजा देने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को 30 दिन में पीड़िताओं को मुआवजा देने केा कहा था।



अब तक ​दो को ही मिला मुआवजा

जवाब में कहा गया है कि 17 में से एक पीड़िता की मृत्यु हो चुकी है। अब तक दो पीड़िताओं को 14 लाख रुपए मुआवजा दिया जा चुका है। बाकी 14 पीड़िताओं को मुआवजा देने के लिए संपर्क करने का निरंतर प्रयास किया है। लेकिन, उन्होंने मुआवजा लेने में कोई रुचि नहीं दिखाई है। सरकार की ओर से कोर्ट आदेश की पालना में तीन साल तक पीड़िताओं को मुआवजा राशि देने के प्रयास किए जाएंगे।



क्या है अजमेर ब्लैकमेल कांड

वर्ष 1992 का अजमेर अश्लील ब्लैकमेल कांड का खुलासा हुआ था। इस मामले में कई युवतियों को अश्लील फोटो दिखाकर उनको ब्लैकमेल किया गया था। इसमें वीडियो रिकॉर्डिंग और तस्वीरों का इस्तेमाल उन्हें चुप कराने के लिए किया गया था। इस मामले ने राजनीतिक संरक्षण, धार्मिक प्रभाव, दंड से मुक्ति और छोटे शहर के चकाचौंध के खतरनाक मिश्रण को उजागर किया था। रिकॉर्ड के अनुसार अजमेर शरीफ दरगाह से जुड़े प्रभावशाली चिश्ती गिरोह के सदस्य फारूक और नफीस समेत आरोपियों और उनके साथियों ने स्कूली छात्राओं का शोषण किया। एक स्थानीय फोटो लैब ने पीड़ितों की नग्न तस्वीरें छापकर उन्हें प्रसारित किया।



हो गया था धार्मिक तनाव

मामला सामने आने पर अजमेर में धार्मिक तनाव भड़क गया था और पूरा शहर बंद रहा था। जनता के भारी दबाव के बावजूद पीड़ितों की पहचान और उनके ठिकाने का पता नहीं चल पाया। कई पीड़ित लडकियां सरकारी कर्मचारियों के साधारण व मध्यमवर्गीय परिवारों से थीं। लेकिन मीडिया ने उन्हें भ्रामक रूप से आईएएस-आईपीएस की बेटियां बता दिया। इस घटना के बाद कई परिवार बदनामी और सदमे से बचने के लिए अजमेर छोड़कर चले गए थे।



कई पीड़िताएं तो सामने ही नहीं आईं

मामले के खुलासे के बाद अनेक पीड़िताओं के परिवार अजमेर छोड़कर चले गए थे। पुलिस को पीड़िताओं को कोर्ट तक लाने में भारी मेहनत करनी पड़ी। कानून के अनुसार पीड़िता का आरोपियों की उपस्थिति में गवाही देना जरुरी होता है। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद पुलिस मात्र 17 पीड़िताओं को ही कोर्ट तक लाने में कामयाब रही। मामले में 15 आरेापियों को सजा हुई है। इनमें से चार केा हाई कोर्ट ने बरी कर दिया था। एक आरोपी अब भी फरार चल रहा है।



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