आशा भोसले का रहा है राजस्थान से गहरा जुड़ाव, दिए हैं कई गानों में आवाज

Ashish Bhardwaj | Apr 13, 2026, 15:46 IST
Photograph: (the sootr)
सुरों की मल्लिका आशा भोसले का राजस्थान से गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने राजस्थानी में 45 से अधिक गानें और भजन गए। आशा भोसले का योगदान हमेशा याद किया जाएगा

News In Short

  • सुरों की मल्लिका आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन।
  • आशा ने राजस्थानी में 45 गाने गाए और भजनों में भी योगदान दिया।
  • उन्होंने बीकानेर के करणी माता मंदिर के लिए डिंगल भाषा में भजन गाए थे।
  • फिल्म 'राधू की लक्ष्मी' के गाने 'रात ढलती जाए' को अपनी आवाज दी।
  • राजस्थानी सिनेमा में आशा भोसले का योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

News In Detail

सुरों की मल्लिका आशा भोसले ने 92 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। उन्होंने भारतीय संगीत की दुनिया में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। राजस्थानी संगीत में उनके योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता। उन्होंने 14 राजस्थानी फिल्मों में 45 गाने गाए और कई भजनों को भी अपनी आवाज दी। उनकी आवाज आज भी भारतीय संगीत जगत में अनमोल मानी जाती है।




राजस्थानी संगीत में योगदान

आशा भोसले ने राजस्थानी भाषा में गाने की शुरुआत 1961 में की थी, जब संगीतकार पंडित शिवराम ने फिल्म 'बाबासा री लाडली' में उन्हें गाने के लिए प्रेरित किया। आशाजी ने इस फिल्म में 'ओ रंग रंगीलो आलीजो...' और 'बोल पंछीड़ा रे...' जैसे गाने गाए, जो आज भी लोगों की जुबां पर हैं। इन गानों को सुनते ही उनकी गायकी के प्रति प्रशंसा बढ़ी।



डिंगल भाषा में भजन

आशा भोसले का एक और अद्वितीय योगदान था बीकानेर के देशनोक स्थित करणी माता मंदिर के लिए गाए गए भजन। उन्होंने डिंगल भाषा में भजन गाए, जो बहुत कठिन मानी जाती है। मुंबई के पंचम दा स्टूडियो में रिकॉर्ड किए गए इस एल्बम ने आशा भोसले को भक्तिमय रूप में और भी प्रसिद्ध किया।



राजस्थानी फिल्मों में आशा जी की गायकी

राजस्थानी फिल्मों में आशा भोसले की गायकी ने एक नया मुकाम हासिल किया। 'धणी लुगाई', 'गणगौर', 'गोपीचंद भरथरी', 'ढोला मरवण' जैसी फिल्मों में उन्होंने गाने गाए जो आज भी राजस्थानी सिनेमा का हिस्सा बने हुए हैं। आशा जी ने कभी भी राजस्थानी सिनेमा को सिर्फ रीजनल सिनेमा के रूप में नहीं देखा। उनका मानना था कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती और वे हमेशा अच्छे संगीत के साथ जुड़ना चाहती थीं।



आशा भोसले की महान धरोहर

आशा भोसले ने राजस्थानी भजनों में भी अपना विशेष स्थान बना लिया था। वर्ष 1981 में जारी एलपी रिकॉर्ड ‘म्हारा थे ही धणी हो गोपाल’ को मास्टरपीस माना जाता है। इस एल्बम में भरत व्यास के लिखे भजनों को उन्होंने अपनी आवाज दी थी। इन भजनों ने उनकी भक्तिमय छवि को और भी प्रगाढ़ किया।



आशा जी से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी

राजस्थानी एक्टर-डायरेक्टर क्षितिज कुमार ने याद करते हुए बताया कि 1996 में आई उनकी फिल्म 'राधू की लक्ष्मी' के गाने ‘रात ढलती जाए’ के लिए आशा भोसले ने अपनी आवाज दी थी। क्षितिज ने आशा जी को मुंबई में राजस्थानी शब्दों की ट्रेनिंग दी और आशा जी ने बिना किसी संकोच के उसे स्वीकार किया। उन्होंने गाने के एक-एक शब्द पर ध्यान दिया और इसके बाद मुम्बई में ही इसे रिकॉर्ड किया गया।



आशा भोसले का राजस्थानी सिनेमा से प्यार

आशा भोसले ने कुल 14 राजस्थानी फिल्मों में करीब 45 गाने गाए। इन गानों में ‘सावण आयो रे…’, ‘झिरमिर झिरमिर रे…’, और ‘म्हारो छैलभंवर केसरियो बनड़ो...’ जैसे गाने शामिल हैं। आशा जी की आवाज ने राजस्थानी सिनेमा को समृद्ध किया और उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।



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