आईएएस शिखर अग्रवाल के खिलाफ एसीबी करेगी जांच, सरकार ने दी 17-ए जांच की मंजूरी
आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल के खिलाफ ACB ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर की रात करीब 9:30 बजे प्रेस नोट जारी कर इस कार्रवाई की जानकारी दी। इससे पहले ACB के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास से मुलाकात की थी। मुख्य सचिव ने सोशल मीडिया पर मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति और उसके पालन पर चर्चा का जिक्र किया था। इसके कुछ घंटे बाद ही ACB की कार्रवाई सामने आई।
पद के दुरुपयोग और कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप
ACB के मुताबिक, शिखर अग्रवाल पर निजी कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों के साथ कथित मिलीभगत करने का आरोप है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि उन्होंने अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर खुद और कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया। इससे राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान होने की बात भी सामने आई है।
ACB के डीजी गोविंद गुप्ता ने बताया कि 27 अक्टूबर को प्रकाशित खबर, उद्योग विभाग से मिली तथ्यात्मक रिपोर्ट और गोपनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी का परीक्षण किया गया। शुरुआती तथ्यों के आधार पर PE दर्ज कर विस्तृत जांच का फैसला लिया गया है।
उदयपुर से अलवर तक 40 विला-कॉटेज की खरीद
ACB के अनुसार, अग्रवाल ने उदयपुर के बुझड़ा स्थित अनंता रिसॉर्ट और अलवर के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में अपने और परिजनों के नाम पर संपत्तियां खरीदीं। आरोप है कि ये संपत्तियां बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर खरीदी गईं।
उदयपुर के बुझड़ा रिसॉर्ट में शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी के नाम पर 10-10 कॉटेज खरीदे गए। प्रत्येक की कीमत करीब 15 लाख रुपए बताई गई है।
वहीं, अलवर के अजबगढ़ रिसॉर्ट में अग्रवाल और उनकी पत्नी के नाम पर 8-8 विला खरीदे गए। दोनों बेटों के नाम पर 4 और सास-ससुर के नाम पर भी 4 विला खरीदे जाने की जानकारी दी गई है। इनकी कीमत करीब 15 से 16.5 लाख रुपए प्रति विला बताई गई है।
इस तरह दोनों स्थानों पर कुल 40 संपत्तियों की खरीद का मामला जांच के दायरे में है।
जिस दिन विला की रजिस्ट्री, उसी दिन कंपनी को पैकेज
इस मामले में 27 मार्च 2026 की तारीख भी जांच का अहम हिस्सा है। ACB के मुताबिक, इसी दिन वित्त विभाग ने गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को विशेष रियायती आर्थिक पैकेज जारी किया था। इसी तारीख को अजबगढ़ रिसॉर्ट में 20 विला की रजिस्ट्री भी करवाई गई थी।
ACB अब यह जांच करेगी कि कंपनी को दिए गए आर्थिक पैकेज और अग्रवाल के परिवार की ओर से की गई संपत्ति खरीद के बीच कोई संबंध था या नहीं। एजेंसी यह भी पता लगाएगी कि कंपनी को रिसॉर्ट निर्माण की शर्तों में छूट और जरूरी प्रमाणपत्रों की जांच के बिना स्वीकृतियां देने के आरोपों में कितनी सच्चाई है।
आय से अधिक संपत्ति की भी होगी जांच
ACB का कहना है कि प्रारंभिक तथ्यों से अग्रवाल और उनके परिजनों के नाम पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित किए जाने की आशंका भी सामने आई है। इसलिए संपत्तियों की खरीद, भुगतान के स्रोत, बाजार मूल्य और संबंधित वित्तीय लेनदेन की जांच की जाएगी।
मामले में सिर्फ शिखर अग्रवाल ही नहीं, बल्कि गोयल फैशंस के निदेशकों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका भी जांची जाएगी।
कंपनी ने आरोपों से किया इनकार
दूसरी ओर, गोयल फैशंस के एमडी संजय गोयल ने मीडिया से बातचीत में दावा किया है कि सभी विला और कॉटेज बाजार दर पर बेचे गए। उन्होंने कंपनी को अनुचित सरकारी लाभ मिलने के आरोपों से भी इनकार किया है। अब ACB की जांच में कंपनी के इस दावे और सरकारी रियायतों से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल होगी।
फिलहाल ACB ने प्रारंभिक जांच दर्ज की है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों के समर्थन में कितने तथ्य और सबूत सामने आते हैं।