अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को दिखाया ठेंगा, अरावली क्षेत्र में दे दी खनन लीज
News In Short
- भीलवाड़ा में खनन माफियाओं और अधिकारियों की मिलीभगत का मामला सामने आया।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद अरावली और पॉलीगोन क्षेत्र में खनन जारी रहा।
- खनन लीज का फर्जी ट्रांसफर करने का खुलासा, अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग।
- सुप्रीम कोर्ट ने अरावली और पॉलीगोन क्षेत्र में खनन पर रोक लगाई थी, लेकिन नियमों का उल्लंघन किया गया।
- विभाग ने गलत जानकारी दी और विधानसभा को गुमराह किया, जांच की जाएगी।
News In Detail
भीलवाड़ा के एक बड़े मामले में खनन माफिया और अधिकारियों की मिलीभगत का खुलासा हुआ है। अधिकारियों ने उच्चतम न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की, और न केवल खान निदेशालय बल्कि विधानसभा को भी गलत जानकारी दी। सुप्रीम कोर्ट ने अरावली हिल्स और पॉलीगोन क्षेत्र में खनन पर रोक लगाई थी, लेकिन अधिकारियों ने मिलकर एक विवादित लीज का एग्रीमेंट कर दिया।
उच्चतम न्यायालय की अवहेलना
इस मामले में सबसे बड़ी बात यह है कि लीज किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर कर दी गई। इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ उस समय हुआ, जब ट्रांसफर के बाद नए एग्रीमेंट की फाइल चली। यह लीज पॉलीगोन क्षेत्र में आती है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अधिकारियों ने खनन गतिविधियां जारी रखी।
ड्राफ्टमैन ने खोला राज
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद, 25 जुलाई 2025 को खान निदेशालय ने रिछी का बाड़िया स्थित ग्रेनाइट लीज को दूसरे व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर कर दिया। जब एग्रीमेंट की प्रक्रिया शुरू हुई, तो ड्राफ्टमैन ने नोटिंग डाली कि खनन पट्टा अरावली हिल्स के पॉलीगोन में आता है। इसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया।
नियमों का उल्लंघन और लीज की स्वीकृति
ग्रेनाइट लीज की स्वीकृति से लेकर ट्रांसफर तक सभी कदमों में नियमों का उल्लंघन किया गया। खान निदेशालय ने 29 जनवरी 2024 को लीज स्वीकृत की थी, जिसमें शर्त थी कि 3 महीने के भीतर संविदा निष्पादन करना होगा। लेकिन, अप्रैल 2024 में यह अवधि खत्म हो गई, और इसकी मियाद को बढ़ाया नहीं गया।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2024 को अरावली और पॉलीगोन क्षेत्र में खनन पर रोक लगाई थी, लेकिन विभाग ने कोर्ट के आदेश को दरकिनार करते हुए 14 मई 2024 को पर्यावरणीय स्वीकृति (ईसी) जारी की। इसके बाद, 7 जून 2024 को बिना मियाद बढ़ाए एग्रीमेंट किया गया और 13 जून 2024 को रजिस्ट्री हुई।
विधानसभा को गलत जानकारी दी गई
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, जब भी राजस्थान विधानसभा और खान निदेशालय से अरावली और पॉलीगोन मामलों की जानकारी मांगी गई, तो अधिकारियों ने शून्य रिपोर्ट भेज कर सभी को गुमराह किया। वे दावा करते रहे कि जिले में ऐसा कोई मामला नहीं है, जबकि खनन कार्य किसी और द्वारा किया जा रहा था।
मामले की जांच की जाएगी
ओपी काबरा, अधीक्षण खनिज अभियंता, भीलवाड़ा ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पॉलीगोन में लीज एग्रीमेंट हुआ है, तो इस मामले की जांच करवाई जाएगी। अगर यह गलत पाया गया, तो खनन कार्य को तुरंत बंद कर दिया जाएगा।
ये भी पढे़:-
असफलता ने दिखाई सफलता की राह, आईएएस डॉ. रविंद्र गोस्वामी आज हैं युवाओं के लिए प्रेरणा
विधायक से मारपीट मामले का मामला उलझा, अब इंजीनियर ने एमएलए पर लगाए ये आरोप