बीज निगम रिश्वत कांड में इसी माह पेश होगी चार्जशीट, 2.44 करोड़ का है मामला
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान राज्य बीज निगम के 2.44 करोड़ रुपए रिश्वत कांड में ACB की जांच अंतिम चरण में पहुंची है।
- एसीबी इसी महीने के अंत तक मामले में चार्जशीट पेश करने की तैयारी कर रही है।
- जांच में तत्कालीन एमडी जुगल किशोर विश्नोई के संरक्षण में रिश्वत नेटवर्क चलने का खुलासा हुआ है।
- एसीबी ने कार्रवाई में 2.44 करोड़ रुपए नकद और लेन-देन से जुड़े सबूत जुटाए हैं।
- अब चार अन्य लोगों से पूछताछ कर 60 लाख रुपए के लेन-देन की कड़ी जोड़ी जाएगी।
राजस्थान राज्य बीज निगम के बहुचर्चित 2.44 करोड़ रुपए रिश्वत कांड में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी (ACB) की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। एसीबी इसी महीने के अंत तक चार्जशीट पेश करने की तैयारी में है।
जांच पूरी हो चुकी है और अभियोजन से जुड़ी औपचारिकताएं भी अंतिम दौर में हैं। चालान पेश होने के बाद एसीबी अपनी जांच का दूसरा चरण शुरू करेगी। इस चरण में अब तक सामने आए चार अन्य लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।
एमडी के संरक्षण में चलता था गिरोह
एसीबी की जांच में सामने आया कि बीज निगम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक जुगल किशोर विश्नोई के संरक्षण में एक संगठित गिरोह की तरह काम हो रहा था। इस गिरोह में अलग-अलग तरीकों से वसूली की जा रही थी।
जांच के मुताबिक सुनील सेतिया छापे की कार्रवाई के बाद फैक्ट्री संचालकों या संबंधित लोगों से खुद संपर्क करता था। वह जुगल किशोर सहित अन्य अधिकारियों से संपर्क कराने और मामले में मदद करने की बात कहता था। इस गिरोह में लाइजनर का काम करने वाले कुछ अन्य लोग भी शामिल थे।
7 जून को हुआ था नेटवर्क का खुलासा
एसीबी ने 7 जून को राजस्थान राज्य बीज निगम में करोड़ों रुपए के इस रिश्वत नेटवर्क का पर्दाफाश किया था। उस कार्रवाई में तत्कालीन प्रबंध निदेशक जुगल किशोर बिश्नोई पकड़े गए थे।
इसके साथ ही उनके करीबी स्वतंत्र बिश्नोई, फलौदी विधायक के तत्कालीन निजी सहायक गणपत बिश्नोई, किरण कपाड़िया, सुनील सेतिया और सतपाल के खिलाफ भी कार्रवाई हुई थी।
रिमांड में हुआ पूरे नेटवर्क का खुलासा
जांच के दौरान मुख्य आरोपियों को पहले पांच दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया था। इसके बाद अदालत से दो दिन का अतिरिक्त रिमांड लेकर सभी को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई। इसी पूछताछ में पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।
एसीबी ने पूछताछ के साथ-साथ मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर रिश्वत के पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ीं। जांच में यह भी सामने आया कि करोड़ों रुपए के लेन-देन का यह पूरा सिस्टम बेहद संगठित तरीके से चलाया जा रहा था।
कार्रवाई के दौरान एसीबी ने जुगल किशोर के ठिकानों से नकदी बरामद की थी। इसके अलावा बस के जरिए भेजी जा रही रकम भी पकड़ी गई थी। कुल मिलाकर करीब 2.44 करोड़ रुपए बरामद किए गए थे।
60 लाख रुपए की कहानी अब भी अधूरी
जांच के दौरान एसीबी के सामने एक अहम तथ्य आया। पता चला कि इस रिश्वत के सौदे में करीब 60 लाख रुपए गणपत बिश्नोई के हिस्से में गए थे।
हालांकि पूछताछ और तलाशी के बावजूद यह पूरी रकम अब तक बरामद नहीं हो सकी है। एसीबी को शक है कि इस रकम को अलग-अलग लोगों के जरिए ठिकाने लगाया गया।
चार और लोगों से होगी पूछताछ
सूत्रों के मुताबिक चालान पेश होने के बाद एसीबी चार अन्य लोगों को पूछताछ के लिए बुलाएगी। इनमें बीज निगम के तत्कालीन निदेशक के लिए कथित तौर पर लाइजनिंग करने वाला एक व्यक्ति शामिल है।
इसके अलावा जोधपुर निवासी रोशनी और जांच के दौरान सामने आए दो अन्य लोगों को भी बुलाया जाएगा। एसीबी का मानना है कि इनसे पूछताछ के बाद 60 लाख रुपए के लेन-देन और पूरे नेटवर्क की नई कड़ियां सामने आ सकती हैं।
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