20 दिन की पैरोल खत्म होने के बाद भी जेल नहीं पहुंचे आसाराम, जोधपुर में दर्ज हुआ मामला
थानाधिकारी जुल्फिकार के अनुसार, जोधपुर केंद्रीय कारागार के प्रहरी बनवारीलाल की ओर से दी गई रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट में बताया गया कि बंदी आसाराम को राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश पर 50,000 रुपए के निजी मुचलके पर 20 दिन की मेडिकल पैरोल पर छोड़ा गया था।
उन्हें 27 अक्टूबर की शाम 5 बजे तक जेल में आकर वापस सरेंडर करना था, लेकिन वह तय समय पर नहीं पहुंचे। इसके चलते उनके विरुद्ध राजस्थान कारागार अधिनियम की धारा 58 (ख) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अदालती अर्जी खारिज और देर रात जोधपुर आगमन
आसाराम मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित गवर्नमेंट धन्वंतरि आयुर्वेदिक अस्पताल में भर्ती होकर अपना इलाज करवा रहे थे। पैरोल की अवधि समाप्त होने से ठीक पहले उनके कानूनी वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाई कोर्ट में याचिकाएं दाखिल कर मेडिकल आधार पर पैरोल की अवधि बढ़ाने की गुहार लगाई थी। लेकिन अदालत ने इस मांग को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें तुरंत सरेंडर करने का कड़ा निर्देश जारी कर दिया।
राहत याचिकाएं खारिज होने के बाद आसाराम के वकील जोधपुर जेल प्रशासन के पास पहुंचे और कानूनी औपचारिकताएं निभाते हुए मोहलत मांगी। इसके बाद आसाराम को उज्जैन से एयर एंबुलेंस के जरिए जोधपुर लाया गया, जहां वे देर रात लगभग 10:15 बजे पहुंचे।
जेल के कड़े नियम और पुलिस में दर्ज हुई FIR
हवाई अड्डे से आसाराम को सीधे जोधपुर सेंट्रल जेल (Jodhpur Central Jail) ले जाया गया, लेकिन जेल मैन्युअल और सुरक्षा नियमों के अनुसार सूर्यास्त के बाद किसी भी बंदी या कैदी को जेल परिसर के भीतर प्रवेश देने की अनुमति नहीं होती है। इस प्रशासनिक नियम के कारण जेल प्रशासन ने उन्हें रात में अंदर लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद आसाराम को शहर के आरोग्य अस्पताल ले जाया गया।
इसी बीच, जेल की सुरक्षा और व्यवस्था देख रहे प्रहरी बनवारीलाल ने रातानाड़ा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। थानाधिकारी जुल्फिकार के अनुसार, जेल प्रहरी की इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने राजस्थान कारागार अधिनियम की धारा 58 (ख) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
3 साल की सजा का प्रावधान और पैरोल पर संकट
वर्ष 2015 में राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) द्वारा बनाए गए कारागार अधिनियम संशोधनों के तहत पैरोल नियमों का उल्लंघन एक गंभीर अपराध है। धारा 58 (ख) में यह साफ प्रावधान है कि यदि कोई कैदी तय समय पर वापस जेल नहीं आता या पैरोल की शर्तों को तोड़ता है, तो उसे दोषी पाए जाने पर 3 वर्ष तक का अतिरिक्त कारावास, 3,000 रुपए तक का जुर्माना या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।
कानूनी जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम के बाद अब आसाराम के लिए भविष्य में दोबारा पैरोल पाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। अदालती नियमों की अनदेखी और दर्ज हुई नई एफआईआर का असर उनकी लंबित याचिकाओं पर भी पड़ सकता है। इस बीच, जोधपुर में जेल और अस्पताल परिसर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है और उनके औपचारिक सरेंडर की कार्रवाई पूरी की जा रही है।