एडवोकेट प्रोटेक्शन बिल: केंद्र ने बताया गैर-जरूरी, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा अंतिम फैसला
राजस्थान में वकीलों की सुरक्षा के लिए बनाया गया एडवोकेट्स प्रोटेक्शन बिल-2023 एक बार फिर चर्चा में है। विधानसभा से पारित होने के करीब साढ़े तीन साल बाद भी बिल को मंजूरी नहीं मिली है। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से इस बिल पर दोबारा विचार करने या इसे वापस लेने को कहा है। सोमवार, 12 अक्टूबर को राजस्थान हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से यह जानकारी दी गई। इसके बाद कोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह में अंतिम फैसला लेने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने साफ किया कि तय समय में फैसला नहीं हुआ तो मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ेगा। उन्हें हलफनामा देकर बताना होगा कि अब तक बिल पर अंतिम निर्णय क्यों नहीं लिया गया। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
केंद्र ने दो बार पत्र लिखकर मांगा जवाब
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 26 मई 2026 को राज्य के प्रमुख विधि सचिव को पत्र लिखा था। इसमें कहा गया कि वकीलों या किसी अन्य पेशेवर वर्ग के लिए अलग से संरक्षण कानून बनाने की जरूरत नहीं है। मंत्रालय ने राज्य सरकार से राजस्थान एडवोकेट्स प्रोटेक्शन बिल-2023 पर पुनर्विचार करने या इसे वापस लेने के संबंध में अपनी मंशा बताने को कहा।
इसके बाद केंद्र ने 26 जून 2026 को एक और पत्र भेजा। इसमें राज्य सरकार से बिल को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा गया। हालांकि, राज्य सरकार ने अब तक इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया है। अदालत में यही स्थिति सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह की समयसीमा दी।
हाईकोर्ट में किसने दायर की याचिका?
राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष प्रहलाद शर्मा ने बिल को अब तक मंजूरी नहीं मिलने के खिलाफ याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार लंबे समय से इस मामले में अपना रुख स्पष्ट नहीं कर रही है।
इससे पहले 5 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से बिल पर अपनी मंशा बताने को कहा था। अदालत ने सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए 12 अक्टूबर तक स्पष्टीकरण पेश करने का निर्देश दिया था। सोमवार को सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के पत्रों की जानकारी दी, लेकिन अंतिम निर्णय नहीं होने के कारण मामला अभी लंबित है।
वकील जुगराज चौहान की हत्या के बाद बना था बिल
राजस्थान में वकीलों की सुरक्षा के लिए अलग कानून बनाने की मांग फरवरी 2023 में तेज हुई थी। जोधपुर में अधिवक्ता जुगराज चौहान की हत्या के बाद प्रदेशभर में वकीलों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। 20 फरवरी 2023 से वकीलों ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया और सुरक्षा कानून बनाने की मांग उठाई।
वकीलों के आंदोलन के बीच तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार ने राजस्थान एडवोकेट्स प्रोटेक्शन बिल-2023 विधानसभा में पेश किया। विधानसभा ने 21 मार्च 2023 को इसे संशोधनों के साथ पारित कर दिया। इसके बाद 27 मार्च को वकीलों ने एक महीने से ज्यादा समय से चल रही हड़ताल खत्म कर दी थी।
बिल में वकीलों को क्या सुरक्षा देने का प्रस्ताव?
विधेयक का उद्देश्य वकीलों के साथ मारपीट, गंभीर चोट पहुंचाने, आपराधिक बल के इस्तेमाल और धमकी जैसी घटनाओं को रोकना है। इसके अलावा वकीलों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़े मामलों के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। बिल में ऐसे अपराधों के लिए सजा और जुर्माने का प्रावधान भी शामिल है।
लेकिन विधानसभा से पारित होना और कानून का लागू होना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। बिल को लागू करने के लिए जरूरी मंजूरी नहीं मिलने से इसका भविष्य अटका हुआ है।
अब हाईकोर्ट की चार सप्ताह की समयसीमा के बाद राज्य सरकार को अपना अंतिम रुख स्पष्ट करना होगा। सरकार बिल को लेकर क्या फैसला करती है, इस पर वकीलों और कानूनी क्षेत्र की नजरें रहेंगी।