राजस्थान क्रिकेट में उम्र का अजब खेल, बोन टेस्ट के नतीजे बेमेल; सालभर बाद उम्र घटी, चयन पर उठे गंभीर सवाल
क्रिकेट में उम्र की धोखाधड़ी को रोकने के लिए बीसीसीआई (BCCI – Board of Control for Cricket in India) ने अंडर-16 आयु वर्ग में बोन टेस्ट (Bone Test) की व्यवस्था अनिवार्य की है। लेकिन अब इसी मेडिकल टेस्ट के नतीजे गंभीर सवालों के घेरे में आ गए हैं।
राजस्थान के कुछ खिलाड़ियों की मेडिकल रिपोर्ट में हैरान करने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जहां एक साल बीतने के बाद खिलाड़ियों की उम्र बढ़ने के बजाय कम हो गई है। इन संदिग्ध रिपोर्ट्स के आधार पर संभावित खिलाड़ियों के चयन में भी विरोधाभास देखा गया है, जहां वास्तविक जन्मतिथि के हिसाब से सबसे कम उम्र का खिलाड़ी चयन से बाहर हो गया है, जबकि अन्य को चुन लिया गया है।
वासुदेव और निलय की रिपोर्ट में बड़ा अंतर
उपलब्ध मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, खिलाड़ियों की आयु में अजीब उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं:
- कुमार वासुदेव: खिलाड़ी की वास्तविक उम्र 16.1 वर्ष है। पिछले साल के बोन टेस्ट में उनकी उम्र 16.4 साल बताई गई थी। सामान्य गणित के अनुसार इस साल यह उम्र बढ़कर 17 साल 4 महीने होनी चाहिए थी, लेकिन नए बोन टेस्ट में यह घटकर 15.11 साल दर्ज की गई। यानी एक साल गुजरने के बाद उनकी बोन एज 15 महीने कम हो गई।
- निलय अरोरा: इनकी बोन एज पिछले साल 15 साल 7 महीने थी, जिसके आधार पर इस साल 16 साल 7 महीने होनी चाहिए थी। हालांकि, इस बार की रिपोर्ट में उम्र 16 साल बताई गई है, यानी टेस्ट में उम्र 7 महीने कम हो गई।
- रेयान सेबेस्टिन: पिछले साल बोन टेस्ट में रेयान की उम्र 16 साल 4 महीने आई थी। इस आधार पर इस साल यह 17 साल 4 महीने होनी चाहिए थी, लेकिन नए टेस्ट में 16 साल 5 महीने दर्ज की गई। हालांकि उम्र 9 महीने कम जरूर हुई, लेकिन वास्तविक रूप से कम उम्र होने के बावजूद उनका चयन संभावितों में नहीं हो सका।
क्या है बीसीसीआई का नया नियम और विवाद?
बड़ा सवाल यह है कि यदि पिछले साल की बोन एज में एक साल जोड़ने पर कोई खिलाड़ी इस साल अंडर-16 के लिए अयोग्य हो जाता है, तो उसका दोबारा बोन टेस्ट क्यों कराया जा रहा है?
इस संबंध में जब राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA – Rajasthan Cricket Association) से सवाल किया गया, तो एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि वे केवल बीसीसीआई के नियमों का पालन कर रहे हैं। बीसीसीआई के नए प्रावधान के अनुसार, यदि ‘+1 फैक्टर’ (हर साल एक साल जुड़ना) के कारण कोई खिलाड़ी अयोग्य हो रहा है, तो उसका दोबारा साइंटिफिक बोन टेस्ट कराया जा सकता है।
यदि इस नए टेस्ट में बोन एज 16 साल 4 महीने या उससे कम आती है, तो खिलाड़ी अंडर-16 में खेलने के लिए पात्र माना जाता है। इसी नियम और दोबारा जांच के परिणामों पर अब पारदर्शिता को लेकर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।