राजस्थान में पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की पीट-पीटकर हत्या, क्रेशर विवाद में ग्रामीणों ने किया हमला
समझें क्या है पूरा मामला
- पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना (68) की रविवार रात 11:30 बजे SMS अस्पताल, जयपुर में मौत हुई।
- परिजनों के अनुसार वे शाम 6:30 बजे भौंड़ा गांव में अपने क्रेशर खनन लीज पर गए थे।
- पत्नी कमलेश का आरोप है कि 70-80 लोगों ने लाठी-पत्थरों से हमला किया।
- पुलिस के अनुसार क्रेशर को लेकर ग्रामीणों और संचालक में करीब 4 साल से विवाद था।
- ग्रामीणों का कहना है कि 10-15 दिन से शांतिपूर्ण धरना चल रहा था।
- किसी भी पक्ष की ओर से पुलिस में अब तक मामला दर्ज नहीं कराया गया है।
भरतपुर जिले में अतर सिंह भड़ाना हत्या के आरोप का मामला सामने आया है। बयाना के पूर्व विधायक और भाजपा नेता अतर सिंह भड़ाना (68) की रविवार रात जयपुर के SMS अस्पताल में मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि लाठी-पत्थरों के हमले में वे गंभीर घायल हुए थे।
घटना वैर क्षेत्र के भौंड़ा गांव में क्रेशर खनन लीज (प्लांट) पर हुई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमले के आरोप लगाए हैं। पुलिस के अनुसार अभी किसी भी पक्ष की ओर से मामला दर्ज नहीं हुआ है।
वैर भौंड़ा गांव क्रेशर विवाद में रविवार शाम क्या हुआ?
पत्नी कमलेश के अनुसार अतर सिंह रविवार शाम करीब 6:30 बजे भौंड़ा गांव में अपने क्रेशर खनन लीज पर पहुंचे थे। उनका आरोप है कि 6:30 से 7 बजे के बीच 70-80 लोगों ने उन पर और अन्य लोगों पर हमला किया। उस समय क्रेशर प्लांट पर करीब 20-25 कर्मचारी मौजूद थे।
हमले में अतर सिंह और उनके सहयोगी गगन शर्मा गंभीर रूप से घायल हुए। दोनों को पहले वैर अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद अतर सिंह को जयपुर और गगन शर्मा को भरतपुर रेफर किया गया। SMS थानाधिकारी जितेंद्र कुमार के अनुसार अतर सिंह की रात 11:30 बजे SMS अस्पताल में मौत हो गई।सवाल यह है कि इस विवाद में पुलिस और दोनों पक्ष क्या कह रहे हैं?
भड़ाना की पत्नी कमलेश का आरोप
कमलेश का कहना है कि उनकी लीज का कनेक्शन काट दिया गया था और वाटर पंप खराब कर दिया गया था। उनका आरोप है कि लीज पर जाने वाले लोगों को वहां से भगा दिया जाता था। कमलेश के अनुसार इस बारे में पुलिस और प्रशासन को रोज सूचना दी जाती थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी दावा किया कि अतर सिंह को गोली लगी थी। ये कमलेश के आरोप हैं। इन पर पुलिस या प्रशासन का जवाब सोर्स में नहीं है।
थाना प्रभारी ने 4 साल पुराने विवाद पर क्या बताया?
थाना प्रभारी धीरेंद्र सिंह ने बताया कि करीब 4 साल पहले क्रेशर को लेकर ग्रामीणों और संचालक के बीच झगड़ा और मारपीट हुई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि अतर सिंह ने चारागाह भूमि पर अतिक्रमण किया और अवैध खनन कर रहे थे। लीज के रास्ते को लेकर भी विवाद चल रहा है। लगभग दो साल से ग्रामीण बीच-बीच में धरना प्रदर्शन कर रहे थे।
पुलिस के अनुसार पिछले एक साल से क्रेशर बंद था। अतर सिंह उसे चालू करवाने की कोशिश कर रहे थे, इसलिए रविवार को भी वहां पहुंचे। इसके बाद ग्रामीणों से विवाद हुआ। पुलिस का कहना है कि धरना दे रहे ग्रामीणों ने अतर सिंह पर हमला किया। ग्रामीणों का चारागाह भूमि अतिक्रमण और अवैध खनन का आरोप अभी साबित नहीं हुआ है। सोर्स में लीज की वैधता या प्रशासन की जांच का जिक्र नहीं है।
चारागाह भूमि अतिक्रमण क्रेशर ग्रामीण धरना: ग्रामीणों का पक्ष क्या है?
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 10-15 दिन से शांतिपूर्ण धरना चल रहा था। उनके मुताबिक रविवार शाम भड़ाना पक्ष के 40-50 लोग मौके पर पहुंचे और उन्हें धरना स्थल से हटा दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बाद दोनों पक्षों में विवाद बढ़ा। देखते ही देखते लाठी-पत्थर चलने लगे। उनके अनुसार इसी संघर्ष में भड़ाना गंभीर रूप से घायल हो गए। यह ग्रामीणों का पक्ष है। भड़ाना पक्ष इसे नकारता है। दोनों के दावे एक-दूसरे से अलग हैं।
डॉक्टर ने क्या कहा?
वैर उप जिला अस्पताल के डॉक्टर रवि के अनुसार घायलों को रात 8:15 बजे अस्पताल लाया गया। वहां पूर्व विधायक और उनके सहयोगी को प्राथमिक इलाज के बाद रेफर किया गया। डॉक्टरों ने प्रथमदृष्टया गोली लगने की घटना से इनकार किया है। थाना प्रभारी ने बताया कि फायरिंग को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है। SMS अस्पताल की पोस्टमार्टम या मेडिकल रिपोर्ट सोर्स में नहीं है। इसलिए मौत का सटीक कारण अभी आधिकारिक रूप से साफ नहीं है।
भौंड़ा गांव में पुलिस बल तैनात, प्रदेश में राजनीतिक प्रतिक्रिया
घटना के बाद भौंड़ा गांव में पुलिस बल तैनात है। भरतपुर से भी अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर पहुंचा है। सोर्स के अनुसार घटना के बाद से गांव में कोई पुरुष नहीं है। पूर्व विधायक का शव SMS अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखा है। बेटे अर्जुन सिंह और परिजन मॉर्च्युरी के बाहर मौजूद हैं।
पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसे कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल बताया। उन्होंने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। उनके बयान में डेढ़ घंटे तक पथराव की बात भी है। यह डोटासरा का बयान है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि सोर्स में नहीं है।
अब नजर इस पर रहेगी कि किसी पक्ष की FIR दर्ज होती है या नहीं और पुलिस जांच में क्या सामने आता है। यह भी देखना होगा कि मेडिकल रिपोर्ट में मौत का कारण क्या निकलता है।
यह खबर क्यों जरूरी है:
किसी पूर्व विधायक की मौत का मामला कानून-व्यवस्था और खनन विवादों पर सवाल उठाता है। ग्रामीणों का धरना, क्रेशर का विवाद और चारागाह भूमि का मुद्दा कई गांवों से जुड़े मामले हैं। दोनों पक्षों के आरोप एक-दूसरे के उलट हैं, इसलिए तथ्य और आरोप का फर्क साफ रखना जरूरी है। इस मामले में अब तक किसी पक्ष की FIR नहीं हुई है, जिससे जांच का दायरा अभी साफ नहीं है। जांच पूरी होने तक किसी को दोषी या निर्दोष कहना जल्दबाजी होगी।