बहुमत के बाद भी कांग्रेस में घमासान, बीकानेर मेयर के लिए डागा ने ठोकी ताल
समझें क्या है पूरा मामला
- बीकानेर में बहुमत के बावजूद कांग्रेस में बगावत।
- कांग्रेस ने अनिल कल्ला को बनाया महापौर प्रत्याशी।
- नवरतन डागा ने निर्दलीय नामांकन दाखिल किया।
- भाजपा से सुरेंद्र सिंह शेखावत चुनाव मैदान में।
- बीडी कल्ला को डागा की वापसी की उम्मीद।
राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के नतीजों के बाद अब मेयर की कुर्सी को लेकर जोर-आजमाइश शुरू हो गई है। कहीं बहुमत जुटाने के लिए निर्दलीयों को साधा जा रहा है तो कहीं पार्टी के अंदर ही दावेदारी ने मुश्किल बढ़ा दी है। बीकानेर में कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत है, लेकिन यहां मेयर प्रत्याशी के नाम पर पार्टी में बगावत हो गई। कांग्रेस ने अनिल कल्ला को मैदान में उतारा तो नवरतन डागा ने निर्दलीय नामांकन भरकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया।
28 पार्षदों की राय के बाद अनिल कल्ला का नाम
कांग्रेस ने बुधवार को अपने जीते हुए पार्षदों की राय लेने के बाद वार्ड नंबर 73 से पार्षद चुने गए अनिल कल्ला को मेयर पद का उम्मीदवार घोषित किया। बताया जा रहा है कि 28 पार्षदों ने उनके नाम पर सहमति जताई थी।
अनिल कल्ला पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. बीडी कल्ला के भतीजे हैं। उनके नाम की घोषणा होते ही मेयर पद की दावेदारी कर रहे नवरतन डागा ने बगावत का रास्ता चुन लिया और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल कर दिया।
कल्ला परिवार को बार-बार मौका देने से नाराज डागा
नवरतन डागा भी कांग्रेस की तरफ से मेयर पद की दौड़ में शामिल थे। अनिल कल्ला के नाम पर मुहर लगने के बाद उन्होंने पार्टी के फैसले के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला किया। बताया जा रहा है कि डागा की नाराजगी की एक बड़ी वजह कल्ला परिवार को बार-बार मौका मिलना है।
डागा का नाम निकाय चुनाव के टिकट वितरण के दौरान भी चर्चा में रहा था। उन्हें कांग्रेस का टिकट मिलने के बाद टिकट नहीं मिलने से नाराज कुछ लोगों ने कांग्रेस शहर अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल के साथ मारपीट की थी।
मेयर की कुर्सी के लिए तीन चेहरे मैदान में
बीकानेर नगर निगम में फिलहाल मेयर पद के लिए तीन चेहरे मैदान में हैं। कांग्रेस की ओर से अनिल कल्ला और भाजपा की तरफ से सुरेंद्र सिंह शेखावत ने एक-एक नामांकन दाखिल किया है।
नवरतन डागा ने दो नामांकन जमा किए हैं। इनमें एक कांग्रेस और दूसरा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में है। कांग्रेस पहले ही अनिल कल्ला को अधिकृत उम्मीदवार बना चुकी है, ऐसे में डागा का कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर भरा गया नामांकन खारिज होने की संभावना है।
बीडी कल्ला बोले- नामांकन वापस लेंगे डागा
नवरतन डागा की बगावत पर पूर्व मंत्री डॉ. बीडी कल्ला ने कहा कि पार्षदों की राय के बाद ही अनिल कल्ला को मेयर पद का टिकट दिया गया है। उन्होंने डागा से पार्टी अनुशासन का पालन करने की बात कही है।
बीडी कल्ला को उम्मीद है कि डागा ने भले ही अभी निर्दलीय नामांकन दाखिल किया हो, लेकिन वह इसे वापस ले लेंगे। ऐसे में नामांकन वापसी तक कांग्रेस की नजर डागा के अगले कदम पर रहेगी।
शहर अध्यक्ष मेघवाल के करीबी माने जाते हैं डागा
इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस शहर अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल की भूमिका भी चर्चा में है। अनिल कल्ला के नामांकन के दौरान मेघवाल मौजूद नहीं थे। दूसरी तरफ नवरतन डागा को मेघवाल का करीबी माना जाता है। ऐसे में मेयर प्रत्याशी को लेकर सामने आई बगावत ने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को भी सामने ला दिया है।
80 में से 42 वार्ड कांग्रेस के पास
बीकानेर की लड़ाई इसलिए भी अहम है क्योंकि राजस्थान में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत वाला नगर निगम यहीं मिला है। बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों में कांग्रेस ने 42 सीटें जीती हैं। भाजपा के खाते में 27 सीटें गईं, जबकि 10 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं।
आंकड़ों के लिहाज से कांग्रेस के पास अपना मेयर बनाने के लिए पर्याप्त संख्या है। इसके बावजूद नवरतन डागा के निर्दलीय मैदान में उतरने से पार्टी के सामने अब अपने पार्षदों को एकजुट रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।
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