आनंद महिंद्रा को चंबल रिवर फ्रंट की खूबसूरती ने किया चकित, पहले समझे AI अब वंडरर लिस्ट में शामिल
कोटा के हेरिटेज चंबल रिवर फ्रंट (Chambal Riverfront) की तारीफ अब देशभर में हो रही है। प्रसिद्ध उद्योगपति आनंद महिंद्रा (Anand Mahindra) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रिवर फ्रंट के बारे में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पहली बार तस्वीर देखने पर यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जेनरेटेड लगी।
लेकिन जब गहनता से इसको आगे देखा तो सामने आया कि यह असली है। यह चकित कर देने वाला भी है। आनंद महिंद्रा ने कहा कि चंबल हेरिटेज रिवर फ्रंट को अभी काफी प्रसिद्ध होने की दरकार है। उन्होंने लोगों से पूछा है कि जितनी खूबसूरत इसकी तस्वीर नजर आती है, क्या यह उतना ही खूबसूरत है।
किसकी की तारीफ
उन्होंने प्रदेश के पूर्व यूडीएच मंत्री और कोटा उत्तर विधायक शांति धारीवाल की तारीफ की। कोटा विकास प्राधिकरण और आर्किटेक्ट अनूप बरतारिया की भी सराहना की। रिवर फ्रंट निर्माण का श्रेय इन्हें दिया गया है।
उन्होंने कहा कि यह मेरी वंडरर लिस्ट में शामिल है। मैं इसे देखना चाहता हूं। उन्होंने यह भी कहा कि ज्यादा लोग इसके बारे में नहीं जानते हैं, जिन्होंने यह नहीं देखा है। लोगों को इसके बारे में जानना चाहिए।
कोटा की छवि पर बात
आनंद महिंद्रा ने कहा कि कोटा को कोचिंग सिटी के नाम से ही हम लोग सुनते हैं। स्टूडेंट के प्रेशर और दुखद घटनाओं के बारे में सोचते हैं। लेकिन चंबल रिवर फ्रंट के बारे में जानकारी नहीं थी।
चंबल नदी के दोनों किनारों पर करीब 3 किलोमीटर का रिवर फ्रंट है। यहां पर अलग-अलग घाट बने हुए हैं। इसके अलावा फाउंटेन और पर्यटकों को देखने के लिए काफी कुछ है। रिवर फ्रंट पर आमतौर पर कम लोग ही रोज पहुंच रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी अद्भुत पर्यटन स्थल के बारे में अभी तक क्यों नहीं सुना। उन्होंने लोगों से इसकी तस्वीरें शेयर करने का भी आग्रह किया है। इससे ज्यादा लोग इसे जान सकेंगे।
मंत्री बता रहे सफेद हाथी
रिवर फ्रंट पर शादी समारोह से लेकर कई तरह के आयोजन किए जा रहे हैं। इनका शुल्क भी लिया जाता है। पर्यटकों से एंट्री फीस भी ली जाती है। लेकिन खर्चा काफी ज्यादा है।
प्रदेश के यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा कोटा के हेरिटेज चंबल रिवर फ्रंट को कई बार सफेद हाथी बता चुके हैं। उनका कहना था कि रिवर फ्रंट पर पर्यटकों का फुटफॉल नहीं है। वहां पर व्यवस्थाएं सुचारू रखने के लिए 2 करोड़ रुपए महीना कोटा विकास प्राधिकरण को खर्च करना पड़ रहा है। जबकि पर्यटकों से इतनी आमदनी नहीं है।
धारीवाल ने क्या कहा?
इस पर कोटा उत्तर से कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल कहते हैं कि सरकार बदलने के बाद भाजपा शासन में रिवर फ्रंट पर प्रमोशन का काम नहीं हुआ। इसके लिए उन्होंने करीब करोड़ों का बजट रखा था। लेकिन यह पैसा खर्च नहीं हुआ।
इसलिए टूरिस्ट का फुटफॉल कम रहता है। इसके प्रचार-प्रसार को किया जाता तो स्थिति आज जैसी नहीं रहती। सरकार की मंशा सही नहीं है। उन्होंने कहा कि रिवर फ्रंट को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
पर्यटन बढ़ाने पर जोर
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, पर्यटन विभाग और कोटा के लोग लगातार रिवर फ्रंट का प्रमोशन करते हैं। कोटा में जनवरी 2026 में हाड़ौती ट्रेवल मार्ट का आयोजन किया गया था। इसमें भी रिवर फ्रंट का प्रमोशन किया गया है।
होटल फेडरेशन के राजस्थान के कोटा संभाग अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी का कहना है कि रिवर फ्रंट अद्भुत है और इसका प्रमोशन होना चाहिए। ट्रेवल मार्ट में आए टूर ऑपरेटरों ने भी चंबल रिवर फ्रंट की तारीफ की थी। ट्रेवल मार्ट के बाद कोटा में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है।
कितने में बना रिवर फ्रंट
रिवर फ्रंट 1450 करोड़ से बना है। यहां पर 27 घाटों का निर्माण हुआ है। सितंबर 2023 में इसका उद्घाटन भी हो गया था। दोनों तरफ मिलाकर करीब 6 किलोमीटर लंबे इस रिवर फ्रंट में 100 से ज्यादा नए मॉन्यूमेंट्स बने हैं।
अलग-अलग जगह की स्थापत्य कला भी है। हालांकि चंबल हेरिटेज रिवर फ्रंट पर होटल का निर्माण भी प्रस्तावित था, यह आगे नहीं बढ़ पाया है। रिवर फ्रंट पर टेंट सिटी स्थापित की जानी थी, यह भी नहीं हुई है। नाइट टूरिज्म के लिए यह पूरी तरह से रोशन रहता है।
राज्य की संस्कृति की झलक
राजस्थान के 9 इलाकों मारवाड़, मेवाड़, ढूंढाड़, बांगड़, बृज, हाड़ौती, किशनगढ़, शेखावटी और गोदवार की संस्कृति को यहां दर्शाया गया है। यहां पर चंबल माता की 62 मीटर ऊंची संगमरमर की प्रतिमा स्थापित की गई है।
यह चंबल के पानी से ही अर्घ्य दे रही है। जिसका पेडेस्टल 20 मीटर है, जबकि प्रतिमा 42 मीटर की है। विश्व का सबसे बड़ा नंदी भी यहां है। यह रिवर फ्रंट की खास पहचान बन गया है।
क्यों अहम है यह तारीफ
आनंद महिंद्रा की तारीफ से कोटा के रिवर फ्रंट को नई पहचान मिलेगी। इससे पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है। सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट से देशभर में इसकी चर्चा हो रही है।
इससे कोटा की छवि में बदलाव आ सकता है। यह शहर सिर्फ कोचिंग के लिए नहीं, बल्कि पर्यटन के लिए भी जाना जाएगा। अब देखना जरूरी है कि सरकार इसका प्रमोशन कैसे करती है।