निकाय चुनाव: अशोक गहलोत के पैर किसने छुए? जांच में सामने आया तीन लोगों का नाम
समझें क्या है पूरा मामला
- गहलोत के पांव छूने वाले तीनों निकले आम नागरिक और एजेंट
- जोधपुर वोटिंग विवाद: जांच में बीजेपी का आरोप निराधार
- अशोक गहलोत पांव छूने का मामला, जांच में आया सच
- नगर निगम चुनाव: गहलोत विवाद में प्रशासन की सफाई आई
- जोधपुर बूथ विवाद: सरकारी कर्मचारी नहीं, वोटर ने छुए पांव
जोधपुर। राजस्थान निकाय चुनाव के दूसरे फेज की वोटिंग के दिन शुक्रवार को जोधपुर में अशोक गहलोत के पैर छूने का मामला चर्चा में रहा। वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी ने इसे चुनाव आचार संहिता का मामला बताया था। आरोप था कि मतदान केंद्र पर तैनात सरकारी कर्मचारी ने पूर्व मुख्यमंत्री के पैर छुए थे।
अब जिला प्रशासन की शुरुआती जांच में तस्वीर साफ हो गई। जांच के मुताबिक, पूर्व CM अशोक गहलोत के पैर एक नहीं, बल्कि तीन लोगों ने छुए थे। इनमें कोई भी चुनाव ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारी नहीं था।
गहलोत के पैर छूने वाले विवाद में क्या हुआ?
अशोक गहलोत अपनी पत्नी सुनीता गहलोत, बेटे वैभव गहलोत और बहू हिमांशी गहलोत के साथ शुक्रवार को जोधपुर के महामंदिर इलाके में स्थित वर्धमान जैन विद्यालय पहुंचे थे। यहां उन्होंने अपना वोट डाला। वोटिंग के बाद गहलोत बाहर निकल रहे थे। इसी दौरान तीन अलग-अलग लोगों ने उनके पैर छुए। इसी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था।
गहलोत के पूर छूने वाले तीन शख्स कौन थे?
जिला प्रशासन की जांच के मुताबिक, सबसे पहले एक आम मतदाता गहलोत के पास पहुंचा। उसने उनके पैर छुए और आशीर्वाद लिया। यह व्यक्ति चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी नहीं था। वह मतदान के लिए बूथ पर आया था। इसके बाद निर्दलीय प्रत्याशी प्रकाश बागोरिया का बूथ एजेंट गहलोत के पास पहुंचा। उसने भी पूर्व मुख्यमंत्री के पैर छुए। वह अधिकृत पोलिंग एजेंट था। वह सरकारी कर्मचारी नहीं था।
तीसरे व्यक्ति की पहचान भी सामने आई है। वह निर्दलीय प्रत्याशी प्रकाश बागोरिया का मुख्य चुनावी अभिकर्ता था। उसने भी राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत के पैर छूकर सम्मान जताया। यानी तीनों लोग अलग-अलग थे और तीनों में कोई भी पोलिंग पार्टी का सरकारी कर्मचारी नहीं था।
बीजेपी ने इस मामले में क्या आरोप लगाया था?
वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी के विधि प्रकोष्ठ ने इस मामले पर सवाल उठाए थे। बीजेपी का आरोप था कि मतदान केंद्र पर ड्यूटी कर रहा सरकारी कर्मचारी गहलोत के सामने झुका।
पार्टी ने इसे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता से जोड़ते हुए जोधपुर कलेक्टर और राज्य निर्वाचन आयोग से शिकायत की थी। संबंधित पोलिंग टीम के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई थी।
प्रशासन की जांच में क्या निकला?
शिकायत के बाद जोधपुर के जिला निर्वाचन अधिकारी ने जांच के निर्देश दिए। सेक्टर अधिकारी की रिपोर्ट और बूथ की वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच की गई। जांच में सामने आया कि पोलिंग पार्टी का कोई सदस्य अपनी कुर्सी से नहीं उठा था। किसी सरकारी कर्मचारी ने गहलोत के पैर नहीं छुए।
पैर छूने वाले तीनों लोग आम मतदाता या अधिकृत चुनावी अभिकर्ता थे। ऐसे में सरकारी कर्मचारी की ओर से आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप सही नहीं पाया गया।
कांग्रेस ने बीजेपी पर क्या कहा?
जांच के बाद कांग्रेस ने बीजेपी पर निशाना साधा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बीजेपी ने घटना को गलत तरीके से पेश किया। कांग्रेस का कहना है कि अशोक गहलोत राजस्थान के तीन बार मुख्यमंत्री रहे हैं। जोधपुर उनका गृह क्षेत्र भी है। ऐसे में किसी आम मतदाता या चुनावी एजेंट का सम्मान में पैर छूना सामान्य बात है। कांग्रेस ने इसे भारतीय संस्कृति और गहलोत के प्रति सम्मान से जोड़ते हुए बीजेपी के आरोपों को भ्रामक बताया।
FAQ
- जोधपुर के एक बूथ पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पांव किसने छुए?
जांच में सामने आया कि एक आम मतदाता और निर्दलीय प्रत्याशी के दो एजेंट ने अलग-अलग समय पर उनके पांव छुए। कोई सरकारी कर्मचारी शामिल नहीं था। - बीजेपी ने गहलोत को लेकर क्या आरोप लगाया था?
बीजेपी ने आरोप लगाया कि ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारी ने पूर्व सीएम का पैर छूकर आचार संहिता का उल्लंघन किया। जांच में यह आरोप निराधार पाया गया। - जिला निर्वाचन अधिकारी की जांच में क्या निष्कर्ष निकला?
सीसीटीवी फुटेज जांच में स्पष्ट हुआ कि पोलिंग पार्टी का कोई सदस्य अपनी जगह से नहीं उठा। पैर छूने वाले सभी लोग आम नागरिक और अधिकृत एजेंट थे।
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