IAS शिखर अग्रवाल सभी पदों से हटाए गए: IPS पत्नी संग खरीदे 40 विला-कॉटेज, बेचने वाली कंपनी को ही लीज पर दी प्रॉपर्टी
खुलासे में सामने आया कि शिखर अग्रवाल, उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर, उनके दोनों बेटों और सास-ससुर ने गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से ये संपत्तियां खरीदी थीं। परिवार ने अलवर के अजबगढ़ में 20 विला और उदयपुर के बुझड़ा में 20 कॉटेज खरीदे थे। इन संपत्तियों की कीमत 6 करोड़ रुपए से भी अधिक है।
प्रॉपर्टी को दी 1.80 करोड़ रुपए की लीज पर
इस सौदे में सबसे बड़ी बात यह रही कि प्रॉपर्टी को खरीदने के बाद उसी कंपनी को लीज पर दे दी गई, जिससे यह प्रॉपर्टी खरीदी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, उदयपुर के बुझड़ा स्थित 20 कॉटेज चार लाख रुपये प्रति कॉटेज सालाना किराये पर दिए गए। वहीं, अलवर के अजबगढ़ स्थित 20 विला का सालाना किराया पांच लाख रुपये प्रति विला तय हुआ।
इस हिसाब से अग्रवाल परिवार को हर साल करीब 1 करोड़ 80 लाख रुपये की लीज से इनकम मिली। यानी दोनों जगह की प्रॉपर्टी से मिलने वाला सालाना किराया काफी बड़ा है।
सितंबर 2023 और मार्च 2026 में हुई रजिस्ट्रियां
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उदयपुर के बुझड़ा में 20 कॉटेज की रजिस्ट्री सितंबर 2023 में हुई थी। इसके बाद अलवर के अजबगढ़ में 20 विला की रजिस्ट्री मार्च 2026 में कराई गई। दोनों जगह संपत्तियां अनंता रिसॉर्ट से जुड़ी है।
इन संपत्तियों को बेचने वाली कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड है। कंपनी देश के अलग-अलग हिस्सों में अनंता ब्रांड के तहत होटल और रिसॉर्ट संचालित करती है।
प्रॉपर्टी रिटर्न को लेकर भी सवाल
इस पूरे मामले में अधिकारियों के सालाना अचल संपत्ति विवरण यानी इम्मूवेबल प्रॉपर्टी रिटर्न (IPR) को लेकर भी सवाल उठे हैं। मीडिया रिपोर्ट में संपत्तियों की खरीद और घोषित विवरण के बीच अंतर है।
शिखर अग्रवाल ने कहा है कि उन्होंने संपत्तियों का पूरा ब्योरा प्रॉपर्टी रिटर्न में दिया है, लेकिन विभाग के रिकॉर्ड में जानकारी अपडेट नहीं हुई। दूसरी ओर, उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर के संपत्ति विवरण को लेकर भी कई सवाल है।
कई अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे
एपीओ होने से पहले शिखर अग्रवाल राजस्थान सरकार में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर थे। उनके पास उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, सरकारी उपक्रम, दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर और निवेश संवर्धन से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी थी। वे रीको के अध्यक्ष और निवेश संवर्धन ब्यूरो, राजस्थान के अध्यक्ष भी थे।
उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर राजस्थान पुलिस में अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) हैं। वे योजना, आधुनिकीकरण और कल्याण से जुड़े काम देख रही हैं।
क्या होता है एपीओ
एपीओ का अर्थ है कि अधिकारी को फिलहाल नियमित तैनाती से हटाकर प्रतीक्षा में रखा गया है। यह अपने आप में दोष सिद्ध होने का फैसला नहीं है। अब इस मामले में संपत्ति खरीद, लीज व्यवस्था और IPR (Intellectual Property Right) में दर्ज जानकारी को लेकर उठे सवालों पर आगे की आधिकारिक कार्रवाई और स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण होंगे।