असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में इंटरव्यू के 40 फीसदी नंबर बरकरार, सरकार-RPSC की अपील मंजूर
जस्टिस इंद्रजीत सिंह व जस्टिस संदीप तनेजा की बैंच ने यह आदेश राज्य सरकार व RPSC (Rajasthan Public Service Commission) की अपील को मंजूर करते हुए दिए।
क्या था पूरा विवाद?
अतिरिक्त महाधिवक्ता विज्ञान शाह ने बताया कि यह मामला 27 नवंबर 2021 को जारी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती विज्ञापन से जुड़ा था। इस भर्ती के तहत मेडिकल एजुकेशन विभाग में 43 विषयों के कुल 337 पदों पर नियुक्तियां होनी थीं।
डॉ. रचिता माथुर ने स्किन एंड वीडी विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए आवेदन किया था। इस विषय में केवल तीन पद विज्ञापित थे। RPSC ने अधिक आवेदन मिलने के कारण 6 मई 2022 को स्क्रीनिंग टेस्ट आयोजित किया था। आयोग की 10 मई 2022 की बैठक में चयन के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट को 40, शैक्षणिक के लिए 20 और इंटरव्यू को 40 फीसदी वेटेज देने का निर्णय लिया था।
इसी बीच, राजस्थान सरकार ने 23 मई 2022 को नियमों में संशोधन किया। संशोधित नियम 19 के अनुसार, चयन में इंटरव्यू के अंक कुल अंकों के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकते थे। डॉ. माथुर का तर्क था कि भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी, इसलिए नए नियमों के अनुसार चयन होना चाहिए और उन्होंने इंटरव्यू में 40 फीसदी वेटेज देने को चुनौती दी।
सिंगल बैंच ने पक्ष में दिया था फैसला
सिंगल बैंच ने 10 जनवरी 2025 को डॉ.माथुर की याचिका को मंजूर करते हुए राज्य सरकार और RPSC को संशोधित नियमों के अनुरूप भर्ती पूरी करने तथा अभ्यर्थी की डॉ.माथुर की मेरिट पर विचार करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार और RPSC ने इस फैसले को राजस्थान हाई कोर्ट (Rajasthan HIgh Court) की डिविजन बैंच में चुनौती दी।
भर्ती के बीच बदले नियम लागू नहीं होंगे
डिविजन बैंच ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया विज्ञापन जारी होने के साथ शुरू होती है और रिक्त पद भरने तक चलती है। सामान्य तौर पर चयन प्रक्रिया शुरू होने के समय लागू नियम ही उस भर्ती पर प्रभावी रहते हैं। बाद में किए गए संशोधन को पुरानी भर्ती पर तभी लागू किया जा सकता है, जब उसे स्पष्ट रूप से पूर्वव्यापी प्रभाव दिया गया हो।
अदालत ने कहा कि 23 मई 2022 को अधिसूचित संशोधित नियम उसी दिन से लागू हुए थे। इनमें पुराने मामलों पर पूर्वव्यापी प्रभाव देने का प्रावधान नहीं था। ऐसे में नवंबर 2021 में शुरू हुई भर्ती पर इंटरव्यू के अधिकतम 10 प्रतिशत अंक वाला नया नियम लागू नहीं किया जा सकता।
40 प्रतिशत इंटरव्यू वेटेज को मनमाना नहीं माना
डिविजन बैंच ने कहा कि इंटरव्यू के लिए कितने अंक निर्धारित किए जाएं, यह संबंधित सेवा की जरूरतों और विशेषज्ञों के आकलन पर निर्भर करता है। RPSC ने स्क्रीनिंग टेस्ट, शैक्षणिक रिकॉर्ड और इंटरव्यू के लिए 40:20:40 का अनुपात तय किया था। अदालत को इस व्यवस्था में मनमानी या किसी गलत मंशा का प्रमाण नहीं मिला।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि सभी भर्तियों के लिए इंटरव्यू के अंकों का एक ही निश्चित अनुपात तय नहीं किया जा सकता। इसलिए केवल 40 प्रतिशत वेटेज होने के आधार पर चयन प्रक्रिया को गलत नहीं ठहराया जा सकता।
याचिका खारिज करने की दो और वजहें
अदालत ने डॉ. माथुर की ओर से पहले दायर एक अन्य याचिका का फैक्ट मौजूदा मामले में नहीं बताने को भी गंभीर माना। वह याचिका 2023 में जोधपुर स्थित हाईकोर्ट की मुख्य पीठ में दायर की गई थी। अदालत ने कहा है कि इस महत्वपूर्ण फैक्ट का खुलासा नहीं करने और इसे छिपाने के लिए दिया गया स्पस्ष्टीकरण स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अदालत ने कहा कि डॉ. माथुर ने भर्ती के नियमों पर आपत्ति जताए बिना स्क्रीनिंग टेस्ट में हिस्सा लिया था। ऐसे में बाद में चयन प्रक्रिया को चुनौती देने का उनका आधार भी स्वीकार्य नहीं है। ना ही ढाई साल की देरी से याचिका दायर करने का कोई संतोषजनक कारण ही बताया।
सरकार और RPSC को राहत
सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद खंडपीठ ने राज्य सरकार और RPSC की अपीलें मंजूर कर लीं। अदालत ने 2021 के विज्ञापन के तहत होने वाली इस भर्ती में 2022 के संशोधित नियमों के आधार पर इंटरव्यू वेटेज को 10 प्रतिशत तक सीमित करने की मांग को खारिज कर दिया है। अदालत ने एकलपीठ का 10 जनवरी 2025 का फैसले को रद्ध करते हुए डॉ. माथुर की याचिका भी खारिज कर दी है।