अशोक गहलोत ने नेताओं को दी नसीहत, बोले- CM के नाम के नारे मत लगाइए
समझें क्या है पूरा मामला
- अशोक गहलोत ने जोधपुर में कार्यकर्ताओं से लक्ष्मण रेखा न पार करने को कहा।
- ओसवाल भवन में कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान यह बयान आया।
- कार्यकर्ताओं ने चौथी बार सीएम के नारे लगाए, जिस पर गहलोत ने रोका।
- उन्होंने कहा कि सीएम कौन बनेगा, यह हाईकमान तय करेगा।
- गहलोत ने सरकार की मॉनिटरिंग और अकाल जैसे हालात पर भी सवाल उठाए।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को साफ संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नेता और कार्यकर्ता लक्ष्मण रेखा पार न करें। यह बयान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के उस बयान पर आया, जिसमें चौथी बार गहलोत सरकार के नारे लगाने से मना किया गया था।
नारे लगाने से किया मना
पूर्व CM अशोक गहलोत शनिवार को जोधपुर के ओसवाल भवन पहुंचे। वहां कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित था। जैसे ही गहलोत पहुंचे, कार्यकर्ता चौथी बार गहलोत सरकार के नारे लगाने लगे।
इस पर गहलोत ने तुरंत टोका। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पक्ष में काम करना है, नारे नहीं लगाने। उन्होंने याद दिलाया कि पहली बार सीएम बनने पर भी कोई नारा नहीं लगा था।
हाईकमान करेगा फैसला
गहलोत ने कहा कि सोनिया गांधी ने बिना उनकी मांग के उन्हें मुख्यमंत्री बनाया था। उस वक्त भी दूसरी, तीसरी या चौथी बार का कोई नारा नहीं लगा।
उनका कहना था कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह तय करना पार्टी हाईकमान का काम है। जनता की राय, जीते हुए विधायकों की राय और तमाम पहलुओं को देखकर ही यह फैसला होता।
उन्होंने बताया कि हाल ही में स्टेशन पर और पूर्व विधानसभा स्पीकर सुमित्रा जी से मिलने के दौरान भी कार्यकर्ताओं ने ऐसे नारे लगाए। गहलोत ने हर बार यही कहा कि यह फैसला हाईकमान का है।
सरकार की मॉनिटरिंग पर सवाल
गहलोत ने मौजूदा सरकार की कार्यशैली पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विकास कार्य प्रभावित हो रहे। पेंशन समय पर नहीं मिल रही। रिटायर्ड कर्मचारियों के लाभ भी अटके हुए हैं। उनके मुताबिक सरकार की मॉनिटरिंग कमजोर पड़ गई है। प्रशासनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था दोनों बिगड़ रही हैं।
जोधपुर में अटके कई प्रोजेक्ट
मीडिया से बातचीत में पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कई विभागों में भुगतान रुकने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि दोबारा बिल बनवाने के आदेश दिए जा रहे, ताकि भुगतान टाला जा सके।
उन्होंने जोधपुर के कुछ प्रोजेक्ट्स का जिक्र किया। स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट और लाइब्रेरी जैसी परियोजनाओं की इमारतें तैयार हैं, लेकिन संचालन शुरू नहीं हो पाया। कोच, उपकरण और सुविधाओं की कमी बताई गई। हॉस्टल तैयार होने के बावजूद छात्रों को बाहर रहना पड़ रहा है। गहलोत ने बताया कि इस पर मुख्यमंत्री से चर्चा हुई थी, लेकिन प्रगति नहीं हुई।
18 से 20 जिलों में कम बारिश
बारिश को लेकर गहलोत ने चिंता जताई। उन्होंने बताया कि करीब 18 से 20 जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है। उनके अनुसार अगर यही हालात रहे तो अकाल जैसी स्थिति बन सकती। उन्होंने सरकार से पेयजल, पशु चारा और राहत कार्यों की तैयारी अभी से करने की मांग की।
गहलोत ने अपने कार्यकाल के दौरान चार बार अकाल जैसी परिस्थितियों का सामना करने की बात कही। उस समय काम के बदले अनाज योजना के जरिए राहत पहुंचाने का दावा किया।
नीट पेपर लीक पर भी बोले
गहलोत ने नीट पेपर लीक मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर सबसे पहले उठाया था। उनके मुताबिक कांग्रेस ने जिला और ब्लॉक स्तर तक आंदोलन चलाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने छात्रों से किए वादे पूरे नहीं किए।
FAQ
- सवाल: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से क्या कहा?
जवाब: गहलोत ने कार्यकर्ताओं से चौथी बार CM के नारे न लगाने को कहा। उन्होंने कहा कि यह फैसला पार्टी हाईकमान करेगा। - सवाल: गहलोत ने राजस्थान सरकार पर क्या आरोप लगाए?
जवाब: गहलोत ने कहा कि सरकार की मॉनिटरिंग कमजोर और पेंशन समय पर नहीं मिल रही। उन्होंने विभागों में भुगतान रुकने का भी आरोप लगाया। - सवाल: अशोक गहलोत ने बारिश को लेकर क्या चेतावनी दी?
जवाब: गहलोत ने कहा कि 18 से 20 जिलों में कम बारिश हुई है। उन्होंने सरकार से अकाल जैसे हालात के लिए अभी से तैयारी करने को कहा।
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