30-40 सीजेरियन रोज, सर्जिकल सेट सिर्फ 5, 6 दिन में 5 प्रसूताओं की मौत
समझें क्या है पूरा मामला
- भीलवाड़ा में छह दिन में पांच प्रसूताओं की मौत से हड़कंप।
- बांसवाड़ा में भी दो घंटे के भीतर दो प्रसूताओं ने तोड़ा दम।
- ओटी की संक्रमण रिपोर्ट पॉजिटिव, सवालों में अस्पताल प्रशासन।
- रोज 40 सीजेरियन, सिर्फ पांच सर्जिकल सेट, यही बनी वजह।
- मार्च से अब तक नौ मौतें, परिजनों का लापरवाही का आरोप।
भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में छह दिन में पांच प्रसूताओं की मौत हुई है। सभी की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी और बाद में तबीयत बिगड़ी थी। ऑपरेशन थिएटर की संक्रमण जांच रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है।
बांसवाड़ा के सरकारी अस्पताल में भी दो घंटे में दो प्रसूताओं की मौत हुई। परिजनों ने दोनों जगह अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
छह दिन में पांच मौतें
भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय, यानी एमसीएच (Maternal and Child Health) में लगातार मौतें हो रही हैं। शुक्रवार को पोटला निवासी संगीता जीनगर की प्रसव के बाद तबीयत बिगड़ी थी। उन्हें मेडिकल आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा भी किया।
इससे पहले भी लगातार मौतें दर्ज हुई हैं। 5 जुलाई को शिमला गुर्जर की मौत हुई थी। 7 जुलाई को फोरी देवी और 8 जुलाई को इशा पांडे की जान गई। 9 जुलाई को दिव्या की भी मौत हो गई थी। सभी मामलों में परिजनों ने अस्पताल पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
मार्च से अब तक 9 मौतें
भीलवाड़ा के इसी अस्पताल में मार्च से अब तक कुल नौ प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। इनमें से पांच मौतें अकेले जुलाई महीने में हुई हैं। इसी बीच अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर की कल्चर टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इससे संक्रमण की आशंका को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।
रोज 40 सीजेरियन, सिर्फ 5 सेट
एमसीएच में सिजेरियन ऑपरेशन के लिए नियमित इस्तेमाल के केवल पांच सर्जिकल सेट हैं। इमरजेंसी के लिए अलग से तीन सेट उपलब्ध हैं। लेकिन यहां रोजाना 30 से 40 सीजेरियन ऑपरेशन हो रहे हैं। हर सर्जिकल सेट को दोबारा इस्तेमाल से पहले स्टरलाइजेशन प्रक्रिया से गुजरना जरूरी होता है।
इस प्रक्रिया में कम से कम तीन घंटे लगते हैं। लेकिन ऑपरेशन की संख्या क्षमता से कहीं ज्यादा है। इसी वजह से संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ रहा है। यही कारण अब जांच का मुख्य केंद्र बन गया है।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष
अस्पताल प्रशासन ने किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार किया है। प्रशासन का कहना है कि अधिकतर मरीज पहले से गंभीर स्थिति में रेफर होकर आते हैं। मौतों की वजह पल्मोनरी एम्बोलिज्म, गंभीर एनीमिया, सीजर और एक्लेम्पसिया जैसी जटिलताएं बताई गई हैं। यह सभी प्रसव से जुड़ी चिकित्सकीय जटिलताएं हैं।
बांसवाड़ा में भी दो मौतें
बांसवाड़ा के सरकारी अस्पताल में भी शुक्रवार सुबह दो प्रसूताओं की मौत हुई। यह घटना महज दो घंटे के भीतर हुई। दोनों महिलाओं ने पहली बार संतान को जन्म दिया था। सवनिया निवासी लक्ष्मी की मौत गंभीर एनीमिया से हुई, जबकि कानेला निवासी लीला की मौत रक्तचाप बढ़ने से हुई।
अस्पताल प्रशासन ने जांच के लिए पांच डॉक्टरों की टीम बनाई है। पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में इस्तेमाल हुए तीन इंजेक्शनों के सैंपल भी लिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह सामने आ सकेगी।
कोटा-बीकानेर की पुरानी घटनाएं
राजस्थान में प्रसूता मौतों की यह पहली घटना नहीं है। मई में कोटा में पांच प्रसूताओं की मौत हुई थी। जून में बीकानेर में सिजेरियन के बाद छह प्रसूताओं की किडनी फेल हो गई थी। इनमें से दो महिलाओं की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। यह पूरा सिलसिला अब राज्य के स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
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