गहलोत की सलाह, निकाय चुनावों में 50% टिकट युवाओं को, सिफारिश पर नहीं मेरिट पर बंटे टिकट

Ashish Bhardwaj | Aug 18, 2026, 18:22 IST
अशोक गहलोत
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्थानीय निकाय चुनावों में 50% से अधिक टिकट Gen-Z और युवाओं को देने की बात कही है। उन्होंने सिफारिश के बजाय केवल जमीनी हकीकत व मेरिट के आधार पर टिकट बांटने पर जोर दिया।

समझें क्या है पूरा मामला

  • बदलती राजनीति और पीढ़ीगत बदलाव के तहत 50% से ज्यादा टिकट Gen-Z को देने की वकालत।
  • गहलोत बोले-मेरी सिफारिश भी हो तो टिकट न दें, सिर्फ जमीनी कार्यकर्ताओं को ही मौका मिले।
  • भाजपा सरकार पर शहरी रोजगार योजना बंद करने और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स अटकाने का आरोप।
  • मेरिट के आधार पर टिकट बंटने पर चुनावों में कांग्रेस की भारी बहुमत से जीत का दावा।

पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने आगामी स्थानीय निकाय व पंचायत चुनावों के लिए टिकट वितरण में बड़ा बदलाव लाने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि बदलती राजनीतिक आबोहवा और युवा पीढ़ी की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए 50 प्रतिशत से अधिक टिकट जेन-जी (Gen-Z) और युवा कार्यकर्ताओं को दिए जाने चाहिए।



गहलोत ने कहा कि जेन-जी के आने के बाद देश का ज़माना बदल रहा है और नई पीढ़ी आगे आ रही है। वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का लाभ ज़रूर लें, लेकिन युवा पीढ़ी के महत्व से कोई इंकार नहीं कर सकता। उन्होंने याद दिलाया कि जंतर-मंतर पर हुए आंदोलनों और राहुल गांधी के नेतृत्व में किए गए प्रदर्शनों के बाद पूरे देश में पीढ़ीगत बदलाव का माहौल बना है। युवाओं को पार्टी की नीतियों, गांधीवादी सिद्धांतों और डॉ. आंबेडकर के संविधान के प्रति प्रतिबद्ध होकर काम करना होगा।



मैं भी करुं सिफारिश तो भी ज़मीनी हकीकत देखकर दें टिकट

टिकट वितरण प्रक्रिया पर गहलोत ने कहा कि पर्यवेक्षकों को मेरिट और ज़मीनी स्थिति के आधार पर फैसला लेने का पूरा अधिकार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक भी टिकट सिफारिश पर नहीं देना चाहिए। सिफारिश से दिया गया टिकट हार का कारण बनता है। वास्तविक कार्यकर्ता को ही मौका मिलना चाहिए। गहलोत ने कहा कि चाहे वह स्वयं भी जयपुर, बीकानेर या भरतपुर से किसी की सिफारिश करें, जबकि मुझे वहां की स्थानीय स्थिति का सटीक पता नहीं हो सकता। जीत तभी संभव है जब टिकट धरातल की सच्चाई के आधार पर बंटेंगे।



शहरी विकास ठप

राज्य की मौजूदा भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए गहलोत ने आरोप लगाया कि वर्तमान शासन में शहरों का विकास पूरी तरह से ठप हो चुका है।



शहरी रोजगार योजना बंद

उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश के बाद राजस्थान देश का ऐसा राज्य था जिसने नरेगा की तर्ज़ पर ऐतिहासिक इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना शुरू की थी जिसे मौजूदा सरकार ने बंद कर दिया है।



विकास योजनाएं और पट्टे अटके

गहलोत ने कहा कि उनके कार्यकाल में सरकार ने 500 रुपये में 12 लाख पट्टे दिए थे। जबकि वर्तमान सरकार के अभियान लगातार विफल हो रहे हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स, आईपीडी टावर और कई अंतरराष्ट्रीय लोन वाली विकास योजनाएं ठप पड़ी हैं।



स्वायत्त शासन मंत्रालय की अनदेखी

उन्होंने पूर्व मंत्री शांति धारीवाल के कार्यकाल के विकास कार्यों का ज़िक्र करते हुए कहा कि यूडीएच और स्थानीय निकायों का काम ऐतिहासिक था। लेकिन अब इस महत्वपूर्ण मंत्रालय पर ध्यान न दिए जाने से स्थिति खराब हो गई है।



गहलोत ने विश्वास जताया कि जनता में सरकार के प्रति भारी नाराजगी है और अगर कांग्रेस जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका देती है तो पार्टी चुनावों में भारी बहुमत से जीत दर्ज करेगी।



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