जल जीवन मिशन पर कैग रिपोर्ट: 7.07 करोड़ का संदिग्ध भुगतान, 50% लक्ष्य अधूरा
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में जल जीवन मिशन की धीमी चाल।
- CAG ने उजागर की वित्तीय व नीतिगत कमियां।
- राज्य राष्ट्रीय रैंकिंग में 30वें से 34वें स्थान पर खिसका।
- धीमी प्रगति से केंद्र के 12268 करोड़ के फंड का नुकसान।
- केवल 10% गांव हर घर जल प्रमाणित हो पाया है।
राजस्थान में जल जीवन मिशन (JJM) के कामकाज पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ऑडिट में फर्जी और दोहरे बिलों के आधार पर 7.07 करोड़ रुपए के संदिग्ध भुगतान का मामला सामने आया है।
इतना ही नहीं, ठेकेदारों को जरूरी थर्ड-पार्टी निरीक्षण सर्टिफिकेट के बिना 122.31 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। दूसरी ओर, राज्य ग्रामीण परिवारों को नल से जल पहुंचाने के अपने लक्ष्य का आधा भी पूरा नहीं कर पाया।
ठेकेदारों को बिना जरूरी जांच के भुगतान
CAG ने पाया कि ठेकेदारों को जरूरी थर्ड-पार्टी निरीक्षण (TPI) प्रमाण पत्र के बिना ही 122.31 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया। सबसे गंभीर मामला फर्जी और दोहरे बिलों से जुड़ा है। ऑडिट में ऐसे बिलों के आधार पर 7.07 करोड़ रुपए के भुगतान को संदिग्ध पाया गया।
96 लाख का लक्ष्य, 47.65 लाख घरों तक पहुंचा नल
CAG के मुताबिक, राजस्थान में 96.06 लाख ग्रामीण परिवारों को नल से जल देने का लक्ष्य रखा गया था। जनवरी 2025 तक इनमें से सिर्फ 47.65 लाख परिवारों यानी 49.61% तक ही नल का पानी पहुंच पाया। यानी आधे से ज्यादा परिवार अभी भी लक्ष्य से बाहर हैं।
'हर घर जल' के मामले में भी पिछड़ा राजस्थान
जनवरी 2025 तक राजस्थान के सिर्फ 1 ब्लॉक, 400 ग्राम पंचायत और 4,254 गांव ही 'हर घर जल' के रूप में प्रमाणित हो सके। आंकड़ों के मुताबिक, 302 में से सिर्फ 1 ब्लॉक। 11,000 से ज्यादा में से सिर्फ 400 ग्राम पंचायतें (3.56%) और 42 हजार से ज्यादा में से सिर्फ 4254 गांव (10.05%) ही हर घर जल के रूप में प्रमाणित हो पाए।
स्कूल और आंगनबाड़ी भी पूरी तरह नहीं जुड़े
अप्रैल 2024 तक प्रदेश के सिर्फ 41.12% स्कूलों में नल से जल की सुविधा पहुंची थी। आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति भी बेहतर नहीं रही। इनमें सिर्फ 44.80% केंद्रों तक ही नल का पानी पहुंच पाया।
राष्ट्रीय रैंकिंग में भी राजस्थान पीछे
जल जीवन सर्वेक्षण के दौरान राजस्थान का प्रदर्शन भी कमजोर रहा। अक्टूबर 2022 से मार्च 2024 के बीच राजस्थान 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 30वें से 34वें स्थान के बीच रहा।
केंद्र से मिलने वाली राशि भी पूरी नहीं मिली
CAG के अनुसार, काम की धीमी प्रगति का असर केंद्र से मिलने वाली राशि पर भी पड़ा। राजस्थान को केंद्र सरकार से 41,414.24 करोड़ रुपए का शेयर मिलना था, लेकिन राज्य को 29,145.92 करोड़ रुपए ही प्राप्त हुए।
यानी आवंटित राशि का करीब 29.62% हिस्सा नहीं मिल सका। इसके अलावा फरवरी 2025 तक PFMS और JJM-IMIS पोर्टल के आंकड़ों में 929.72 करोड़ रुपए का अंतर भी मिला।
गलत बैंक डिटेल से 33 करोड़ के भुगतान फेल
ऑडिट में भुगतान व्यवस्था में भी गड़बड़ी सामने आई। गलत बैंक विवरणों के कारण 511 लेन-देन में 33.22 करोड़ रुपए के भुगतान विफल हो गए। इसके अलावा उद्घाटन समारोहों और नियमित कर्मचारियों के वेतन पर भी अनधिकृत खर्च किए जाने की बात सामने आई।
पानी की गुणवत्ता जांच में भी कमी
पानी की गुणवत्ता जांच को लेकर भी कई कमियां मिलीं। राज्य और जिला स्तर की जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में रेडियोधर्मी और वायरल मानकों की जांच की सुविधा नहीं मिली। वहीं, 28.15 लाख फील्ड टेस्ट किट खरीदने का लक्ष्य था, लेकिन सिर्फ 11.46 लाख किट खरीदी गईं।
26 योजनाओं में से 16 समय से पीछे
क्षेत्रीय जल आपूर्ति योजनाओं की रफ्तार भी धीमी रही। कुल 26 योजनाओं में से 16 योजनाएं तय समय से पीछे चल रही थीं। इनमें देरी 11 से 38 महीने तक की मिली।
CAG की रिपोर्ट राजस्थान में जल जीवन मिशन की रफ्तार और वित्तीय प्रबंधन दोनों पर सवाल उठाती है। एक तरफ लाखों परिवारों तक नल का पानी पहुंचाने का लक्ष्य अधूरा है, तो दूसरी तरफ भुगतान, निरीक्षण, पानी की गुणवत्ता और योजनाओं में देरी जैसी कई कमियां सामने आई हैं।
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