सरिस्का क्षेत्र में उमड़े हजारों किसान, महापंचायत हुई
समझें क्या है पूरा मामला
- अलवर में सरिस्का क्षेत्र के किसानों की बड़ी महापंचायत हुई।
- 186 गांवों के किसानों ने आंदोलन की रणनीति तैयार की।
- किसानों ने 150 मुकदमे वापस लेने की मांग उठाई।
- रेंजर हटाने और सड़क निर्माण की मांग रखी गई।
- मांगें नहीं मानी तो चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी।
राजस्थान में अलवर के भर्तृहरि तिराहा स्थित प्रेमनाथ आश्रम में किसानों की बड़ी महापंचायत हुई। सरिस्का क्षेत्र और आसपास के 186 गांवों के किसान इसमें शामिल हुए। किसानों ने आंदोलन के दौरान दर्ज 150 मुकदमे वापस लेने की मांग रखी। वन विभाग के रेंजर को हटाने और सड़क निर्माण की मांग भी उठाई गई। मांगें न मानने पर किसानों ने चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी।
अलवर जिले के सरिस्का क्षेत्र में गुरुवार को किसानों की बड़ी महापंचायत हुई। यह आयोजन भर्तृहरि तिराहा स्थित प्रेमनाथ आश्रम में हुआ। इसे भारतीय किसान यूनियन यानी बीकेयू (BKU – Bharatiya Kisan Union) टिकैत अराजनैतिक के बैनर तले आयोजित किया गया।
महापंचायत में सरिस्का क्षेत्र और आसपास के 186 गांवों के किसान बड़ी संख्या में पहुंचे। बैठक में क्षेत्र की कई पुरानी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई। आने वाले समय के लिए आंदोलन की रणनीति भी तैयार की गई।
किसान नेता ने कहा, यह सबकी लड़ाई
किसान नेता राकेश दायमा ने महापंचायत में कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पूरे सरिस्का क्षेत्र के किसानों, ग्रामीणों और आने वाली पीढ़ियों के अधिकार, सम्मान और सुरक्षा से जुड़ी है।
उन्होंने बताया कि लंबे समय से क्षेत्र के लोग कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उनका कहना था कि अब तक इन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।
मुकदमे वापस लेने की उठी मांग
महापंचायत में सबसे प्रमुख मांग निर्दोष किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की रही। किसानों का कहना है कि आंदोलन के दौरान करीब 150 किसानों पर राजकार्य में बाधा जैसे मामले दर्ज किए गए थे।
किसानों ने मांग की कि इन सभी मुकदमों को तत्काल वापस लिया जाए। उनका आरोप है कि इन मामलों से किसानों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।
रेंजर हटाने और वन विभाग से विवाद
बैठक में तालवृक्ष रेंज के रेंजर को हटाने की मांग भी प्रमुखता से उठी। किसानों का कहना है कि वन विभाग के साथ लगातार विवाद की स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने मांग की कि विभागीय हस्तक्षेप को कम किया जाए। साथ ही सरिस्का क्षेत्र में पीढ़ियों से रह रहे ग्रामीणों के पारंपरिक अधिकारों का सम्मान करने की भी मांग रखी गई।
सड़क निर्माण की मांग फिर उठी
महापंचायत में क्षेत्र की सड़क सुविधाओं का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठा। किसानों ने नारायणपुर तालवृक्ष कुशलगढ़ सड़क मार्ग का निर्माण कराने की मांग दोहराई।
इसके साथ ही कुशालगढ़ तिराहे से बाबा भर्तृहरि धाम अलवर होते हुए थानागाजी तक सड़क बनाने की मांग भी रखी गई। किसानों का कहना है कि बेहतर सड़क संपर्क से ग्रामीणों के साथ धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
नहीं मानी मांगें तो होगा बड़ा आंदोलन
महापंचायत में मौजूद किसानों ने साफ कहा कि अगर उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसके लिए गांव-गांव जाकर किसानों को संगठित करने की योजना बनाई गई है।
आगे की रणनीति के तहत चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा। संगठन का कहना है कि किसानों का मकसद टकराव नहीं, बल्कि समस्याओं का समाधान कराना है। संगठन ने सरकार और प्रशासन से समय रहते मुद्दों का हल निकालने की अपील की है।
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