बूंदी निकाय चुनाव में सजा राजनीतिक अखाड़ा, एक ही परिवार की महिलाएं आमने-सामने
समझें क्या है पूरा मामला
- बूंदी के नैनवां में दिलचस्प चुनावी मुकाबला।
- वार्ड 4 में आमने-सामने देवरानी और जेठानी।
- एक ही घर में सजा चुनावी अखाड़ा।
- नैनवां नगर पालिका चुनाव बना चर्चा का विषय।
- रिश्ते और राजनीति के बीच कांटे की टक्कर।
बूंदी जिले के नैनवां नगर पालिका के वार्ड नंबर 4 में इस बार चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया है। यहां मुकाबला किसी बाहरी से नहीं, बल्कि एक ही परिवार की देवरानी-जेठानी के बीच है।
कांग्रेस ने जेठानी मोनिका मारवाड़ा को टिकट दिया है। देवरानी नीतू मारवाड़ा भाजपा से टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं। वार्ड में 952 मतदाता इस मुकाबले का फैसला करेंगे। रिश्ते सामान्य हैं, लेकिन चुनाव में दोनों आमने-सामने हैं।
परिवार का रिश्ता, चुनाव की टक्कर
दोनों घर में सामान्य रूप से मिलती-जुलती हैं और उनके बीच किसी प्रकार का पारिवारिक विवाद नहीं है। परिवार का कहना है कि यह रिश्तों की नहीं, विचारधारा की लड़ाई है।
दोनों प्रत्याशी अपने-अपने समर्थकों के साथ मतदाताओं के घर पहुंच रही हैं। दोनों ग्रेजुएट हैं और विकास के एजेंडे पर वोट मांग रही हैं।
टिकट वितरण की कहानी
निर्दलीय प्रत्याशी नीतू मारवाड़ा ने भाजपा से टिकट मांगा था। उनके पति अंकित मारवाड़ा के अनुसार, परिवार लंबे समय से भाजपा की विचारधारा से जुड़ा है।
1990 से 1995 तक उनकी माता मुना देवी भाजपा के टिकट पर पार्षद रह चुकी हैं। लेकिन इस बार पार्टी ने किसी बाहरी व्यक्ति को मौका दिया। इसके बाद नीतू ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।
जेठानी कांग्रेस से मैदान में
कांग्रेस ने मोनिका मारवाड़ा को वार्ड-4 से प्रत्याशी बनाया है। मोनिका के पति विनोद मारवाड़ा लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े हैं।
मोनिका बीकॉम शिक्षित हैं और उनकी प्राथमिकता वार्ड और कस्बे के विकास की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने चयन प्रक्रिया के बाद उन्हें प्रत्याशी बनाया है।
त्रिकोणीय मुकाबला
कागजों पर मुकाबला त्रिकोणीय है, क्योंकि भाजपा ने यहां वैशाली को टिकट दिया है। लेकिन चर्चा में सिर्फ देवरानी-जेठानी हैं। वार्ड नंबर 4 में कुल 952 मतदाता हैं, जो इस अनोखे मुकाबले का फैसला करेंगे। 11 सितंबर को मतदान होना है।
नेताओं का जनसंपर्क
पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी और पूर्व मंत्री एवं मौजूदा कांग्रेस विधायक अशोक चांदना ने भी प्रचार तेज कर दिया है। दोनों दलों के नेता जनसभाओं और जनसंपर्क के जरिए अपने-अपने प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं। अब देखना है कि 952 वोटर किसके पक्ष में फैसला सुनाते हैं।
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