अजमेर में VIP ट्रेड कंपनी पर शिकंजा, करोड़ों की धोखाधड़ी के मामले में 4 आरोपी गिरफ्तार
कम समय में 8 से 12 प्रतिशत मुनाफा कमाने का लालच देकर निवेशकों से करोड़ों रुपए जुटाने के मामले में अजमेर पुलिस की एसआईटी ने वीआईपी ट्रेड कंपनी के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि कंपनी ने किशनगढ़ में फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर निवेशकों को अपने जाल में फंसाया और रकम जमा होने के बाद आरोपी फरार हो गए। मामले की जांच एडिशनल एसपी प्रियंका कुमावत के नेतृत्व में गठित एसआईटी कर रही है। पुलिस के अनुसार, कंपनी के खिलाफ अजमेर जिले के गांधी नगर और मदनगंज थानों में कुल 40 मामले दर्ज हैं।
अजमेर जिले में कंपनी के खिलाफ 40 मामले दर्ज
एडिशनल एसपी प्रियंका कुमावत के मुताबिक, वीआईपी ट्रेड कंपनी के खिलाफ गांधी नगर और मदनगंज थानों में कुल 40 मामले दर्ज हैं। इन सभी मामलों में पुलिस जांच कर रही है। कंपनी के खिलाफ दूसरे राज्यों में भी प्रकरण दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। निवेशकों की शिकायतों के आधार पर अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस अब निवेश की रकम, कंपनी के नेटवर्क और कथित धोखाधड़ी से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
8 से 12 प्रतिशत मुनाफे का दिया लालच
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने किशनगढ़ में वीआईपी ट्रेड कंपनी के नाम से फॉरेक्स ट्रेडिंग का काम शुरू किया था। निवेशकों को कम समय में अच्छा मुनाफा मिलने का भरोसा दिलाया जाता था। इसके लिए कंपनी से जुड़े लोग निवेशकों के साथ उनके परिचितों और रिश्तेदारों को भी निवेश करने के लिए प्रेरित करते थे। अलग-अलग स्थानों पर सेमिनार आयोजित कर कंपनी की योजनाओं और संभावित मुनाफे के बारे में बताया जाता था। इस तरह लोगों से करोड़ों रुपए निवेश करवाए गए।
कंपनी के दोनों डायरेक्टर जेल से गिरफ्तार
एसआईटी ने गांधी नगर थाने में दर्ज प्रकरण संख्या 118/2025 में कंपनी के डायरेक्टर लोकेश चौधरी और धीरज गट्टानी को सेंट्रल जेल से प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया। इसके अलावा फरार आरोपी और मुख्य टीम लीडर हनुमान छंणग तथा अब्दुल समद को किशनगढ़ से पकड़ा गया। पुलिस के मुताबिक, लोकेश चौधरी, धीरज गट्टानी और अब्दुल समद को पूछताछ और अनुसंधान के बाद न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है, जबकि हनुमान छंणग से पूछताछ जारी है।
ड्रीम कोटा यार्डा कॉलोनी के नाम पर भी निवेश
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कम कीमत पर जमीन खरीदकर ड्रीम कोटा यार्डा के नाम से कॉलोनी भी विकसित की थी। पुलिस के अनुसार, इस कॉलोनी के नाम पर भी लोगों को बड़े निवेश के लिए आकर्षित किया गया। निवेशकों को ट्रेडिंग के साथ जमीन और कॉलोनी से जुड़े निवेश के विकल्प दिखाए गए। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि जमीन से जुड़े कारोबार के जरिए कितनी रकम जुटाई गई और निवेशकों को क्या आश्वासन दिए गए थे।
सॉफ्टवेयर और USDT के जरिए दिखाते थे ट्रेडिंग
पुलिस के मुताबिक, ट्रेडिंग की प्रक्रिया आसान दिखाने के लिए आरोपियों ने वीआरएफएक्स सॉफ्टवेयर विकसित करवाया था। इसमें यूएसडीटी के जरिए ट्रेडिंग दिखाई जाती थी। निवेशकों की जमा रकम को आकर्षक तरीके से प्रदर्शित करने के लिए बाइनेंस वॉलेट ऐप पर रकम को यूएसडीटी में दिखाया जाता था। आरोप है कि कंपनी ने निवेश के नाम पर करोड़ों रुपए जुटाए और बाद में आरोपी रकम लेकर फरार हो गए। पुलिस अब इस पूरी प्रक्रिया और पैसों के लेनदेन की जांच कर रही है।
एसआईटी की जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने एसआईटी का गठन किया था, जिसकी जिम्मेदारी एडिशनल एसपी प्रियंका कुमावत को सौंपी गई। टीम कंपनी के नेटवर्क, निवेशकों की शिकायतों और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित धोखाधड़ी में कितने लोग प्रभावित हुए और निवेश की रकम कहां गई। जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना है।
आगे क्या?
पुलिस की जांच अब निवेशकों से जुटाई गई रकम, कंपनी के नेटवर्क और दूसरे राज्यों में दर्ज मामलों की कड़ियों पर केंद्रित रहेगी। जांच के आधार पर अन्य संदिग्धों की भूमिका और पैसों के लेनदेन से जुड़े तथ्य सामने आ सकते हैं। निवेशकों से अपील है कि वे अपने पास मौजूद रसीदें, बैंक लेनदेन और निवेश संबंधी दस्तावेज सुरक्षित रखें तथा संबंधित पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं।