खेलते-खेलते कार में बंद हो गई दो मासूम बहनें, दम घुटने से हुई मौत
News In Short
- अलवर में दो बहनें खेलते-खेलते कार में फंस गईं और दम घुटने से बेहोश हो गईं।
- परिजन उन्हें तलाशने गए तो उन्हें बच्चियों को कार में फंसा पाया, डॉक्टरों ने मृत घोषित किया।
- बच्चियों के पिता सुबह दुकान पर गए थे, दोनों पास के कार रिपेयरिंग सेंटर में पहुंच गईं।
- कार में ऑक्सीजन कम होने और CO2 बढ़ने से बच्चे 10 मिनट में असहाय हो जाते हैं।
- पुलिस की शुरुआती जांच में पाया गया कि खराब कार और बंद गेट कारण बने इस हादसे के लिए।
News In Detail
राजस्थान में अलवर शहर के खुदनपुरी इलाके में दो बहनें खेलते-खेलते एक कार में फंस गईं। गेट बंद होने के कारण उनका दम घुट गया। कुछ देर बाद परिजन उन्हें तलाशने गए तो कार में बेहोशी की हालत में मिली।
बच्चियों के पिता रमेश ने बताया कि उनकी हेयर सैलून की दुकान है। सुबह लगभग 11:30 बजे टीना (8 साल) और लक्ष्मी (5 साल) पास में स्थित कार रिपेयरिंग सेंटर में पहुंच कर खेलने लगी।
हालांकि वहां मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें बार-बार वहां से हटा दिया। इसके बावजूद दोनों बहनें खेल-खेल में वहां खड़ी एक लाल खराब कार में बैठ गईं और दरवाजा बंद कर लिया। इससे वे बाहर नहीं निकल पाईं और दम घुटने के कारण बेहोश हो गईं।
डॉक्टर ने मृत घोषित
रमेश ने बताया कि दोपहर करीब 12 बजे वे घर आए और दोनों बच्चियां नहीं मिलीं। तो रमेश ने परिवार के साथ मिल कर दोनों मासूम को ढूढ़ना शरू किया तो पता चला की दोनों बच्ची खराब कस पास खेल रही थी।
जब खराब कार को देखा तो उसमें दोनों बच्ची बेहोशी हालत में मिली। परिजनों और स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
वैशाली नगर थाना अधिकारी गुरुदत्त सैनी ने बताया कि कार पूरी तरह खराब स्थिति में थी। पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला कि 5 से 8 साल की उम्र की ये बच्चियां कार में बैठने के बाद गेट खुद नहीं खोल सकीं।
एक्सपर्ट का बयान
अलवर जिला अस्पताल के डॉक्टर के.के. मीणा ने बताया कि धूप में खड़ी बंद कार का तापमान बाहरी वातावरण की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ता है।
आधे घंटे में कार का तापमान 3-4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। कार में ऑक्सीजन की कमी होती है और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर तेजी से बढ़ता है।
बच्चे इस स्थिति में सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। 10 मिनट के भीतर वे असहाय हो जाते हैं और मदद के लिए हाथ-पैर या शोर भी नहीं कर पाते।
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