राजस्थान में अफसरों की मनमानी पर चला सरकार का डंडा, 17 का इंक्रीमेंट रोका, 16 की पेंशन पर चली कैंची
इन अधिकारियों पर अवैध रेत खनन माफिया की मदद करने, पैसों की गड़बड़ी और ड्यूटी में गंभीर लापरवाही बरतने जैसे आरोप थे। सरकार ने यह कार्रवाई विभागीय जांच के आधार पर की है।
माफिया की मदद करने वाले अफसरों पर कार्रवाई
सरकार की इस कार्रवाई में ऐसे अधिकारी भी शामिल हैं, जिन पर अपराधियों और अवैध खनन करने वालों की मदद करने के आरोप जांच में सही पाए गए हैं। इसी आधार पर सरकार ने दोषी पाए गए अधिकारियों की सालाना वेतन बढ़ोतरी रोकने का फैसला लिया है।
इसके तहत कुल चार सालाना वेतन वृद्धियां रोकने की मंजूरी दी गई है। वहीं, रिटायर हो चुके 16 अधिकारियों की पेंशन रोकने या उसमें कटौती की कार्रवाई की गई है। इस फैसले से साफ है कि विभागीय गड़बड़ियों के मामलों में कार्रवाई सिर्फ नौकरी के दौरान ही नहीं, बल्कि रिटायरमेंट के बाद भी हो सकती है।
मौजूदा अधिकारियों पर गिरी गाज, इंक्रीमेंट रोके गए
सरकार द्वारा की गई इस कार्रवाई में कई विभागों के अधिकारी जद में आए हैं।
- पुलिस विभाग में कार्रवाई: एक तत्कालीन सर्कल ऑफिसर (CO) पर अवैध रेत माइनिंग और आपराधिक तत्वों से मिलीभगत कर गलत फायदा उठाने के आरोप थे, जिनके खिलाफ सख्त सजा तय की गई है। इसके अलावा एक अन्य मामले में सही जांच न करने के लिए तत्कालीन सर्कल इंस्पेक्टर (CI), असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) और एक कांस्टेबल को भी लापरवाह मानते हुए उनकी सैलरी इंक्रीमेंट रोकी गई है।
- अन्य विभागों के अधिकारी: मनरेगा (MGNREGS) योजनाओं के निरीक्षण और रखरखाव में बड़ी लापरवाही बरतने पर राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS - Rajasthan Administrative Services) के एक अधिकारी को दंडित किया गया है। इसके अलावा बिना अनुमति लंबे समय तक ड्यूटी से गायब रहने वाले तीन मेडिकल अफसरों पर भी एक्शन शुरू हुआ है, जबकि गलत तरीके से खून चढ़ाने से जुड़े मामले में एक डॉक्टर का दो साल का इंक्रीमेंट रोका गया है।
रिटायरमेंट के बाद भी नहीं बख्शे गए भ्रष्ट अधिकारी
भजनलाल सरकार (Bhajanlal Government) ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) का मतलब यह नहीं है कि सेवाकाल के दौरान किए गए भ्रष्टाचार के लिए अधिकारियों को छूट मिल जाएगी। वित्तीय गड़बड़ियों और गंभीर नियमों के उल्लंघन के चलते 16 रिटायर्ड अधिकारियों की पेंशन पर कैंची चली है:
- 100% पेंशन बंद: राजस्थान अकाउंट्स सर्विस के एक रिटायर्ड अधिकारी ने एक प्राइवेट कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर किया था, जिससे खजाने को भारी नुकसान हुआ। सरकार ने इस मामले में उनकी पूरी 100 प्रतिशत पेंशन हमेशा के लिए रोक दी है।
- पेंशन में कटौती: राजस्थान प्रशासनिक सेवा के दो रिटायर्ड अधिकारियों ने कमर्शियल और रेजिडेंशियल प्लॉट को खेती की जमीन बताकर सरकार को वित्तीय चपत लगाई थी, जिसके चलते उनकी पेंशन का 20 प्रतिशत हिस्सा 5 साल के लिए रोक दिया गया है।
- इसके अलावा मेडिकल, सोशल जस्टिस, माइंस, कॉलेज एजुकेशन और देवस्थान विभाग से जुड़े मामलों में भी कई रिटायर्ड अधिकारियों पर गाज गिरी है।
नियमों के तहत पारदर्शिता और राहत भी
यह पूरी कार्रवाई राजस्थान सिविल सर्विसेज (क्लासिफिकेशन, कंट्रोल एंड अपील) रूल्स, 1958 के रूल 16 के तहत की गई है। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि निर्दोषों को परेशानी न हो; विस्तृत जांच के बाद 8 मामलों में पर्याप्त सबूत न मिलने पर अधिकारियों को राहत भी दी गई है।
राज्य सरकार के इस कड़े कदम से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है और यह संदेश गया है कि जनहित और सुशासन से समझौता करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।