पड़ोसी राज्यों में बैन है एनालॉग पनीर, राजस्थान में कब रुकेगा सेहत से खिलवाड़?

Mukesh Sharma | Aug 17, 2026, 18:48 IST
राजस्थान में एनालॉग पनीर पर बैन की मांग तेज, कई राज्यों में पाबंदी, फिर भी धड़ल्ले से बिक्री
कई राज्यों में बैन के बावजूद राजस्थान में सेहत के लिए हानिकारक एनालॉग पनीर (सिंथेटिक पनीर) धड़ल्ले से बिक रहा है। हाई कोर्ट की सख्ती के बाद भी खाद्य सुरक्षा विभाग शांत है, जिससे उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी और स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्यप्रदेश-गुजरात में बैन के बावजूद राजस्थान में धड़ल्ले से एनालॉग पनीर बिक रहा।
  • हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई है और सरकार से मिलावटखोरी पर जवाब तलब किया।
  • एनालॉग पनीर को बनाने में मिल्क सॉलिड, पाम ऑयल का इस्तेमाल होता है।
  • शादी-समारोहों और होटलों में डेयरी पनीर बताकर ग्राहकों को बेचा जा रहा।
  • बड़ी खपत और कम निगरानी से बढ़ रहा नकली पनीर का कारोबार।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र समेत 5 राज्यों में शिकायतों के बाद एनालॉग पनीर की बिक्री, उत्पादन पर रोक लगा दी गई है। देश के कई राज्यों में इसे डेयरी पनीर बताकर धड़ल्ले से बेचा जा रहा था। इससे ग्राहकों के साथ सीधे-सीधे धोखाधड़ी हो रही थी। क्योंकि फूड सेफ्टी नियमों के तहत खाद्य पदार्थों की सही जानकारी देना अनिवार्य है। हालांकि, इतने हंगामे और हो-हल्ले के बावजूद राजस्थान में अबतक इसे लेकर सख्ती नहीं नजर आ रही।



राजस्थान के बाजारों, होटलों और शादी-समारोहों में पाम ऑयल से बना यह मिलावटी पनीर धड़ल्ले से असली पनीर बताकर बेचा जा रहा। राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा मिलावट पर कड़ा रुख अपनाने और खाद्य सुरक्षा जांच पर सवाल उठाने के बाद भी, राज्य के खाद्य सुरक्षा विभाग की अनदेखी से उपभोक्ताओं की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ हो रहा है।



हाई कोर्ट पूछ चुका है दूध की जांच कैसे होती है!

राजस्थान में यह हाल तो तब है ​जबकि राजस्थान हाईकोर्ट खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर स्व:प्रेरणा से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है। पनीर दूध से बनने वाला खाद्य पदार्थ है।



हाईकोर्ट ने एक जुलाई को दिए आदेश में सरकार से राज्य में सिंथेटिक दूध, यूरिया युक्त पशु आहार और दूषित फसलों की जांच के निर्देश दिए थे।



सुनवाई के दौरान राज्य के पूर्व महाधिवक्ता व मामले में न्याय मित्र सीनियर एडवोकेट एम.एस.सिंघवी ने कोर्ट केा बताया था कि पशु आहार में औद्योगिक ग्रेड का यूरिया मिलाया जाता है। इससे पशुओं को तो नुकसान होता ही है साथ में उनके दूध की गुणवत्ता भी गिरती है।



इस पर कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि राज्य में संचालित राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF-सरस) के साथ-साथ अमूल,लोटस और मदर डेयरी जैसे प्रमुख ब्रांड सिंथेटिक उत्पादों की रोकथाम और जांच के लिए क्या कर रहे हैं। गौरतलब है कि सभी सरकारी व निजी डेयरी पनीर बनाकर बेच रही हैं।



क्या है एनालॉग पनीर?

एनालॉग पनीर पारंपरिक डेयरी पनीर से अलग होता है। यह दिखने और स्वाद में डेयरी पनीर जैसा ही होता है। इसे बनाने में मिल्क सॉलिड्स, पाम ऑयल और अन्य फूड एडिटिव्स का इस्तेमाल किया जाता है।



इसकी प्रोडक्शन लागत अपेक्षाकृत कम होती है। इसलिए कुछ ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए इसका इस्तेमाल होता है। जबकि कानूनी रुप से इसे डेयरी पनीर बताकर बेचना या परोसना फूड सेफ्टी नियमों का उल्लंघन है। इसके बावजूद राजस्थान में एनलॉग पनीर धडल्ले से बिक रहा है और इस्तेमाल हो रहा है।



राजस्थान में हर दिन होता एक हजार लाख टन दूध उत्पादन

आरसीडीएफ की ओर से हाई कोर्ट में पेश जवाब में बताया है कि राजस्थान में प्रतिदिन एक हजार लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। इसमें से आधा 500 लाख लीटर घरों में काम आता है और शेष 500 लाख लीटर बिकता है



500 लाख लीटर में से करीब 400 लाख लीटर असंगठित रुप से व शेष 100 लाख लीटर संगठित रुप से बिकता है। आरसीडीएफ हर दिन करीब 40-45 लाख लीटर दूध एकत्रित व प्रोसेस करती है व बाकी निजी डेयरी वाले काम में लेते हैं।



5 राज्‍यों की देश के कुल दूध उत्पादन में 54% हिस्सेदारी


भारी मात्रा में है पनीर की खपत

पनीर की खपत का कोई पुख्ता आंकड़ा मिलना संभव नहीं है,लेकिन हर दिन भारी मात्रा में इसका उत्पादन व इस्तेमाल होता है। ऐसा कोई होटल,रेस्टोरेंट व ढ़ाबा नहीं है जिसमें पनीर की एक से ज्यादा सब्जियां नहीं मिलती हों।



इसके अलावा घरों में भी पनीर का इस्तेमाल भारी मात्रा में होता है। विशेषकर विवाह समारोहों में पनीर का इस्तेमाल बहुतायत होता है। इसलिए एनालॉग पनीर के इस्तेमाल से इंकार नहीं किया जा सकता। लेकिन अभी तक राजस्थान के फूड व सेफ्टी विभाग ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है।



ANALOG PANEER


भारत में पनीर का बाजार

सबसे बड़े उपभोक्ता देश भारत का बाजार 2023 में 570 अरब रुपये का था, जिसके 2030 तक बढ़कर 1,848 अरब रुपये (अनुमानित) हो जाने की उम्मीद है, यह सालाना 14% की दर से बढ़ रहा है।



बाजार में ज्‍यादा लालच के ल‍िए कुछ निर्माता लागत कम करने के लिए मिलावट करते हैं। इस नकली पनीर का वजन बढ़ाने के ल‍िए स्टार्च जैसी चीजें म‍िलाई जाती हैं। इसके अलावा नकली पनीर सिंथेटिक दूध, डिटर्जेंट, कॉस्टिक सोडा और फॉर्मलिन (जो शरीर को संरक्षित करने में इस्तेमाल होता है!) जैसी चीजें मिलाई जा रही हैं।



पिछले साल नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 122 पनीर सैंपल की जांच हुई। इनमें 83% गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे. जबकि 40% सैंपल सीधे तौर पर असुरक्षित पाए गए। यानी ये पनीर तो खाने लायक भी नहीं है।



दक्षिण भारत के हालात तो और भी गंभीर हैं. कर्नाटक में 163 सैंपल लिए गए, सिर्फ 4 ही सुरक्षित पाए गए। लखनऊ में 103 सैंपल जांचे गए, 50% असुरक्षित निकले थे।



पनीर नहीं बल्कि विकल्प है एनालॉग पनीर

एनालॉग पनीर नॉन-डेयरी सब्सटीट्यूट फूड कैटेगरी में आता है। यह मूलत: पनीर का विकल्प है,लेकिन बाजार में इसे डेयरी पनीर बताकर बेचा जाता है।



विक्रेता ग्राहक एनालॉग पनीर के बारे में बताते नहीं हैं और इसे डेयरी पनीर बताकर बेच रहे हैं। जबकि फूड सेफ्टी एक्ट के अनुसार होटल-रेस्टोरेंट आदि को ग्राहकों को एनालॉग पनीर की जानकारी देना जरुरी है।



राज्य में लगातार खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए जा रहे हैं और उन्हें जांच के लिए भेजा जा रहा है। मिलावटी खाद्य पदार्थ के निर्माता व विक्रेताओं के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई भी हो रही है। पिछले महीने विभाग ने करीब 850 सैंपल लिए हैं और कार्रवाई जारी है। इससे ज्यादा जानकारी आयुक्त महोदया ही दे सकती हैं।



डॉ.विजय प्रकाश शर्मा


सहायक आयुक्त,फूड एंड सेफ्टी विभाग,राजस्थान।



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