12वीं में 90% से ज्यादा अंक, इनाम में मिली अहमदाबाद से बेंगलुरु की उड़ान
समझें क्या है पूरा मामला
- बाड़मेर के शिक्षक ने 90% लाने वाली तीन छात्राओं को करवाई हवाई यात्रा।
- शिक्षक जगदीश प्रसाद बिश्नोई ने पिछले सत्र में किया था हवाई यात्रा का वादा।
- हर्षिता, गीता और शांति ने 12वीं में 90% से अधिक अंक हासिल किए थे।
- छात्राओं ने 12 जून की शाम अहमदाबाद से बेंगलुरु तक की उड़ान भरी।
- शिक्षक अपनी पत्नी को भी साथ लेकर गए, ताकि छात्राओं को परेशानी न हो।
राजस्थान के बाड़मेर जिले के एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने जो वादा किया, उसे पूरा भी कर दिखाया। धोरीमन्ना क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पाबुबेरा में कार्यरत शिक्षक जगदीश प्रसाद बिश्नोई ने सत्र 2025-26 में घोषणा की थी कि 12वीं में 90 फीसदी या उससे अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों को वे अपनी निजी आय से हवाई यात्रा करवाएंगे।
परिणाम आए, तीन छात्राओं ने कमाल किया और शिक्षक ने 12 जून की शाम को अहमदाबाद से बेंगलुरु तक उन्हें हवाई यात्रा करवाई। यह उड़ान करीब ढाई घंटे की रही और तीनों छात्राओं के लिए यह जिंदगी का पहला और सबसे यादगार अनुभव बन गया।
वादे ने भर दिया पढ़ाई का जोश
जगदीश प्रसाद बिश्नोई स्टेट अवॉर्डी शिक्षक हैं। उनका मानना है कि ग्रामीण इलाकों के बच्चों के सपने बड़े होते हैं लेकिन संसाधन कम होते हैं। ऐसे में सही प्रोत्साहन मिले तो बच्चे किसी भी मुकाम को हासिल कर सकते हैं।
जब उन्होंने स्कूल में यह घोषणा की, तो विद्यार्थियों के भीतर पढ़ाई को लेकर एक नया उत्साह जाग गया। बच्चे पहले से ज्यादा मन लगाकर पढ़ने लगे।
तीन बेटियों ने किया कमाल
12वीं की परीक्षा में विद्यालय की तीन छात्राओं हर्षिता, गीता और शांति ने 90 फीसदी से अधिक अंक हासिल किए। ग्रामीण पृष्ठभूमि की इन बेटियों के लिए यह उपलब्धि अपने आप में बड़ी थी।
इसके बाद शिक्षक जगदीश प्रसाद ने अपने वादे के अनुसार तीनों के लिए हवाई टिकट बुक करवाई और 12 जून की शाम अहमदाबाद से बेंगलुरु फ्लाइट पर सबको साथ लेकर गए।
पहली उड़ान, जिंदगी भर याद रहेगी
तीनों छात्राओं के लिए यह पहली बार था जब वे हवाई जहाज में बैठीं। विमान में बैठने के बाद उनके चेहरे की खुशी देखते ही बनती थी।
छात्राओं ने बताया कि उन्होंने सोचा नहीं था कि वे इतनी जल्दी हवाई सफर करेंगी। यह उनके जीवन की सबसे यादगार यात्रा है। उन्होंने कहा कि अब वे और मेहनत और लगन से पढ़ाई करेंगी।
शिक्षक अकेले नहीं गए, पत्नी को भी साथ लिया
जगदीश प्रसाद बिश्नोई इस पूरी यात्रा में अपनी पत्नी को भी साथ लेकर गए। उनका मकसद था कि ग्रामीण इलाके से आई इन बालिकाओं को यात्रा के दौरान कोई परेशानी न हो।
बेंगलुरु में तीनों छात्राओं को एक-दो दिन का शैक्षणिक भ्रमण भी करवाया जाएगा। इसके बाद सभी गांव वापस लौटेंगे।
पूरे इलाके में फैल रही प्रेरणा
इस पहल की चर्चा अब पूरे धोरीमन्ना और बाड़मेर जिले में हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में जहां पढ़ाई को लेकर उत्साह कम दिखता है, वहां इस शिक्षक की कहानी एक नई रोशनी बन रही है।
जगदीश प्रसाद बिश्नोई की यह पहल बताती है कि शिक्षक सिर्फ पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि सपने भी पढ़ाते हैं।
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