उदयपुर फाइल्स: एआई वीडियो के आरोपों पर चार्जशीट ने बढ़ाई उलझन, नहीं मिला कोई जिक्र
News In Short
- चर्चित उदयपुर फाइल्स मामले में नए खुलासे सामने आए।
- एआई वीडियो के आरोपों पर चार्जशीट में कोई जिक्र नहीं।
- एफआईआर के 44 दिन बाद कोर्ट में चार्जशीट पेश।
- चार्जशीट में 80 दस्तावेज और 12 गवाहों की सूची पेश की।
- पुलिस जांच में उजागर कि स्पाई कैमरे से की गई रिकॉर्डिंग।
News In Detail
Udaipur: राजस्थान के चर्चित उदयपुर फाइल्स मामले में नया खुलासा हुआ है। भाजपा महिला नेता से जुड़े वीडियो, ब्लैकमेलिंग और दुष्कर्म के इस मामले में कोर्ट में पेश चार्जशीट ने कई पुराने दावों पर सवाल खड़ा कर दिए हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि अब तक जिस एआई जनित वीडियो के जरिए ब्लैकमेल करने की बात कही जा रही थी, पुलिस की चार्जशीट में उसका कहीं कोई उल्लेख नहीं मिला है।
चार्जशीट में एआई वीडियो का जिक्र गायब
इस हाईप्रोफाइल मामले की जांच कर रही भूपालपुरा थाना पुलिस ने एफआईआर के 44 दिन बाद एसीजेएम-4 कोर्ट में चार्जशीट पेश की है। चार्जशीट में पुलिस ने 80 अहम दस्तावेज और 12 गवाहों की सूची पेश की है, जिसमें डीएसपी गोपाल चंदेल का नाम भी शामिल है।
शुरुआत में आरोपी वकील विशाल गुर्जर पर यह आरोप लगाए गए थे कि उसने एआई तकनीक का इस्तेमाल कर फर्जी वीडियो बनाए। उनके माध्यम से भाजपा नेत्री को ब्लैकमेल किया। हालांकि, चार्जशीट के अनुसार बरामद किए गए वीडियो और साक्ष्यों में एआई के उपयोग का कोई तकनीकी प्रमाण दर्ज नहीं किया गया है, जिससे मामले की दिशा बदलती नजर आ रही है।
स्पाई कैमरे से की गई थी रिकॉर्डिंग
पुलिस जांच में यह साफ हुआ है कि रिकॉर्डिंग के लिए एआई नहीं, बल्कि स्पाई कैमरों का सहारा लिया गया था। आरोपी के ऑफिस में लगे इन स्पाई कैमरों से कई घटनाओं को रिकॉर्ड किया गया था। पुलिस ने उस व्यक्ति को भी इस मामले में गवाह बनाया है जिसने आरोपी को स्पाई कैमरा बेचा था।
मिला वीडियो का जखीरा
पुलिस ने आरोपी के मोबाइल, पेनड्राइव और मेमोरी कार्ड से भारी मात्रा में डेटा बरामद किया है। रिपोर्ट के अनुसार मेमोरी कार्ड और पेनड्राइव में 20 से अधिक मुख्य फोल्डर मिले हैं। इन फोल्डरों के भीतर तारीख के अनुसार व्यवस्थित कई सब-फोल्डर मौजूद हैं।
अनुमान है कि इन डिवाइस में तीन दर्जन से अधिक वीडियो क्लिप्स हो सकती हैं। इनमें से कई वीडियो में महिला आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रही है। हालांकि वीडियो में दिख रहे पुरुष की पहचान अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं की गई है।
साक्ष्य सुरक्षित, एफएसएल जांच का जिक्र
चार्जशीट के अनसार इस मामले से जुड़े सभी वीडियो और डिजिटल साक्ष्य पुलिस के पास पूरी तरह सुरक्षित हैं। इन्हें नष्ट नहीं किया गया है। पुलिस ने साक्ष्यों की एफएसएल जांच का भी उल्लेख किया है, जिसकी रिपोर्ट मामले के वैज्ञानिक आधार को और मजबूत करेगी।
क्या है उदयपुर फाइल्स का मामला
यह मामला तब सुर्खियों में आया, जब भाजपा की एक महिला नेता ने वकील विशाल गुर्जर पर दुष्कर्म और अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने के गंभीर आरोप लगाए। स्थानीय मीडिया में इसे उदयपुर फाइल्स का नाम दिया गया, क्योंकि इसमें कई प्रभावशाली लोगों के शामिल होने की चर्चाएं थीं। अब एआई वीडियो के दावों का चार्जशीट में न होना, बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के बीच कानूनी बहस का नया केंद्र बन सकता है।
ये भी पढे़:-
सरकारी स्कूल में पढ़े, सरकारी शिक्षक बने, फिर पहले ही प्रयास में बन गए आईएएस डॉ. जितेंद्र कुमार
सांसद से मांगे विधायकों के नंबर, मंत्री बनाने के नाम पर ठगने की कोशिश, फर्जी गृह सचिव गिरफ्तार
आरसीए में बैटिंग करेंगे नेताओं के लाड़ले, एडहॉक कमेटी में सभी 5 पदों पर 'सत्ता पुत्र' काबिज