पंचायत चुनाव से पहले BAP को झटका: डूंगरपुर के 39 कार्यकर्ता भाजपा में शामिल, मदन राठौड़ ने दिलाई सदस्यता
राजस्थान में पंचायती राज चुनाव से पहले आदिवासी इलाके डूंगरपुर से भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के 39 कार्यकर्ता भाजपा में शामिल हो गए। इनमें गलियाकोट ब्लॉक प्रभारी सुखलाल मकवाना भी शामिल हैं। वे सागवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले हैं। मंगलवार को जयपुर स्थित भाजपा कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने सभी को पार्टी की सदस्यता दिलाई।
राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में डूंगरपुर और सागवाड़ा में BAP अपना बोर्ड नहीं बना पाई थी। अब पंचायत चुनाव से ठीक पहले उसके कार्यकर्ताओं का भाजपा में जाना स्थानीय राजनीति में नया घटनाक्रम है।
गलियाकोट ब्लॉक प्रभारी ने छोड़ी BAP
भाजपा के मुताबिक सुखलाल मकवाना समेत 39 कार्यकर्ता पार्टी में शामिल हुए। इस मौके पर डूंगरपुर भाजपा के जिला महामंत्री पंकज जैन और एसटी मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य बलवीर आहरी भी मौजूद थे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने नए कार्यकर्ताओं को भाजपा का दुपट्टा पहनाया और मिठाई खिलाकर उनका स्वागत किया।
राठौड़ ने कहा कि अलग-अलग पार्टियों के कार्यकर्ता भाजपा से जुड़ रहे। उन्होंने नए कार्यकर्ताओं से संगठन के लिए काम करने और लोगों के बीच जाने की बात कही।
राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले क्यों अहम है घटनाक्रम?
राजस्थान में पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। चार चरणों में वोटिंग होगी। ऐसे में डूंगरपुर में BAP के ब्लॉक प्रभारी समेत 39 कार्यकर्ताओं का भाजपा में जाना सियासी तौर पर अहम है। डूंगरपुर BAP की मजबूत मौजूदगी वाले इलाकों में शामिल है। पार्टी के यहां दो विधायक भी हैं।
पंचायत चुनाव में गांव और ब्लॉक स्तर के कार्यकर्ता अहम भूमिका निभाते हैं। टिकट के दावेदारों से लेकर चुनाव प्रचार और वोटरों तक पहुंच बनाने में स्थानीय संगठन काम आता है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले BAP के कार्यकर्ताओं का भाजपा में जाना दोनों दलों के स्थानीय संगठन के लिहाज से अहम है।
डूंगरपुर में BAP की मजबूत राजनीतिक मौजूदगी
डूंगरपुर में भारत आदिवासी पार्टी (Bharat Adivasi Party) की मौजूदगी सिर्फ संगठन तक सीमित नहीं है। राजस्थान विधानसभा में पार्टी के चार विधायक हैं। इनमें दो डूंगरपुर जिले से हैं। आसपुर से उमेश मीणा और चौरासी से अनिल कुमार कटारा BAP के विधायक हैं। इसके अलावा धरियावद से थावरचंद और बागीदौरा से जयकृष्ण पटेल पार्टी के विधायक हैं।
लोकसभा में भी BAP का एक सांसद है। बांसवाड़ा लोकसभा सीट से राजकुमार रोत पार्टी के सांसद हैं। इससे साफ है कि दक्षिण राजस्थान के आदिवासी इलाके में पार्टी की राजनीतिक मौजूदगी है।
राजस्थान नगर निकाय चुनाव में BAP के 8 पार्षद जीते
हाल में हुए राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में BAP ने पूरे प्रदेश में सीमित सीटों पर चुनाव लड़ा था। पार्टी ने 15 निकायों के 99 वार्डों में उम्मीदवार उतारे थे। BAP के 8 पार्षद जीते थे। इनमें डूंगरपुर नगर परिषद में 3, सागवाड़ा नगर पालिका में 4 और सलूंबर नगर परिषद में एक पार्षद शामिल है। पार्टी किसी भी निकाय में अपना बोर्ड नहीं बना पाई।
डूंगरपुर नगर परिषद के 40 वार्डों में भाजपा ने 24 और कांग्रेस ने 12 सीटें जीतीं। BAP को 3 सीटें मिलीं और एक निर्दलीय जीता। वहीं सागवाड़ा नगर पालिका के 35 वार्डों में भाजपा ने 23 सीटें जीतीं। कांग्रेस को 8 और BAP को 4 सीटें मिलीं। दोनों जगह भाजपा को साफ बहुमत मिला।
2021 में BTP के खाते में आए थे 7 वार्ड
डूंगरपुर की शहरी राजनीति में BAP की मौजूदगी नई नहीं है। साल 2021 के नगर परिषद चुनाव में भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) ने 40 में से 7 वार्डों में जीत दर्ज की थी। बाद में BTP से जुड़े स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अलग होकर भारत आदिवासी पार्टी (BAP) बनाई। इसके बाद 2026 के निकाय चुनाव में BAP पहली बार अपने चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरी। पार्टी ने डूंगरपुर नगर परिषद और सागवाड़ा नगर पालिका में अपने उम्मीदवार खड़े किए।
आदिवासी इलाकों में निकाय चुनाव में भाजपा रही आगे
बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ आदिवासी राजनीति के लिहाज से अहम जिले हैं। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में BAP ने इस इलाके में अपनी जगह बनाई है। लेकिन हालिया शहरी निकाय चुनाव में पार्टी वैसा प्रदर्शन नहीं कर सकी।इन तीन आदिवासी बहुल जिलों के 9 नगरीय निकायों में भाजपा ने 7 में बोर्ड बनाया। BAP किसी भी जगह बोर्ड नहीं बना सकी।
यही वजह है कि अब नजर पंचायत चुनाव पर है। शहरी निकाय चुनाव और पंचायत चुनाव की राजनीति अलग होती है। BAP की राजनीतिक ताकत का बड़ा हिस्सा आदिवासी और ग्रामीण इलाकों से जुड़ा है। ऐसे में पंचायत चुनाव उसके लिए अहम होंगे।
इसी बीच डूंगरपुर के गलियाकोट ब्लॉक प्रभारी समेत 39 कार्यकर्ताओं का भाजपा में जाना सामने आया है। भाजपा इसे अपने संगठन को मजबूत करने के तौर पर देख रही है। वहीं पंचायत चुनाव में इसका कितना असर होगा, इसका पता उम्मीदवारों के मैदान में उतरने और मतदान के बाद ही चलेगा।