जन्मदिन पर आने वाला था जवान, तिरंगे में लिपटकर घर पहुंचा पार्थिव शरीर

Ashish Bhardwaj | Jul 08, 2026, 12:59 IST
आर्यन झाझड़िया
राजस्थान के झुंझुनूं जिले के आर्यन झाझड़िया की चेन्नई में वायुसेना ड्यूटी के दौरान डूबने से मौत हो गई। वे 22 साल के थे। उनका अंतिम संस्कार आज 8 जुलाई को उनके पैतृक गांव में राजकीय सम्मान के साथ होगा।

समझें क्या है पूरा मामला

  • चेन्नई में ड्यूटी के दौरान डूबने से वायुसेना कंप्यूटर ऑपरेटर आर्यन झाझड़िया हुए शहीद।
  • झुंझुनूं के पीपल का बास गांव के रहने वाले थे आर्यन, 14 जुलाई को था 23वां जन्मदिन।
  • सेना ने शव को दिल्ली भेजा, पैतृक गांव में राजकीय सम्मान से होगा अंतिम संस्कार।
  • ढाई साल पहले हुआ था भारतीय वायुसेना में चयन, देश सेवा का था सपना।

वायुसेना के कंप्यूटर ऑपरेटर आर्यन झाझड़िया की चेन्नई में शहीद हो गई है। पांच जुलाई को ड्यूटी के दौरान पानी में डूबने से ये हादसा हुआ। वे राजस्थान में झुंझुनूं जिले के पीपल का बास गांव के रहने वाले थे। 14 जुलाई को उनका 23वां जन्मदिन था। अब आज 8 जुलाई पैतृक गांव में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार होगा।



चेन्नई में हुआ हादसा

पांच जुलाई को ड्यूटी के दौरान आर्यन पानी में डूब गए। यह हादसा चेन्नई में हुआ, जहां वे तैनात थे। सेना ने तुरंत परिवार को सूचना दी। आर्यन पिता भागीरथ झाझड़िया और सरोज देवी के इकलौते पुत्र थे। आर्यन के पिता बस सर्विस चलाते हैं। ढाई वर्ष पहले आर्यन का चयन भारतीय वायुसेना में हुआ था।



पैतृक गांव पहुंचा शव

पार्षद नत्थूसिंह गहलोत और सुनील गहलोत ने इस बारे में जानकारी दी। परिवार की ओर से आर्यन के मामा चेन्नई पहुंचे थे। वहीं पोस्टमार्टम और अन्य आवश्यक प्रक्रिया पूरी करवाई गई।



सेना ने आर्यन का शव हवाई जहाज से मंगलवार रात दिल्ली भेजा। वहां से शव आज पैतृक गांव पीपल का बास, मंडावा, झुंझुनूं पहुंचा। अब राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।



संगरिया से चिड़ावा तक का सफर

आर्यन ने संगरिया के स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद देश सेवा के सपने के लिए चिड़ावा में प्रशिक्षण लिया। करीब ढाई वर्ष पहले वायुसेना में उनका चयन हुआ।



वर्तमान में उनकी तैनाती चेन्नई में थी। परिचितों के अनुसार आर्यन शुरू से ही मेहनती और अनुशासित युवा थे। उनका सपना देश सेवा करना था। वे इसे निष्ठा से निभा रहे थे।



जन्मदिन से पहले ही चला गया लाडला

14 जुलाई को आर्यन अपना 23वां जन्मदिन मनाने वाले थे। वे अभी अविवाहित थे। परिवार में उनके अलावा एक बड़ी बहन हैं, जिनकी शादी हो चुकी है।



इसी सप्ताह शुक्रवार को आर्यन घर आने वाले थे। उनकी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की भी योजना थी। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था। इस बार बेटा तिरंगे में लिपटकर लौटेगा। बेटे के निधन से माता-पिता सहित पूरा परिवार गहरे सदमे में है।



परिवार का देश सेवा से जुड़ाव

भागीरथ झाझड़िया वर्षों से गांव में बस सेवा चला रहे हैं। उन्होंने बस सेवा को बेटे का नाम दिया। ताकि आर्यन हर सफर में साथ रहे। यह छोटा सा फैसला अब परिवार के लिए एक भावनात्मक याद बन गया है।



गांव के लोग बताते हैं, आर्यन बचपन से अनुशासित और मेहनती थे। स्कूल के दिनों से ही उनका झुकाव देश सेवा की ओर था। यही सपना उन्हें संगरिया से चिड़ावा और फिर वायुसेना तक ले गया।



गांव में शोक की लहर

आर्यन के निधन से पूरे गांव में शोक छा गया है। ग्रामीण और स्थानीय जनप्रतिनिधि परिवार के साथ खड़े हैं। पार्षद नत्थूसिंह गहलोत और सुनील गहलोत परिवार के संपर्क में रहे। उन्होंने हर जरूरी प्रक्रिया में मदद की।



आज p0[=o में बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे। स्थानीय प्रशासन और सेना के अधिकारी भी इस मौके पर मौजूद रह सकते हैं। गांव के बुजुर्ग इसे पूरे इलाके के लिए एक बड़ी क्षति बता रहे हैं।



एक अधूरा सपना, एक अधूरी योजना

आर्यन का जन्मदिन और घर आना, दोनों इस बार अधूरे रह गए। परिवार ने जन्मदिन की जो तैयारियां शुरू की थीं, वे अब सिर्फ यादें हैं। मां की बनाई पसंदीदा मिठाई अब सिर्फ एक याद है।



ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की छोटी सी योजना भी अधूरी रह गई। ऐसी छोटी-छोटी बातें अब परिवार के लिए सबसे भारी बोझ बन गई हैं। पूरा गांव इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़ा है।



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