आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, नाबालिग से दुष्कर्म केस में अंतरिम जमानत नहीं
समझें क्या है पूरा मामला
- आसाराम ने स्वास्थ्य कारणों से सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत मांगी थी।
- कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद जमानत देने से इनकार कर दिया।
- कोर्ट ने पसंद का केयरटेकर रखने की इजाजत दी है।
- तबीयत बिगड़ने पर वे दोबारा अंतरिम जमानत की मांग कर सकते।
- इससे पहले राजस्थान HC उनकी आजीवन कारावास की सजा बरकरार रख चुका।
नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में दोषी आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। गुरुवार को कोर्ट ने आसाराम की अंतरिम मेडिकल बेल याचिका खारिज कर दी।
कोर्ट ने जमानत से क्यों किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आसाराम को अंतरिम जमानत की जरूरत नहीं दिख रही। कोर्ट ने याचिका को खारिज नहीं किया, बल्कि उसे पेंडिंग रखा है। जस्टिस एमएस सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने यह सुनवाई की।
पीठ ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि फिलहाल आसाराम की अंतरिम जमानत को पेंडिंग रखा जा रहा। हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि तबीयत बिगड़ने पर वे दोबारा अपील कर सकते हैं।
एम्स की मेडिकल रिपोर्ट में क्या था
4 अगस्त को एम्स की तरफ से आसाराम की मेडिकल रिपोर्ट पेश की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि आसाराम को अस्पताल में भर्ती रखने की जरूरत नहीं है। हालांकि डॉक्टरों ने यह भी बताया कि उनकी सेहत को देखते हुए 24 घंटे मेडिकल निगरानी जरूरी। इसी आधार पर कोर्ट ने आगे का फैसला लिया।
पसंद का केयरटेकर रखने की मिली इजाजत
आसाराम ने कोर्ट में बेल के साथ-साथ स्थायी पैरोल की भी मांग की थी। कोर्ट ने बेल तो नहीं दी, लेकिन 24 घंटे के लिए अपनी पसंद का ट्रेंड केयरगिवर रखने की इजाजत दे दी। इसके साथ ही कोर्ट ने जेल प्रशासन को आसाराम के लिए जरूरी चिकित्सा सुविधाएं देने के निर्देश भी दिए हैं।
पैरोल की जानकारी छुपाने पर नाराजगी
सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि आसाराम को राजस्थान हाई कोर्ट से 20 दिन की पैरोल मिली थी, लेकिन यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट से छुपाई गई थी। इस पर बेंच ने नाराजगी जाहिर की। हालांकि इसके बावजूद कोर्ट ने केयरटेकर रखने की छूट दे दी।
वकील ने रखी थी उम्र और बीमारी की दलील
याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर वकील डी.एस. नायडू ने कोर्ट में दलील दी। उन्होंने कहा कि आसाराम की उम्र 80 साल से ज्यादा है। वकील ने यह भी बताया कि आसाराम कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। इसी आधार पर अंतरिम जमानत की मांग की गई थी।
एक महीने पहले मांगा गया था जवाब
इस मामले में एक महीने पहले भी सुनवाई हुई थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से 2 हफ्ते में जवाब मांगा था। अब ताजा सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर फैसला नहीं दिया और याचिका को पेंडिंग रखा है।
हाईकोर्ट पहले ही बरकरार रख चुका है सजा
राजस्थान हाई कोर्ट ने 27 मई को आसाराम की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी थी। यह फैसला नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में आया था।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने यह सजा बरकरार रखने का आदेश दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट में भी उन्हें फिलहाल राहत नहीं मिली है।
FAQ
- सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में आसाराम को जमानत क्यों नहीं दी?
कोर्ट ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अंतरिम जमानत की जरूरत नहीं दिख रही। याचिका को पेंडिंग रखा गया है। - सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को क्या राहत दी?
SC ने आसाराम को 24 घंटे के लिए अपनी पसंद का केयरटेकर रखने की इजाजत दी है। जरूरी चिकित्सा सुविधा देने के भी निर्देश दिए हैं। - क्या आसाराम फिर से जमानत मांग सकते हैं?
हां, कोर्ट ने कहा है कि तबीयत बिगड़ने पर वे दोबारा अंतरिम जमानत की अपील कर सकते हैं।
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