आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, कोर्ट ने पैरोल बढ़ाने से किया इनकार, अब जेल में वापस लौटना होगा

Jageshwar Prasad | Oct 27, 2026, 14:15 IST
आसाराम को मेडिकल ग्राउंड पर राहत से इनकार, सुप्रीम कोर्ट ने जोधपुर जेल लौटने का दिया आदेश
नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने मेडिकल आधार पर उनकी पैरोल की अवधि बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया है। इसके चलते अब आसाराम को आज शाम 5 बजे तक जोधपुर सेंट्रल जेल में वापस आत्मसमर्पण करना होगा।

राजस्थान में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से करारा झटका लगा है। अदालत ने मेडिकल आधार पर उनकी पेरोल की अवधि बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया है। इसके चलते अब आसाराम को मंगलवार शाम 5 बजे तक जोधपुर सेंट्रल जेल में वापस आत्मसमर्पण (सरेंडर) करना होगा। इससे पहले राजस्थान हाई कोर्ट ने उन्हें 20 दिन की पैरोल दी थी, जिसकी अवधि पूरी हो चुकी है।




स्वास्थ्य कारणों और पैरोल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का रुख

पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद आसाराम की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अवधि बढ़ाने की मांग की गई थी। उनके वकीलों ने दलील दी थी कि उनकी तबीयत खराब है और वे फिलहाल उज्जैन के एक अस्पताल में भर्ती हैं, इसलिए उन्हें आगे भी इलाज की जरूरत है।



हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पेरोल बढ़ाने या अंतरिम जमानत देने से मना कर दिया और स्पष्ट किया कि पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें सरेंडर करना ही होगा।



सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को यह निर्देश भी दिए हैं कि जेल लौटने पर आसाराम के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाए और उन्हें आवश्यक चिकित्सीय उपचार उपलब्ध कराया जाए।




निचली अदालत से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक का कानूनी सफर

आसाराम को 25 अप्रैल 2018 को एक निचली अदालत ने अपने आश्रम में एक नाबालिग छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया था। अदालत ने आईपीसी, पॉक्सो (POCSO) अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।



इसके बाद मामला राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचा, जिसने 27 मई के अपने फैसले में 2013 के इस मामले में उनकी दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा। हालांकि, हाई कोर्ट ने उन्हें पूर्व भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो अधिनियम के तहत सामूहिक बलात्कार और गंभीर यौन उत्पीड़न से संबंधित आरोपों से बरी कर दिया था, लेकिन आईपीसी की धारा 376(2)(F) के तहत नाबालिग के बलात्कार के लिए उनकी सजा और आजीवन कारावास को बरकरार रखा।




साथ ही, हाईकोर्ट ने आईपीसी की धारा 342 (गलत तरीके से कैद करना), 370(4) (तस्करी), 506 (आपराधिक धमकी), 509 (महिला की गरिमा का अपमान करना) और 354ए (यौन उत्पीड़न) के साथ-साथ पॉक्सो अधिनियम की धारा 7 व 8 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 23 के तहत उनकी सजा को भी यथावत रखा। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट इसी फैसले के खिलाफ दायर आसाराम की अपील पर भी सुनवाई कर रहा है।




FAQs

  1. आसाराम की हालिया पैरोल के बारे में क्या जानकारी है?
    आसाराम को राजस्थान हाई कोर्ट ने 20 दिन की पैरोल दी थी, जो अब समाप्त हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल आधार पर उनकी पैरोल अवधि बढ़ाने से मना कर दिया है।
  2. आसाराम मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का क्या महत्व है?
    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, आसाराम को जोधपुर सेंट्रल जेल में वापस आत्मसमर्पण करना होगा, और जेल लौटने पर उनके स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
  3. आसाराम को पहले किस आरोप में सजा मिली थी?
    आसाराम को 25 अप्रैल 2018 को एक नाबालिग छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया गया था, जिसके तहत उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी।
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