आयुष अधिकारी भर्ती 2025: आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी अभ्यर्थियों की कॉमन मेरिट पर विवाद
News In Short
- राजस्थान में 1535 आयुष अधिकारियों की संविदा भर्ती निकाली गई है।
- परीक्षा में सामान्य ज्ञान के अलावा 90 सवाल तीनों विषयों के अलग-अलग थे।
- बोर्ड अब अलग-अलग विषयों के बजाय सभी की एक कॉमन मेरिट बना रहा है।
- आरोप है कि आयुर्वेद के ज्यादा सवाल डिलीट होने से उन्हें अधिक अंक मिले।
- होम्योपैथी और यूनानी अभ्यर्थी अब इस फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी में।
News In Detail
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की संविदा पर आयुष अधिकारी भर्ती 2025 विवादों के घेरे में आ गई है। 1535 पदों पर हो रही इस भर्ती में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि बोर्ड का मेरिट बनाने का तरीका पूरी तरह गलत है।
दरअसल, इस भर्ती में आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी तीनों को शामिल किया गया है। परीक्षा में एक ही पेपर था, लेकिन उसमें एक बड़ा पेंच फंसा हुआ है। 150 सवालों में से 60 सवाल तो सबके लिए एक समान थे। लेकिन बाकी के 90 सवाल हर छात्र को अपने विषय के हिसाब से हल करने थे।
पेपर अलग लेकिन मेरिट एक क्यों?
विवाद की सबसे बड़ी जड़ यही है कि जब विषय के सवाल अलग थे, तो मेरिट एक क्यों? होम्योपैथी और यूनानी के छात्रों का कहना है कि आयुर्वेद के सवाल आसान हो सकते और 6 सवाल डिलीट से प्रति सवाल वेटेज बढ़ा है। ऐसे में तीनों की तुलना एक ही तराजू में करना नाइंसाफी है।
बोर्ड ने शुरुआती नोटिफिकेशन में यह भी नहीं बताया था कि किस पद्धति के कितने पद हैं। अब जब परिणाम आया है, तो स्थिति काफी चिंताजनक नजर आ रही है। आरोप है कि दस्तावेज सत्यापन के लिए चुने गए 3070 छात्रों में से करीब 2900 छात्र सिर्फ आयुर्वेद से हैं।
सवालों के डिलीट होने से बिगड़ा खेल
इस भर्ती में सवालों के डिलीट होने ने आग में घी डालने का काम किया है। आयुर्वेद विषय में सबसे ज्यादा 6 सवाल डिलीट हुए हैं। नियम के मुताबिक, डिलीट हुए सवालों के नंबर बचे हुए सवालों में जोड़ दिए जाते हैं।
इससे आयुर्वेद के एक सवाल की कीमत 3.10 अंक हो गई है। वहीं होम्योपैथी में एक सवाल 3.06 अंक का रह गया। इस छोटे से अंतर ने पूरी मेरिट को हिलाकर रख दिया है। आयुर्वेद के छात्रों को इससे सीधा और बड़ा फायदा मिल रहा है।
2016 की तर्ज पर पदों के बंटवारे की मांग
होम्योपैथी डेवलपमेंट एसोसिएशन अब इस मामले को लेकर मुखर हो गया है। प्रदेशाध्यक्ष दीपक मीणा का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया भेदभावपूर्ण है। उन्होंने मांग की है कि पदों का बंटवारा 40:40:20 के अनुपात में होना चाहिए।
एसोसिएशन का कहना है कि अगर बोर्ड ने अपनी गलती नहीं सुधारी, तो वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। उनकी मांग है कि 2016 की भर्ती की तरह ही पदों का वर्गीकरण हो। हर पद्धति की अपनी अलग मेरिट होनी चाहिए ताकि सबको मौका मिले।
बोर्ड अध्यक्ष ने नियमों का दिया हवाला
दूसरी ओर, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष आलोक राज ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि बोर्ड सिर्फ चिकित्सा विभाग से मिले नियमों का पालन कर रहा है। विभाग ने पदों के वर्गीकरण को लेकर कोई जानकारी नहीं दी थी। इसी वजह से बोर्ड अब कॉमन मेरिट बनाने के लिए मजबूर है।
विभाग की ओर से स्पष्ट निर्देश न होने के कारण यह पूरी उलझन पैदा हुई है। फिलहाल बोर्ड ने भी कहा है वह अपने फैसले पर कायम है, जिससे अभ्यर्थियों में भारी असंतोष है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
आयुष अधिकारी भर्ती में मुख्य विवाद क्या है?
मुख्य विवाद कॉमन मेरिट लिस्ट को लेकर है। परीक्षा में अभ्यर्थियों ने अपने-अपने विषय (आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी) के अलग-अलग 90 सवाल हल किए थे। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब पेपर का मुख्य हिस्सा अलग था, तो सबकी एक समान मेरिट बनाना गलत है। इससे केवल एक ही विषय के छात्रों को फायदा मिल रहा है।
सवालों के डिलीट होने से मेरिट पर क्या असर पड़ा?
परीक्षा में आयुर्वेद के 6, होम्योपैथी के 3 और यूनानी के 2 सवाल डिलीट हुए। नियमों के अनुसार, डिलीट हुए सवालों के अंक बाकी बचे सवालों में बांट दिए गए। इससे आयुर्वेद के प्रति सवाल का वेटेज अन्य विषयों से ज्यादा हो गया। यही कारण है कि कॉमन मेरिट में आयुर्वेद के छात्र टॉप पर आ गए।
अभ्यर्थी अब आगे क्या कदम उठाने वाले हैं?
होम्योपैथी और यूनानी पद्धति के अभ्यर्थी इस भर्ती प्रक्रिया से काफी नाराज हैं। उनका कहना है कि इस सिस्टम से वे भर्ती प्रक्रिया से लगभग बाहर हो गए हैं। होम्योपैथी डेवलपमेंट एसोसिएशन ने साफ किया है कि वे इस फैसले के खिलाफ कोर्ट जाएंगे और पदों के सही वर्गीकरण की मांग करेंगे।
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