आंखों की रोशनी गई तो ताने सुने, पर हार नहीं मानी; अब RAS में ब्लाइंड कैटेगरी में दूसरी रैंक की हासिल
News In Short
- अभिषेक कुल्हरी ने RAS 2024 में ब्लाइंड कैटेगरी में 2nd रैंक हासिल की।
- कोचिंग के स्टूडियो में दूसरे बच्चे नोट्स पढ़कर सुनाते और वह उन्हें याद करते।
- एक सड़क हादसे के बाद अभिषेक ने खो दी थी पानी आँखों की रोशनी।
- कोरोना काल में कंधा फ्रैक्चर हुआ, इसीलिए वेट लिफ्टिंग को छोड़ना पड़ा।
- आराम करने की सलाह से उनके जीवन में 'सिविल सर्विस' का विचार आया।
News In Detail
Churu: "तू अब हीरो से जीरो हो गया है, किस्मत के भरोसे बैठ जा, अब तेरा कुछ नहीं हो सकता"- ये वो चुभने वाले शब्द थे जो चूरू के राजगढ़ निवासी और आरएएस परीक्षा टॉपरअभिषेक कुल्हरी ने तब सुने जब एक सड़क हादसे ने उनकी दोनों आंखों की रोशनी छीन ली। लेकिन अभिषेक ने इन तानों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बनाया। आज अभिषेक ने आरएएस परीक्षा-2024 के परिणाम में ब्लाइंड कैटेगरी में प्रदेश भर में दूसरी रैंक (2210 जनरल रैंक) हासिल कर मिसाल पेश की है।
एक हादसा और बदल गई दुनिया
वर्ष 2018 में एक रॉन्ग साइड से आ रहे ऑटो ने अभिषेक की बाइक को टक्कर मार दी थी। ऑटो की लाइट के कांच आंखों में धंस गए, जिससे नसें डैमेज हो गईं। डॉक्टरों की लापरवाही और देरी से हुए इलाज के कारण अभिषेक ने अपनी आंखों की रोशनी पूरी तरह खो दी।
शुरुआत में हाथ पकड़कर चलने और घर में भी टकराने वाले अभिषेक ने हार नहीं मानी। उन्होंने मेडिटेशन संस्था जॉइन की और खुद को मानसिक रूप से संभाला।
मैदान से 'कलम' तक का सफर
अभिषेक ने पहले खेल के मैदान में खुद को साबित किया। पैरा ओलंपिक खिलाड़ी देवेंद्र झाझरिया से प्रेरित होकर उन्होंने 'शॉट पुट' शुरू किया। 2019 में राज्य स्तरीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शॉट पुट में गोल्ड और जैवलिन थ्रो में ब्रॉन्ज मेडल जीता। नेशनल के लिए सिलेक्ट हो गए।
लेकिन किस्मत को एक और झटका देना था। 2020 में कोरोना काल में घर पर वेट लिफ्टिंग करते समय रॉड फिसल गई और कंधे पर जा गिरी जिससे कंधा फ्रैक्चर हो गया और डॉक्टरों ने 3 साल आराम की सलाह दी। यहीं से उनके जीवन में 'सिविल सर्विस' का विचार आया।
दूसरों के नोट्स सुनकर की तैयारी
बिना आंखों के मुख्य परीक्षा की तैयारी करना सबसे बड़ी चुनौती थी, लेकिन अभिषेक के जुनून ने उस चुनौती को स्वीकारा। वह कोचिंग के स्टूडियो में बैठते थे, वहां दूसरे बच्चे उन्हें नोट्स पढ़कर सुनाते थे और वह उन्हें याद करते थे। समय बचाने के लिए वह ऑनलाइन वीडियो को दोगुनी रफ्तार पर सुनकर 14-15 घंटे पढ़ाई करते थे। उनके मकान मालिक भी उन्हें सुबह 6 से रात 11 बजे तक नोट्स पढ़कर सुनाने में मदद करते थे।
ताने देने वाले अब दे रहे हैं बधाई
2023 में मात्र 3 नंबर से चूकने वाले अभिषेक ने आरएएस भर्ती 2024में शानदार सफलता हासिल की और आरएएस अधिकारी बनने का अपना सपना पूरा किया। अभिषेक बताते हैं कि पहले जो लोग कहते थे कि मैं कुछ नहीं कर पाऊंगा, आज रात के 2-2 बजे तक उन्हीं के बधाई संदेश आ रहे हैं। जो लोग ताने देते थे, आज वही कह रहे हैं कि उन्हें मुझ पर पूरा भरोसा था।
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