मानगढ़ धाम को अभी राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा नहीं, केंद्र सरकार ने किया साफ इनकार
News In Short
- केंद्र सरकार ने कहा, फ़िलहाल मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा का नहीं।
- उदयपुर से भाजपा सांसद मन्नालाल रावत ने लोकसभा में पूछा था सवाल।
- 2022 में प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के मानगढ़ दौरे ने बढ़ाई थी उम्मीदें।
- 2022 में ही राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण की सिफारिशी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपी गई थी।
- आदिवासियों की आस्था का केंद्र होने से उठती रही है राष्ट्रीय स्मारक बनाने की मांग।
News In Detail
राजस्थान में आदिवासी समुदाय की आस्था का केंद्र मानगढ़ धाम को फिलहाल राष्ट्रीय स्मारक घोषित नहीं किया जाएगा। केंद्र सरकार ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कहा है कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उदयपुर के भाजपा सांसद मन्नालाल रावत ने इस बारे में लोकसभा में सवाल पूछा था। इसके जवाब में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने स्पष्ट कर दिया है कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का फिलहाल कोई विचार नहीं है।
सांसद रावत ने यह पूछा था सवाल
सांसद मन्नालाल रावत ने लोकसभा में प्रश्नकाल में यह मामला उठाया था। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का प्रस्ताव है, क्या बिरसा मुंडा या मानगढ़ पर फिल्म या वेब सीरीज बनाने की योजना है, क्या 'जनजातीय गौरव' नामक पुस्तक लिखी गई है और जनजातीय नायकों के शहादत स्थलों के संरक्षण के लिए क्या काम हो रहा है?
मंत्री ने किया इनकार
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सवाल के जवाब में कहा कि न तो मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक बनाने का कोई प्रस्ताव है और न ही इस पर कोई फिल्म या वेब सीरीज बनाने की कोई योजना है। उन्होंने बताया कि जनजातीय गौरव पुस्तक लिखी जा चुकी है। साथ ही जनजातीय कार्य मंत्रालय की ओर से 11 संग्रहालयों को मंजूरी दी गई है।
2022 में मोदी के दौरे ने बढ़ाई थी उम्मीदें
साल 2022 में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद मानगढ़ धाम का दौरा किया था। उस समय राजस्थान के तत्कालीन सीएम अशोक गहलोत, एमपी के शिवराज सिंह चौहान और गुजरात के भूपेंद्र पटेल भी मौजूद थे।
तब पीएम मोदी ने मानगढ़ के ऐतिहासिक नरसंहार को याद करते हुए कहा था कि 17 नवंबर 1913 को मानगढ़ में जो नरसंहार हुआ, वह अंग्रेजी हुकूमत की क्रूरता की पराकाष्ठा थी। दुर्भाग्य से आदिवासी समाज के इस बलिदान को इतिहास में जो जगह मिलनी चाहिए, वह नहीं मिली। आज देश उस कमी को पूरा कर रहा है।
इन शब्दों के बाद आदिवासी समुदाय में उम्मीद जगी थी कि अब मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलेगा। लेकिन सरकार के ताजा जवाब ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
वो रिपोर्ट, जो अलमारी में हो गई बंद?
हैरानी की बात यह है कि 2022 में राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (एनएमए) के अध्यक्ष तरुण विजय ने खुद मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक बनाने की सिफारिशी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपी थी। तत्कालीन संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन मेघवाल ने उस समय मीडिया से कहा था कि इस रिपोर्ट को सकारात्मक रूप से आगे बढ़ाया जाएगा। लेकिन अब केंद्र सरकार के इस ताजा जवाब ने उस रिपोर्ट के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आखिर क्यों उठती है राष्ट्रीय स्मारक की मांग?
मानगढ़ सिर्फ आदिवासी अस्मिता का प्रतीक माना जाता है। 17 नवंबर 1913 को डेढ़ लाख से अधिक भील आदिवासी यहां एकत्र हुए थे। अंग्रेजी हुकूमत ने इन पर गोलियां बरसा दीं। इसमें करीब 1500 आदिवासी शहीद हो गए थे।
इस नरसंहार की भयावहता जलियांवाला बाग से कम नहीं थी, लेकिन इतिहास की किताबों में इसे वह स्थान नहीं मिल पाया। यही वजह है कि राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के आदिवासी लंबे समय से इसे राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा दिलाने की मांग कर रहे हैं।
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