अमायरा सुसाइड केस मामले में CJP ने संभाला मोर्चा, कहा- न्याय दिलाकर रहेंगे
समझें क्या है पूरा मामला
- अमायरा सुसाइड केस में CJP ने उठाए सवाल।
- 10 महीने बाद भी न्याय का इंतजार।
- CJP ने सरकार और पुलिस पर साधा निशाना।
- नीरजा मोदी स्कूल मामले में फिर गरमाई बहस।
- मुख्यमंत्री से की दोषियों पर कार्रवाई की मांग।
जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में हुई 9 वर्षीय अमायरा की मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के को-कन्वीनर आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार, पुलिस और शिक्षा विभाग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। घटना को 10 महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन पीड़ित परिवार को अब तक न्याय नहीं मिला है। CBSE ने स्कूल की मान्यता रद्द की थी, जिस पर बाद में हाईकोर्ट से स्टे मिल गया। CJP ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से न्याय की मांग की है।
स्कूल में लगातार परेशान की जा रही थी बच्ची
आशुतोष रांका ने अपनी पोस्ट में बताया कि अमायरा अपने स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ डांस और म्यूजिक में भी अव्वल रहती थी। आरोप है कि स्कूल में उसकी ही कक्षा के कुछ बच्चे उसे लगातार तंग कर रहे थे।
आरोप है कि घटना वाले दिन बार-बार शिकायत करने के बावजूद कक्षा में मौजूद शिक्षिका ने उचित ध्यान नहीं दिया और दूसरी पीरियड की शिक्षिका कक्षा में मौजूद ही नहीं थीं। यह भी आरोप है कि बच्ची जब कक्षा से बाहर निकली, तो किसी शिक्षक या सुरक्षाकर्मी ने उसे रोकने की कोशिश नहीं की। इसके बाद स्कूल परिसर में हुई इस दुखद घटना में बच्ची की मौत हो गई।
साक्ष्य मिटाने का आरोप
CJP के को-कन्वीनर ने आरोप लगाया कि घटना के तुरंत बाद स्कूल प्रशासन ने मौके से जुड़े साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश की और सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को भी गायब करने का प्रयास किया गया। उनका यह भी आरोप है कि पुलिस को शुरुआती दौर में गुमराह किया गया।
यह सभी आरोप CJP की ओर से लगाए गए हैं और अभी तक अदालत में इनकी पुष्टि नहीं हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन यानी CBSE (Central Board of Secondary Education) ने अपनी जांच बिठाई थी। जांच में सुरक्षा मानकों में गंभीर खामियां मिलने पर CBSE ने स्कूल की 9वीं से 12वीं तक की मान्यता रद्द कर दी थी।
हालांकि बाद में स्कूल ने कानूनी प्रक्रिया के तहत हाईकोर्ट से CBSE के इस आदेश पर स्टे हासिल कर लिया।
शिक्षा विभाग और पुलिस चार्जशीट पर सवाल
आशुतोष रांका ने राजस्थान शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार 18 मार्च 2026 को जब हाईकोर्ट से CBSE के आदेश पर रोक मिली, उसी दिन शिक्षा विभाग ने भी एक आदेश जारी किया था, जिसमें सुरक्षा खामियों का जिक्र था।
आरोप है कि कुछ ही दिनों बाद 2 अप्रैल 2026 को सरकारी वकीलों ने अदालत में बयान देकर विभाग के इसी आदेश को वापस ले लिया या रोक दिया। इसके अलावा CJP का आरोप है कि पुलिस की ओर से दाखिल आरोप पत्र में सही और सख्त धाराएं शामिल नहीं की गईं। आरोप है कि इसी वजह से मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आरोपियों को जमानत दे दी।
पीड़ित परिवार अब सेशंस कोर्ट में निष्पक्ष धाराओं और दोबारा जांच की मांग को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।
CJP ने की न्याय की मांग
आशुतोष रांका ने अपनी पोस्ट के अंत में सह-कार्यकर्ता अभिजीत दीपके के साथ अमायरा के माता-पिता से किए गए वादे का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि सिस्टम को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह परिवार को इसी तरह इंतजार में रख सकता है।
रांका ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सीधी अपील करते हुए कहा कि अमायरा सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे देश की बच्ची है। उन्होंने कहा कि 10 महीने बाद भी जिम्मेदार लोग बिना किसी डर के घूम रहे हैं। CJP ने सरकार से पीड़ित परिवार को जल्द न्याय देने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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