2020 के 14 वादे फिर सामने: राजस्थान निकाय चुनाव 2026 में BJP ने क्या बदला?
राघवेंद्र राठौड़ @ जयपुर
राजस्थान में नगर निकाय चुनाव से पहले बीजेपी ने ‘नगरीय विकास संकल्प पत्र 2026’ जारी किया है। इसमें कचरा मुक्त शहर, बेहतर सीवरेज, ई-बस, CCTV, AI आधारित निगरानी और स्ट्रीट लाइट जैसे कई बड़े वादे किए गए हैं।
पार्टी इसे प्रदेश के 309 नगरीय निकायों के लिए अगले पांच साल का रोडमैप बता रही। लेकिन 'द सूत्र' ने 2026 के संकल्प पत्र की तुलना 2020 के नगर निगम चुनाव के दौरान बीजेपी की ओर से जारी 40 बिंदुओं वाले विजन डॉक्यूमेंट से की तो दिलचस्प तस्वीर सामने आई।
6 साल पहले भी सीवरेज-जलभराव, कचरा प्रबंधन, ई-बस, CCTV और स्ट्रीट लाइट जैसे मुद्दे चुनावी वादों में थे। अब 2026 में इनमें से कई मुद्दे फिर संकल्प-पत्र का हिस्सा हैं। फर्क यह है कि इस बार कहीं लक्ष्य बड़ा कर दिया गया है तो कहीं AI, व्हीकल ट्रैकिंग और रोबोटिक मशीन जैसी नई तकनीक जोड़ दी गई।
पिछले पांच साल में जयपुर में सड़कों पर 1520 करोड़, कचरा परिवहन पर 1080 करोड़, पार्कों पर करीब 100 करोड़, नाला-सफाई पर 60 करोड़, और स्ट्रीट लाइट पर करीब 35 करोड़ रुपए खर्च किए गए।
इसके बावजूद नगर निगम की अगर बात करें तो बीते कुछ महीनों में ही सीवरेज से जुड़ी 2280, सफाई की 2 हजार से अधिक, सड़क-नाली की करीब 1900 और निराश्रित पशुओं से जुड़ी 650 से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं।
ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि नगरीय निकाय चुनाव 2026 को लेकर बीजेपी ने क्या नया वादा किया है। सवाल यह भी है कि 2020 में जिन समस्याओं के समाधान का संकल्प लिया गया था और पिछले पांच सालों में जिन पर करोड़ों रुपए खर्च हुए, उनमें से कई समस्याएं 2026 में फिर चुनावी प्राथमिकता क्यों बनी हुईं?
2020 के 14 वादे 2026 में फिर लौटे?
2020 में मास्टर ड्रेनेज प्लान, अब 3000 किमी का सीवर नेटवर्क
भाजपा के 2020 और 2026 के दोनों संकल्प-पत्रों में सबसे मजबूत समानता सीवरेज और जलभराव को लेकर दिखाई देती है। 2020 के विजन डॉक्यूमेंट के पॉइंट नंबर 14 में जलभराव और सीवरेज की समस्या से शहर को बचाने के लिए मास्टर ड्रेनेज प्लान बनाने का वादा किया गया था।
अब 2026 में सीवरेज फिर प्रमुख वादों में है। बीजेपी ने अगले पांच सालों में यानी 2026 से 2031 तक 3 हजार किलोमीटर पुरानी सीवर लाइनों की मरम्मत और विस्तार का लक्ष्य रखा है। जरूरत वाले नगरीय निकायों में फेज वाइज सीवरेज व्यवस्था और जलभराव की समस्या का समाधान करने की बात भी कही है। साथ ही सीवर और मैनहोल की सफाई के लिए रोबोटिक थ्री-इन-वन मशीनों के इस्तेमाल का वादा है।
पिछले पांच साल में जयपुर में नगर निगम ने नाला-सफाई पर 60 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए। इसके बावजूद सीवर से जुड़ी 2280 और सड़क-नाली से जुड़ी 1943 शिकायतें सामने आने आई है। यानी 2020 में मास्टर ड्रेनेज प्लान का वादा था, 2026 में 3,000 किलोमीटर सीवर लाइन का लक्ष्य है। बीच में करोड़ों रुपए खर्च भी हुए, लेकिन सीवर और नाली से जुड़ी शिकायतों का आंकड़ा सवाल खड़ा करता है।
कचरे पर 1080 करोड़ से ज्यादा खर्च, अब 100% निस्तारण का वादा
कचरा और सफाई दूसरा बड़ा मुद्दा है, जो भाजपा के दोनों संकल्प पत्र में मौजूद है। 2020 के विजन डॉक्यूमेंट में ई-वेस्ट के नियमानुसार निस्तारण और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के काम में तेजी लाने की बात थी। घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था को मजबूत करने और सफाई कर्मचारियों को जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने का भी वादा किया गया था।
6 साल बाद 2026 के संकल्प-पत्र में सभी डंपिंग साइट्स पर सालों से जमा पुराने कचरे का 100 फीसदी वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने का लक्ष्य रखा गया। घर-घर कचरा उठाने वाली गाड़ियों में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम लगाने की बात भी कही गई। 5 साल में कचरा परिवहन पर 1080 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए गए।
इसके बाद भी सफाई से जुड़ी 2 हजार से ज्यादा शिकायतें 2026 के कुछ महीनों में ही दर्ज होने की बात सामने आई है। पांच साल में एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होने के बाद भी कचरा प्रबंधन 2026 के संकल्प-पत्र में बड़े समाधान के साथ फिर मौजूद है।
ई-बस का वादा 2020 में भी, 2026 में भी
2020 के विजन डॉक्यूमेंट के पॉइंट नंबर 6 में नगरीय बस सेवाओं के किराए में कमी और केंद्र की योजना के जरिए ई-बसों के संचालन का वादा किया गया था। इसके साथ सीनियर सिटीजन्स का को मुफ्त और महिलाओं को रियायती यात्रा देने की बात भी कही गई थी।
अब 2026 के संकल्प-पत्र में एक बार फिर सभी नगर निगम क्षेत्रों में सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन के लिए ई-बसों के माध्यम से व्यवस्था शुरू करने की बात है। इसमें भी महिलाओं और सीनियर सिटीजन्स का विशेष ध्यान रखने का जिक्र है। यानी छह साल बाद भी फॉर्मूला लगभग वही दिखाई देता है अभी जयपुर में केवल 45 ई-बस संचालित हैं
2020 में CCTV, अब एआई कैमरों की हुई एंट्री
शहर की सुरक्षा का मुद्दा सालों से बना हुआ है, जो इस बार के संकल्प पत्र में भी लौटा है, लेकिन अब बात सीसीटीवी से बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक पहुंच गई है। 2020 के विजन डॉक्यूमेंट में शहर के प्रमुख स्थानों पर CCTV कैमरे लगाकर नागरिकों की सुरक्षा पक्की करने और अपराध पर नियंत्रण की बात कही गई थी। स्मार्ट सिटी और हेरिटेज सिटी के कार्यों को आगे बढ़ाने का भी संकल्प था।
2026 के संकल्प पत्र में भाजपा ने हर नगरीय निकाय में सुरक्षा, अपराध नियंत्रण और निगरानी के लिए फिर सीसीटीवी कैमरे लगाने का वादा किया है। लेकिन इस बार इसमें नया लेयर जोड़ा गया। बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट और सुरक्षा के लिए अभय कमांड सेंटरों को आर्टिफिशल इंटेलिजेंस से जोड़ने की बात कही गई है।
तब स्ट्रीट लाइट 12 घंटे में ठीक करने का वादा, अब बड़ा लक्ष्य
स्ट्रीट लाइट को लेकर 2020 और 2026 दोनों संकल्प पत्रों की तुलना भी दिलचस्प है। 2020 के विजन डॉक्यूमेंट के पॉइंट नंबर 33 में जिन कॉलोनियों में स्ट्रीट लाइट नहीं थीं, वहां लाइट लगाने और खराब होने पर 12 घंटे के भीतर ठीक कराने का वादा किया गया था।
2026 के संकल्प-पत्र में नए और बाहरी रिहायशी इलाकों में बड़े स्तर पर स्ट्रीट लाइट लगाने और हर वार्ड तक LED लाइट की व्यवस्था पहुंचाने का वादा किया गया है। स्ट्रीट लाइट पर करीब 35 करोड़ रुपए खर्च हुए। इसके बावजूद स्ट्रीट लाइट शहर की प्रमुख समस्याओं की सूची में बनी हुई है। इसलिए सवाल है 2020 में फोकस खराब लाइट को 12 घंटे में ठीक करने पर था, तो 6 साल बाद फिर बड़े स्तर पर नई लाइट लगाने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
जयपुर में बीते पांच साल में साफ-सफाई, सीवरेज, सड़क और नाली पर करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन जमीनी शिकायतें बताती हैं कि बुनियादी समस्याएं पूरी तरह खत्म नहीं हुईं। 2020 में जिन समाधान के वादों के साथ शहर का रोडमैप तैयार हुआ था, उनमें से कई 2026 के संकल्प-पत्र में नए लक्ष्य और नई तकनीक के साथ फिर सामने हैं।
मास्टर ड्रेनेज प्लान अब 3,000 किमी सीवर लाइन के लक्ष्य में बदल गया, CCTV से AI सर्विलांस तक बात पहुंची, कचरा प्रबंधन में व्हीकल ट्रैकिंग जुड़ी और स्ट्रीट लाइट के लिए बड़े पैमाने पर नई LED लगाने का संकल्प लिया गया। यानी पांच साल में पैसा खर्च हुआ, लक्ष्य और तकनीक दोनों बदले, लेकिन जयपुर के कई बुनियादी सवाल आज भी जस के तस हैं। अब 2026 के निकाय चुनाव में असली सवाल यही है कि पिछले 5 साल के खर्च का असर शहर की जमीन पर कितना दिखा और नए वादों पर जनता कितना भरोसा करेगी।
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