हाई कोर्ट ने आसाराम को दी 20 दिन की पैरोल, सरकार का विरोध खारिज

Jageshwar prasad | Aug 04, 2026, 09:24 IST
13 साल बाद आसाराम को मिली पहली पैरोल
राजस्थान हाई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रहे 87 वर्षीय आसाराम को 13 साल बाद पहली बार 20 दिन की पैरोल दी। सरकार के विरोध को कोर्ट ने आधारहीन बताया।

समझें क्या है पूरा मामला

  • 13 साल बाद पैरोल पर बाहर आएगा आसाराम।
  • सरकार के विरोध को हाई कोर्ट ने बताया आधारहीन।
  • 50 हजार के मुचलके पर मिली 20 दिन की पैरोल।
  • फरार होने की आशंका को कोर्ट ने किया खारिज।
  • अच्छे आचरण को देखते हुए मिली यह बड़ी राहत।

जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद 87 वर्षीय आसाराम को राजस्थान हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उसे पहली बार 20 दिन की पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया है।



राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने पैरोल का कड़ा विरोध किया था। लेकिन हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार की सभी आशंकाओं को आधारहीन करार दिया।



कोर्ट की खंडपीठ ने क्या कहा?

राजस्थान हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने पैरोल याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार की ओर से पैरोल खारिज करने के लिए दी गई आशंकाओं का कोई ठोस आधार सामने नहीं आया।



सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के पक्ष ने अदालत को बताया कि जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट, जोधपुर की अध्यक्षता में हुई बैठक में पैरोल आवेदन पहले ही खारिज किया जा चुका था। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कालूराम भाटी और अधिवक्ता यशपाल सिंह राजपुरोहित ने पैरवी की।



सरकार और पुलिस के तर्क

पुलिस प्रशासन का तर्क था कि रिहाई के बाद आसाराम के फरार होने की आशंका है। इसके लिए राजस्थान प्रिजनर्स रिलीज ऑन पैरोल रूल्स, 1958 के नियम 14(ए) का हवाला दिया गया। सरकार के अनुसार राजस्थान से बाहर भी उसके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं और गुजरात के गांधीनगर की अदालत भी उसे दोषी ठहरा चुकी है।



सरकार ने यह भी कहा कि आसाराम का इलाज अभी चल रहा है और मेडिकल अधिकारी ने उसे पैरोल के लिए शारीरिक रूप से फिट होने का प्रमाण पत्र नहीं दिया है। इसके अलावा पीड़िता के परिवार की सुरक्षा को लेकर भी खतरे की बात उठाई गई थी।



13 साल से ज्यादा जेल में बिताने का तर्क

हाई कोर्ट ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद कहा कि आसाराम पहले ही 13 साल, 1 महीना और 24 दिन की सजा काट चुका है। कोर्ट के अनुसार इससे पहले उसे अंतरिम जमानत भी मिली थी।



अदालत ने कहा कि उस अवधि में जमानत के दुरुपयोग, समाज में अशांति फैलाने या किसी गवाह को धमकाने जैसी कोई घटना दर्ज नहीं हुई।



कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्थान में मिली सजा पर राज्य के पैरोल नियम ही लागू होंगे। वहीं किसी अन्य राज्य में चल रही कानूनी प्रक्रियाएं वहां के कानूनों के अनुसार अलग से जारी रहेंगी।



इन शर्तों पर मिली पैरोल

राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम को 50 हजार रुपए के व्यक्तिगत मुचलके और 25-25 हजार रुपए के दो जमानतदारों की शर्त पर 20 दिन की पैरोल मंजूर की है। गौरतलब है कि इसी साल 27 मई को हाई कोर्ट की एक अन्य खंडपीठ ने नाबालिग से जुड़े मामले में उसकी आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था।



इसके बावजूद लंबे समय से जेल में बंद रहने और पहले अंतरिम राहत के दौरान अच्छे आचरण को देखते हुए अदालत ने इस बार पैरोल याचिका स्वीकार कर ली। यह आसाराम को जेल जाने के बाद मिली पहली पैरोल है।



FAQ

  1. आसाराम को पैरोल क्यों दी गई है?
    हाई कोर्ट ने कहा कि आसाराम 13 साल से ज्यादा सजा काट चुका है और पहले मिली अंतरिम जमानत के दौरान उसने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया। इसी आधार पर अदालत ने सरकार के विरोध को आधारहीन मानते हुए पैरोल मंजूर की।
  2. राज्य सरकार ने आसाराम की पैरोल का विरोध क्यों किया था?
    सरकार ने फरार होने की आशंका, अन्य राज्यों में दर्ज मामलों और पीड़िता के परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। सरकार ने यह भी कहा था कि आसाराम को अभी पैरोल के लिए मेडिकल फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं मिला है।
  3. आसाराम को पैरोल किन शर्तों पर मिली है?
    आसाराम को 50 हजार रुपए के व्यक्तिगत मुचलके और 25-25 हजार रुपए के दो जमानतदारों की शर्त पर 20 दिन की पैरोल मिली है। यह उसकी सजा शुरू होने के बाद पहली पैरोल है।

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