पिता ने प्रैक्टिस के लिए बनवाई शूटिंग रेंज, अब एशियन गेम्स में बेटी बनी ब्रॉन्ज मेडलिस्ट
समझें क्या है पूरा मामला
- जालोर की बेटी ने जापान में रचा इतिहास।
- 15 साल की उम्र में थामी बंदूक, अब ब्रॉन्ज मेडल।
- पिता ने 18 बीघा में बनवाई निजी शूटिंग रेंज।
- तीन पीढ़ियों की विरासत बनी ताकत।
- पेरिस में चूकीं, एशियन गेम्स में मारी बाजी।
राजस्थान में जालोर जिले के सियाणा गांव की माहेश्वरी चौहान ने एशियन गेम्स 2026 में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रचा। 4 जुलाई 1996 को जन्मी माहेश्वरी ने 15 साल की उम्र में शूटिंग शुरू की। पिता ने 18 बीघा में निजी रेंज बनवाई।
जालोर के सियाणा गांव की माहेश्वरी चौहान ने जापान में तिरंगा लहराया है। एशियन गेम्स 2026 में महिला स्कीट टीम ने ब्रॉन्ज जीता। इस टीम की अहम सदस्य माहेश्वरी हैं। उनके पीछे तीन पीढ़ियों की शूटिंग विरासत है। पिता ने गांव में 18 बीघा जमीन पर निजी रेंज बनवाई थी।
सियाणा से जापान तक का सफर
माहेश्वरी चौहान का जन्म 4 जुलाई 1996 को राजस्थान के जालोर जिले के सियाणा गांव में हुआ। छोटा सा गांव, लेकिन निशानेबाजी का बड़ा माहौल था।
दादा गणपत सिंह, पिता प्रदीप सिंह और भाई दक्षेश्वर सिंह सभी शूटिंग से जुड़े थे। घर में ही बंदूक और निशाने की बात होती थी। इसी माहौल में माहेश्वरी बड़ी हुईं।
शुरू में यह सिर्फ मनोरंजन था। परिवार की निजी रेंज में वह शौकिया निशाना लगाती थीं। धीरे धीरे यह शौक जुनून बन गया। 15 साल की उम्र में उन्होंने गंभीरता से शूटिंग शुरू की।
पिता प्रदीप सिंह ने बेटी की प्रतिभा पहचानी। सियाणा से 6 किमी दूर आकोली रोड पर 18 बीघा जमीन में निजी शूटिंग रेंज खड़ी कर दी। यहीं माहेश्वरी ने बारीकियां सीखीं।
7 नेशनल गोल्ड से इंटरनेशनल तक
2012 से माहेश्वरी ने स्टेट और नेशनल प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया। लगातार बेहतर प्रदर्शन किया। अब तक 7 नेशनल गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं।
2017 में पहला अंतरराष्ट्रीय पदक मिला। इटली के पोपेटो में जूनियर वर्ल्ड कप में सिल्वर जीता। उसी साल कजाकिस्तान के अस्ताना में 7वीं एशियन चैंपियनशिप शॉटगन में ब्रॉन्ज जीता। तब वह 21 साल की थीं।
2017 में ही वह एशियन चैंपियनशिप में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला स्कीट शूटर बनीं। उन्होंने कजाकिस्तान में सिल्वर और ब्रॉन्ज दोनों जीते।
उनके कोच विक्रम सिंह चोपड़ा रहे। बाद में इटली के एंड्रिया बेनेली से ट्रेनिंग ली। दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से पढ़ाई भी जारी रखी। नेशनल चैंपियनशिप में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करती हैं।
उन्होंने ISSF ओलंपिक कोटा क्वालिफिकेशन में 121/125 का नेशनल रिकॉर्ड बनाकर ओलंपिक कोटा पक्का किया।
पेरिस में 1 अंक से चूकीं, नागोया में वापसी
पेरिस ओलंपिक 2024 में माहेश्वरी ने इतिहास रचा। भारत की पहली महिला स्कीट टीम का हिस्सा बनीं। मिश्रित स्कीट में वह चौथे स्थान पर रहीं। ब्रॉन्ज के मुकाबले में 43-44 से 1 अंक से चूक गईं।
व्यक्तिगत स्कीट में 118 अंक के साथ 14वें स्थान पर रहीं। मामूली अंतर से मेडल से चूकना बड़ा झटका था। लेकिन उन्होंने अभ्यास नहीं छोड़ा।
अब जापान के नागोया में एशियन गेम्स 2026 में शानदार वापसी की। रायजा ढिल्लों और परिनाज ढालीवाल के साथ मिलकर ब्रॉन्ज जीता। भारतीय तिकड़ी ने कुल 331 अंक बनाए। रायजा और परिनाज ने 111-111 और माहेश्वरी ने 109 अंक जोड़े।
यह महिला स्कीट टीम इवेंट में भारत का पहला एशियन गेम्स मेडल है। चीन ने 357 के साथ गोल्ड और कजाकिस्तान ने 337 के साथ सिल्वर जीता।
परिवार का साथ शादी के बाद भी
माहेश्वरी की शादी केलवा उदयपुर में हुई है। पति अजयराजसिंह राठौड़ भी नेशनल स्तर पर निशानेबाजी कर चुके हैं। परिवार ने हर कदम पर साथ दिया।
माहेश्वरी ने कहा, परिवार ने मेरी इच्छा के अनुसार हमेशा प्रेरित किया। शादी के बाद भी यह सिलसिला जारी है। खुशी है कि मैं सियाणा जैसे छोटे क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय पहचान का आधार बन रही हूं।
मेडल के बाद सियाणा में जश्न मनाया गया। ग्रामीणों ने मिठाई बांटी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने बधाई दी।
वह 8 नेशनल रिकॉर्ड बना चुकी हैं। उनका लक्ष्य स्कीट में भारत का पहला ओलंपिक मेडल और वर्ल्ड चैंपियन बनना है।