वीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर जगमाल सिंह का निधन, ऊंटों पर सवार होकर पाकिस्तान में गाड़ा था तिरंगा, 1971 के युद्ध के थे महानायक

Jageshwar prasad | Apr 28, 2026, 20:03 IST
Photograph: (the sootr)
1971 के युद्ध में पाकिस्तान के भीतर 16 किमी घुसकर तिरंगा फहराने वाले वीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर जगमाल सिंह का निधन हो गया। ऊंटों पर सवार होकर दुश्मन की रानीहल चेकपोस्ट जीतने वाले इस महान योद्धा ने भारतीय सेना को सामरिक बढ़त दिलाई थी।

News In Short

  • 1971 युद्ध के हीरो ब्रिगेडियर जगमाल सिंह राठौड़ का 87 वर्ष की आयु में निधन।
  • ओलंपियन राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ के ताऊजी थे ब्रिगेडियर जगमाल सिंह।
  • बीकानेर सीमा से ऊंटों पर सवार होकर पाकिस्तान में 16 किमी अंदर तक खदेड़ा था दुश्मन को।
  • पाकिस्तान की रानीहल चेकपोस्ट पर कब्जा कर फहराया था भारत का परचम।
  • अदम्य साहस के लिए 1972 में तत्कालीन राष्ट्रपति ने वीर चक्र से किया था सम्मानित।

News In Detail

Bikaner: 1971 भारत-पाक युद्ध के वो जांबाज नायक, जिन्होंने ऊंटों पर सवार होकर रेगिस्तान की तपती रेत में दुश्मन को 16 किलोमीटर पीछे धकेल दिया था, अब हमारे बीच नहीं रहे। ब्रिग्रेडियर जगमाल सिंह राठौड़ (87) का मंगलवार को निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे, लेकिन देश सेवा का जज्बा उनके भीतर आखिरी सांस तक कायम रहा। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री और विधायक राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ के ताऊजी थे।



ब्रिगेडियर जगमाल सिंह सादुलगंज में अपनी बेटी कविता राठौड़ के साथ रह रहे थे। उनका अंतिम संस्कार बुधवार को बीकानेर के राजपूत शांति धाम में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।



जब 'गंगा जैसलमेर' ने रचा इतिहास

युद्ध के दौरान जगमाल सिंह ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट की 13वीं बटालियन (जिसे गंगा जैसलमेर कहा जाता है) में मेजर के पद पर तैनात थे। उन्हें राजस्थान सेक्टर के उस दुर्गम इलाके में जीत दर्ज करने की जिम्मेदारी मिली थी, जहां भारी मशीनगनों और मोर्टार से लैस पाकिस्तानी सेना ने मजबूत मोर्चाबंदी कर रखी थी।



युद्ध के मैदान से शौर्य की दास्तां

6 दिसंबर को जब हमला शुरू हुआ, तो दुश्मन की भारी गोलाबारी ने भारतीय टुकड़ी की रफ्तार रोक दी। ऐसे नाजुक वक्त में मेजर जगमाल सिंह ने रणनीति बदली और खुद एक प्लाटून का नेतृत्व करते हुए फायरिंग लाइन को चकमा देकर किनारे से हमला बोल दिया।



उनके इस अचानक हमले से पाकिस्तानी फौज संभल नहीं पाई और जान बचाकर भागने लगी। जगमाल सिंह ने सीमा पार कर पाकिस्तान के 16 किलोमीटर अंदर स्थित रानीहल चेकपोस्ट पर कब्जा किया और वहां शान से तिरंगा फहराया।



उस दौर में आज जैसे आधुनिक वाहन नहीं थे। जगमाल सिंह अपनी टीम के साथ बीकानेर की तरफ से ऊंटों पर सवार होकर पाकिस्तान में घुसे थे। संचार के लिए मोबाइल नहीं, बल्कि केवल रेडियो सिस्टम का सहारा था।



वीर चक्र से सम्मान

युद्ध के मैदान में दिखाए गए इसी असाधारण शौर्य और नेतृत्व के लिए उन्हें साल 1972 में वीर चक्र से नवाजा गया। उनके नेतृत्व ने राजस्थान के रेगिस्तानी मोर्चे पर भारतीय सेना को एक निर्णायक बढ़त दिलाई थी, जिसके कारण पाकिस्तानी सेना को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा।



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