1992 ब्लैकमेल कांड के आरोपी से वीडियो कॉल कराई, जेलर सद्दाम हुसैन सस्पेंड
समझें क्या है पूरा मामला
- अजमेर ब्लैकमेल कांड के आरोपी को VIP सुविधाएं।
- कारागार महानिदेशक (DG Jail) का बड़ा एक्शन।
- अजमेर सेंट्रल जेल के जेलर सद्दाम हुसैन निलंबित।
- कैदियों को वीडियो कॉल कराने का गंभीर आरोप।
- वायरल वीडियो और जांच के बाद लिया गया एक्शन।
अजमेर सेंट्रल जेल में एक बड़ा सुरक्षा घपला सामने आया है। जेलर सद्दाम हुसैन पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी मोबाइल फोन का दुरुपयोग किया। उन्होंने तीन सजायाफ्ता कैदियों की 1992 ब्लैकमेलिंग कांड के मास्टरमाइंड नफीस चिश्ती से वीडियो कॉल कराई।
यह वीडियो कॉल जेलर के चैंबर में हुई, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं। मामला सामने आने के बाद डीजी जेल ने जेलर को निलंबित कर दिया और उनका मुख्यालय श्रीगंगानगर शिफ्ट कर दिया।
क्या है 1992 ब्लैकमेल कांड?
1992 में अजमेर में एक बहुचर्चित ब्लैकमेलिंग कांड हुआ था। इस मामले में 100 से अधिक छात्राओं और महिलाओं का यौन शोषण और ब्लैकमेल किया गया था। इस मामले के मास्टरमाइंड नफीस चिश्ती को सजा हुई है।
जेलर पर क्या आरोप है?
जेलर सद्दाम हुसैन पर आरोप है कि उन्होंने अपने चैंबर में बैठकर सरकारी फोन से वीडियो कॉल कराई। इस कॉल में उन्होंने तीन कैदियों को ब्लैकमेल कांड के मास्टरमाइंड से जोड़ा।
जेलर का यह काम नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सरकारी फोन का इस तरह के कार्यों में उपयोग नहीं किया जा सकता।
अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की?
महानिदेशक (कार्यालय कारागार) अशोक राठौड़ ने इस मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने जेलर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही, जेलर का मुख्यालय अजमेर से श्रीगंगानगर शिफ्ट कर दिया गया।
अब इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय विभागीय जांच शुरू होगी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि क्या इस मिलीभगत में जेल के अन्य कर्मचारी या वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे।
अजमेर जेल की सुरक्षा पर क्यों उठ रहे सवाल?
अजमेर सेंट्रल जेल में सुरक्षा चूक की यह पहली घटना नहीं है। कुछ समय पहले इसी जेल के अंदर एक कैदी ने दूसरे कैदी की निर्मम हत्या कर दी थी। उस घटना के बाद भी जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे।
अब यह मामला सामने आने से यह साफ हो गया है कि जेल के कड़े नियमों की अनदेखी कर अपराधियों को VIP सुविधाएं दी जा रही थीं।
राजनीतिक बवाल भी हुआ
इस मामले में विपक्षी कांग्रेस ने भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जेलों में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की स्वतंत्र जांच हो और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।
अब क्या होगा?
जेलर के निलंबन के बाद अब विभागीय जांच के नतीजों का इंतजार है। अगर जांच में जेलर का अपराध साबित होता है तो उनके खिलाफ और कड़ी कार्रवाई हो सकती है। यह भी स्पष्ट होगा कि क्या इस साजिश में और भी लोग शामिल थे। फिलहाल अजमेर जेल प्रशासन ने सुरक्षा कड़ी कर दी है।
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