अलवर जिला परिषद में एसी रिपेयरिंग के नाम पर 2.60 लाख का बिल, फिलहाल रुका भुगतान
समझें क्या है पूरा मामला
- अलवर जिला परिषद में AC रिपेयरिंग पर 2.60 लाख का भुगतान।
- पांच बिलों से सामने आया 2.59 लाख का खर्च।
- कई अधिकारियों के कमरों के AC की सर्विसिंग।
- तबादले से चार दिन पहले पेश हुए बिल।
- मामला सामने आया तो भुगतान पर रोक।
अलवर जिला परिषद में एयर कंडीशनर की रिपेयरिंग और सर्विसिंग के नाम पर करीब 2.60 लाख रुपए के भुगतान का मामला सामने आया है। तत्कालीन सीईओ सालुखे गौरव रविंद्र के कक्ष समेत कई अधिकारियों के कमरों के एसी के लिए एक फर्म के पांच बिल जुलाई में अलग-अलग तारीखों पर प्रस्तुत किए गए। खास बात यह है कि इतनी राशि में छह से ज्यादा नए एयर कंडीशनर खरीदे जा सकते थे। मामला उच्च अधिकारियों के सामने आने के बाद फिलहाल भुगतान पर रोक लगा दी गई है।
किन कमरों के एसी की हुई रिपेयरिंग
दस्तावेजों के मुताबिक जिन कमरों के एसी की रिपेयरिंग और सर्विसिंग दिखाई गई है, उनमें मीटिंग हॉल, परियोजना अधिकारी कक्ष, लेखा अधिकारी कक्ष, पीए रूम और सीईओ कक्ष शामिल हैं। यह काम लोहिया का तबा स्थित एक फर्म को दिया गया बताया जा रहा है।
पांच बिलों में कितनी-कितनी राशि
दस्तावेजों के अनुसार 3 जुलाई के बिल क्रमांक 223 में 37,200 रुपए का भुगतान प्रस्तावित था। 4 जुलाई के बिल क्रमांक 224 में 38 हजार रुपए और इसी दिन के बिल क्रमांक 225 में 63,870 रुपए का प्रस्ताव था। इसके बाद 30 जुलाई के बिल क्रमांक 237 में 60,870 रुपए और बिल क्रमांक 238 में 59,710 रुपए का भुगतान प्रस्तावित किया गया। पांचों बिलों की कुल राशि 2,59,650 रुपए बताई जा रही है।
किस मद से जारी होनी थी राशि
जानकारी के मुताबिक शाखा लिपिक ने मेवात योजना के प्रशासनिक मद से यह राशि जारी करने का प्रस्ताव रखते हुए पत्रावली तैयार की थी। यह पत्रावली भुगतान के लिए आगे बढ़ाई गई, जिसके बाद यह मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया।
2.60 लाख में आ सकते थे नए एसी
इस मामले में सबसे ज्यादा सवाल इसी बात को लेकर उठ रहे हैं कि जितनी राशि सिर्फ रिपेयरिंग और सर्विसिंग पर खर्च होने वाली थी, उतने में छह से ज्यादा नए एयर कंडीशनर खरीदे जा सकते थे। इसी वजह से पत्रावली पर अधिकारियों ने आवश्यक जानकारी मांगी।
तबादले से चार दिन पहले पेश हुए बिल
इस मामले में एक बात और ध्यान खींचती है। यह पांचों बिल तत्कालीन सीईओ के तबादले से महज चार दिन पहले भुगतान के लिए प्रस्तुत किए गए थे। यह समय को लेकर मामले में सवाल और गहरे हो गए हैं, हालांकि अभी इसकी वजह स्पष्ट नहीं है।
फिलहाल भुगतान पर लगी रोक
दस्तावेजों की जांच के बाद अधिकारियों ने भुगतान प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया है। मामला अभी जांच के दायरे में है और अंतिम तौर पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। आगे की कार्रवाई दस्तावेजों की पूरी पड़ताल के बाद ही तय होगी।
ये खबर भी पढे़:-
जोधपुर में गोशाला में 1 करोड़ का फर्जीवाड़ा, दो सगे भाइयों पर आरोप
जयपुर में पकड़ गए 36 अवैध विदेशी नागरिक, सरकार ने किया डिपोर्ट
RPSC सांख्यिकी अधिकारी परीक्षा 30 अगस्त को, OMR के लिए मिलेंगे 10 मिनट अतिरिक्त
LPG, रेलवे से बस सेवा तक, 1 सितंबर से होंगे बड़े बदलाव, जेब पर पड़ेगा असर